ईरान को लेकर अमेरिका-इजरायल का प्लान एक्सपोज! 7 दिन की बमबारी में 360 ठिकाने तबाह, जानें किन-किन सुविधाओं को बनाया निशाना

अमेरिका और इजरायल मिलकर लगातार ईरान पर हमला बोल रहे हैं. 7 दिनों में करीब 7 हजार बम गिराकर ईरान का 360 ठिकाने तबाह कर दिया गया है. ऐसे में सवाल आ रहा है कि आखिर ट्रंप और नेतन्याहू का प्लान क्या है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में पिछले एक हफ्ते से जारी संघर्ष थमने का नाम नहीं ले रहा है. अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर बड़े पैमाने पर हमले किए हैं, जिनमें हजारों बम गिराए गए. ये हमले सैन्य ठिकानों के साथ-साथ नागरिक सुविधाओं को भी निशाना बना रहे हैं. क्या ये सिर्फ रक्षा के लिए है या ईरान में बड़े बदलाव का इरादा है? आइए इसे विस्तार से समझते हैं.

एक हफ्ते में भारी तबाही

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर 7,000 से ज्यादा बम गिराकर 360 से अधिक ठिकानों को नेस्तनाबूद कर दिया है. इनमें सैन्य बेस, हथियार डिपो के अलावा अस्पताल, बिजली प्लांट और यहां तक कि एक लड़कियों का स्कूल भी शामिल है.

ये हमले ईरान की रक्षा क्षमता को कमजोर करने के लिए लगते हैं, लेकिन नागरिक क्षेत्रों पर असर से सवाल उठ रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह रणनीति ईरान को आर्थिक और सामाजिक रूप से तोड़ने की कोशिश है.

नेतन्याहू का आह्वान

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला खामेनेई की मौत के बाद एक बड़ा बयान दिया. उन्होंने ईरानी लोगों से अपील की कि वे अपनी सरकार को उखाड़ फेंकें.

नेतन्याहू ने कहा, "फारसी, कुर्द, अजेरियन, बलूच और अहवाजियों समेत सभी समुदायों को दमन से मुक्त होकर एक स्वतंत्र और शांतिपूर्ण ईरान बनाने का समय आ गया है." यह बयान साफ इशारा करता है कि इजरायल ईरान में शासन परिवर्तन चाहता है, ताकि क्षेत्र में स्थिरता आए.

ट्रंप ने नेतन्याहू के बयान का किया समर्थन 

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नेतन्याहू के बयान का समर्थन किया है. व्हाइट हाउस ने स्पष्ट किया कि युद्ध का मकसद ईरान की नौसेना, मिसाइल प्रोग्राम, परमाणु सुविधाओं और सहयोगी मिलिशिया को बेअसर करना है, न कि पूरा शासन बदलना. 

हालांकि, ट्रंप ने संकेत दिया कि अगर ईरान के मौजूदा सिस्टम में कोई ऐसा नेता आए जिसकी नीतियां अमेरिका के अनुकूल हों, तो वे उसे सत्ता में देखकर खुश होंगे. पुलिस स्टेशनों पर हमले से लगता है कि अमेरिका ईरानी नागरिकों में विद्रोह की उम्मीद कर रहा है.

ईरान में आंतरिक उथल-पुथल

तेहरान में पहले से सरकार विरोधी प्रदर्शन चल रहे हैं, जिन्हें सुरक्षा बलों ने कुचला है. कुर्द इलाकों में खामेनेई की मौत पर लोग जश्न मना रहे हैं और ज्यादा स्वायत्तता की मांग कर रहे हैं. अमेरिका-इजरायल की रणनीति लगती है कि बाहरी दबाव से ईरान के अंदर विद्रोह भड़के और सरकार खुद गिर जाए.

यह प्लान ईरान को अलग-थलग करने का लगता है, लेकिन इससे क्षेत्रीय शांति पर खतरा मंडरा रहा है. अगर विद्रोह बढ़ा तो ईरान में बड़े बदलाव आ सकते हैं, लेकिन मानवीय संकट भी गहरा सकता है. दुनिया की नजरें ईरान की राजनीति पर टिकी हुई हैं.

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