नेपाल की राजनीति में भूचाल, बालेन शाह की पार्टी आगे, पुराने दिग्गजों की सत्ता जमीन खिसकी

नेपाल के चुनावी रुझानों ने सियासत की तस्वीर बदल दी है। बालेन शाह की पार्टी भारी बढ़त में है। दशकों से सत्ता में रहे पारंपरिक दल पीछे छूटते दिख रहे हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

नेपाल के चुनावी नतीजे आने से पहले ही तस्वीर लगभग साफ दिख रही है। मतगणना के शुरुआती रुझानों ने बड़ा उलटफेर दिखाया है। काठमांडू के पूर्व मेयर बालेन शाह की पार्टी राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी तेजी से आगे बढ़ रही है। चुनाव में जनता ने पुराने दलों से दूरी बनाई है। कई दशकों से राजनीति पर कब्जा रखने वाली पार्टियां पीछे जाती दिख रही हैं। यही वजह है कि नेपाल की राजनीति में नया दौर शुरू होने की चर्चा तेज हो गई है।

क्या बालेन शाह पीएम बनेंगे?

ताजा रुझानों के मुताबिक बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने की संभावना मजबूत हो गई है। 275 सदस्यीय संसद के लिए हुए चुनाव में उनकी पार्टी बड़ी बढ़त बना चुकी है। प्रत्यक्ष चुनाव वाली 165 सीटों में से 115 सीटों पर उनकी पार्टी आगे चल रही है। यह आंकड़ा अपने आप में बड़ा संकेत माना जा रहा है। अगर यही रफ्तार बनी रही तो बालेन शाह नेपाल के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं।

क्या पुराने दल पूरी तरह पीछे?

नेपाल की राजनीति में लंबे समय से मजबूत रहे दल इस चुनाव में कमजोर दिख रहे हैं। नेपाली कांग्रेस और सीपीएन यूएमएल दोनों ही पीछे चल रहे हैं। नेपाली कांग्रेस अभी सिर्फ 14 सीटों पर आगे है। वहीं केपी ओली की पार्टी यूएमएल सिर्फ 13 सीटों पर संघर्ष करती दिख रही है। यह तस्वीर बताती है कि इस चुनाव में जनता ने पुरानी राजनीति को चुनौती दी है।

क्या ओली की हार तय मानी जाए?

पूर्व प्रधानमंत्री केपी ओली के लिए यह चुनाव मुश्किल साबित हो रहा है। वह अपने ही निर्वाचन क्षेत्र में पीछे चल रहे हैं। झापा जिले की सीट से वह लगातार जीतते आए थे। लेकिन इस बार तस्वीर उलटी दिख रही है। मतगणना के दौरान बालेन शाह को करीब 17 हजार वोट मिले। जबकि ओली को करीब 4 हजार वोट ही मिल पाए। यानी वह करीब 13 हजार वोट से पीछे चल रहे हैं।

क्या युवाओं ने खेल बदला?

विश्लेषकों का मानना है कि इस चुनाव में युवाओं ने बड़ा असर डाला है। खासकर Gen-Z मतदाताओं का समर्थन बालेन शाह को मिला है। युवा मतदाता लंबे समय से पुराने नेताओं से नाराज बताए जा रहे थे। भ्रष्टाचार और राजनीतिक अस्थिरता भी बड़ा मुद्दा बना। बालेन शाह ने नई राजनीति और साफ शासन का वादा किया। यही संदेश युवाओं को आकर्षित करता दिखा।

क्या चुनाव में तीन वजहें अहम?

नेपाल के इस राजनीतिक बदलाव के पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं। पहला कारण भ्रष्टाचार के खिलाफ जनता की नाराजगी है। दूसरा कारण युवाओं का पुराने नेताओं से मोहभंग बताया जा रहा है। तीसरा कारण बालेन शाह का नया राजनीतिक मॉडल है। उन्होंने खुद को एक अलग और ईमानदार विकल्प के रूप में पेश किया। यही वजह है कि जनता ने उन्हें खुलकर समर्थन दिया।

क्या 36 साल बाद बड़ा बहुमत?

नेपाल के चुनावी इतिहास में यह नतीजा खास माना जा रहा है। अगर रुझान नतीजों में बदलते हैं तो 36 साल बाद किसी एक पार्टी को प्रचंड बहुमत मिलेगा। देश में करीब 1 करोड़ 89 लाख मतदाताओं ने वोट डाला। 275 सीटों वाली संसद के लिए मतदान हुआ। प्रत्यक्ष सीटों के साथ समानुपातिक सीटों की गिनती भी जारी है। लेकिन मौजूदा रुझान बताते हैं कि नेपाल की राजनीति अब एक नए मोड़ पर खड़ी है।

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag