भारत की परवाह नहीं! बांग्लादेश अब पद्मा और तीस्ता नदी पर बनाएगा बैराज, चीन दौरे पर होगी बड़ी डील
बांग्लादेश ने भारत की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए पद्मा और तीस्ता नदी पर बैराज बनाने का ऐलान कर दिया है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान जल्द चीन दौरे पर जाएंगे, जहां इन प्रोजेक्ट्स के लिए अरबों डॉलर की फंडिंग की उम्मीद है.

नई दिल्ली: बांग्लादेश ने भारत की चिंताओं को नजरअंदाज करते हुए दो महत्वपूर्ण नदियों पर बैराज बनाने का फैसला किया है. प्रधानमंत्री तारिक रहमान ने पद्मा और तीस्ता नदी पर बैराज प्रोजेक्ट शुरू करने का ऐलान कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय में आया है जब वे जल्द ही चीन के दौरे पर जाने वाले हैं.
गाजीपुर में किया बड़ा ऐलान
बुधवार को गाजीपुर में एक कार्यक्रम के दौरान तारिक रहमान ने साफ कहा कि बीएनपी सरकार पद्मा बैराज और तीस्ता बैराज दोनों पर काम शुरू करेगी. उन्होंने दावा किया कि तीस्ता मुद्दे पर सबसे ज्यादा काम बीएनपी ने ही किया है. सरकार पहले ही पद्मा बैराज को मंजूरी दे चुकी है, अब तीस्ता पर भी काम तेज होगा.
चीन से अरबों डॉलर की उम्मीदपीएम रहमान जून के अंत में चीन जाएंगे. वहां तीस्ता बैराज समेत कई बड़े प्रोजेक्ट्स के लिए फंडिंग की बात हो सकती है. इस प्रोजेक्ट में अरबों डॉलर का निवेश लगने की संभावना है. बांग्लादेश के विदेश मंत्री पहले ही चीन से औपचारिक मदद मांग चुके हैं.
सूखे और फरक्का बैराज का हवाला
रहमान ने कहा कि सूखे के मौसम में बांग्लादेश को पर्याप्त पानी नहीं मिलता. उन्होंने भारत के फरक्का बैराज को दोष देते हुए कहा कि इससे उनके इलाकों में समुद्री खारा पानी घुस रहा है, जिससे सुंदरबन के जंगल और जानवर प्रभावित हो रहे हैं. उन्होंने बैराज बनाने का कारण बताया कि मॉनसून का अतिरिक्त पानी स्टोर करके सूखे में किसानों को दिया जा सके.
भारत के लिए चिंता का विषय
तीस्ता नदी भारत के सिलीगुड़ी कॉरिडोर (चिकन नेक) के बहुत करीब है. इस इलाके में चीनी कंपनियों और इंजीनियरों की मौजूदगी भारत की सुरक्षा के लिए खतरा बन सकती है.
भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता जल बंटवारा समझौता 2011 से अटका पड़ा है. पश्चिम बंगाल के विरोध के कारण यह हस्ताक्षर नहीं हो सका. अब बांग्लादेश चीन की तरफ झुक रहा है, जो भारत के लिए कूटनीतिक झटका माना जा रहा है.
चीन का बढ़ता प्रभाव
यह प्रोजेक्ट चीन की बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) का हिस्सा बन सकता है. इससे बांग्लादेश में चीन का प्रभाव बढ़ेगा और भारत के पड़ोस में उसकी रणनीतिक स्थिति मजबूत होगी. भारत अब इस स्थिति पर नजर रखे हुए है क्योंकि यह सिर्फ जल प्रबंधन नहीं, बल्कि क्षेत्रीय सुरक्षा और कूटनीति से जुड़ा मुद्दा है.


