International News: बांग्लादेश में बड़ा विवाद तब खड़ा हो गया जब अवामी लीग के वरिष्ठ नेता और पूर्व उद्योग मंत्री नूरुल मजीद महमूद हुमायूं का अस्पताल में निधन हुआ। उनकी मौत के बाद सोशल मीडिया पर तस्वीरें वायरल हुईं, जिनमें उन्हें अस्पताल के बिस्तर पर हथकड़ी में दिखाया गया। तस्वीर सामने आते ही मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और वकीलों ने सरकार की कड़ी आलोचना शुरू कर दी। लोगों का कहना है कि बीमार और बुज़ुर्ग नेता के साथ ऐसा व्यवहार अमानवीय है। इस घटना ने यूनुस सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए।
हुमायूं शेख हसीना सरकार में मंत्री रह चुके थे। 2024 में छात्र आंदोलनों के दौरान हिंसा और हत्या के आरोपों में उन्हें गिरफ्तार किया गया था। तब से वे जेल में थे और खराब सेहत के कारण कई बार अस्पताल भी लाए गए। समर्थकों का आरोप है कि उनकी गिरफ्तारी राजनीतिक बदले की भावना से की गई थी। उनकी मौत ने अब जेल और अस्पताल में उनके साथ किए गए व्यवहार पर नई बहस छेड़ दी है। आलोचकों का कहना है कि बीमार कैदी के साथ भी इंसानियत से पेश आना चाहिए।
वायरल तस्वीरों पर प्रतिक्रिया देते हुए जेल प्रशासन ने सफाई दी। अधिकारियों ने कहा कि यह तस्वीर उस समय की है जब हुमायूं अस्पताल में भर्ती हुए थे, न कि उनकी आखिरी घड़ियों की। उनका कहना था कि हर कैदी के साथ नियमों के तहत समान व्यवहार किया जाता है। जेल अधिकारियों ने दावा किया कि हुमायूं को जरूरी चिकित्सा सुविधा और सम्मान दिया गया। उनका यह भी कहना था कि सुरक्षा कारणों से कुछ औपचारिकताएं पूरी करनी पड़ती हैं। हालांकि यह सफाई जनता के गुस्से को शांत नहीं कर सकी।
मानवाधिकार संगठनों और वकीलों ने इस घटना को शर्मनाक बताया। उनका कहना है कि गंभीर रूप से बीमार और वृद्ध नेता को हथकड़ी लगाना मानवाधिकारों का खुला उल्लंघन है। कार्यकर्ताओं ने इस घटना की स्वतंत्र जांच की मांग की। उनका कहना है कि कैदी भी इंसान होते हैं और उन्हें सम्मान मिलना चाहिए। कई संगठनों ने चेतावनी दी कि ऐसी घटनाएं बांग्लादेश की छवि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर खराब करेंगी। सोशल मीडिया पर लोगों ने भी गुस्सा जाहिर किया।
मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार ने सभी आरोप खारिज कर दिए। गृह सचिव मोहम्मद नसीमुल गनी ने तस्वीर को छेड़छाड़ किया हुआ बताया। उनका कहना था कि हुमायूं अस्पताल में अपने परिवार और डॉक्टरों के बीच इलाज करा रहे थे। सरकार का दावा है कि यह फोटो विपक्ष की ओर से फैलाई गई गलत जानकारी का हिस्सा है। उन्होंने कहा कि अगर किसी को शक है तो जांच कराई जा सकती है। हालांकि सरकार की सफाई से विवाद थमा नहीं।
इस घटना ने बांग्लादेश की राजनीति को और गरमा दिया है। अवामी लीग का कहना है कि हुमायूं के साथ ऐसा व्यवहार पार्टी को बदनाम करने की साजिश है। वहीं यूनुस समर्थकों का दावा है कि फोटो नकली है और इसे सरकार को अस्थिर करने के लिए फैलाया गया। आने वाले चुनाव से पहले यह विवाद और गहरा हो सकता है। यह मामला अब राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता का केंद्र बन गया है। अंतरराष्ट्रीय जगत भी इन घटनाओं पर नजर बनाए हुए है।
सरकार के इनकार के बावजूद आलोचना थमी नहीं है। मानवाधिकार संगठनों ने साफ कहा कि या तो फोटो की असलियत सामने लाई जाए या फिर जिम्मेदारों पर कार्रवाई हो। वे चाहते हैं कि जेलों और अस्पतालों में कैदियों के साथ कैसा व्यवहार होता है, इसकी पारदर्शी जांच हो। कई अन्य परिवार भी अब जेल में बंद अपने प्रियजनों के साथ दुर्व्यवहार की शिकायतें कर रहे हैं। यह विवाद सरकार और जनता के बीच अविश्वास को और गहरा कर रहा है। मामला अब बांग्लादेश में मानवाधिकार बहस का प्रतीक बन गया है। First Updated : Thursday, 02 October 2025