Delhi Chakka Jam: नोएडा-गुरुग्राम-फरीदाबाद में 3 दिन का चक्का जाम, आम आदमी की जेब पर पड़ेगा असर

दिल्ली-एनसीआर में 21 से 23 मई तक ट्रांसपोर्टरों का तीन दिवसीय चक्का जाम शुरू हो गया है, जिससे नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद समेत पूरे NCR में सामान की सप्लाई प्रभावित होने वाली है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: दिल्ली-एनसीआर में 21 से 23 मई तक ट्रांसपोर्टरों द्वारा तीन दिन का प्रतीकात्मक ‘चक्का जाम’ शुरू हो गया है. इससे दिल्ली और आसपास के इलाकों में सामान की आवाजाही पर असर पड़ सकता है. नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद, फरीदाबाद समेत पूरे एनसीआर में दैनिक जरूरी सामानों की सप्लाई प्रभावित हो सकती है.

क्यों हो रहा है चक्का जाम?

ट्रांसपोर्टरों ने बढ़ते ग्रीन टैक्स, पुरानी कमर्शियल गाड़ियों पर पाबंदी और बढ़ती लागत के खिलाफ यह प्रोटेस्ट बुलाया है. ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) और कई यूनियनों के समर्थन से यह आंदोलन चल रहा है. ट्रांसपोर्टरों का कहना है कि बातचीत के बिना स्थिति और खराब हो सकती है.

सब्जी-फल की सप्लाई पर असर

सबसे पहले असर सब्जी मंडियों और लोकल मार्केट पर दिख सकता है. आसपास के राज्यों से आने वाली ट्रकें धीमी रहने या कम होने से टमाटर, प्याज, हरी सब्जियां और फल देर से पहुंच सकते हैं. नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और फरीदाबाद के रिटेल वेंडर्स को अनियमित सप्लाई का सामना करना पड़ सकता है, थोक मंडियों में भी रात भर आने वाले माल की आवक कम रहने की आशंका है.

किराना, दूध और जरूरी सामान प्रभावित

किराना दुकानों में रोजाना स्टॉक आने में देरी हो सकती है. पैकेटबंद खाद्य सामग्री, कोल्ड ड्रिंक्स और घरेलू जरूरी चीजें प्रभावित हो सकती हैं. दूध की सप्लाई सामान्य रहने की उम्मीद है, लेकिन मुख्य सड़कों पर जाम बढ़ने से कुछ इलाकों में देरी हो सकती है. पैकेटबंद पानी, ब्रेड, अंडे और FMCG प्रोडक्ट्स की री-स्टॉकिंग भी धीमी पड़ सकती है.

ऑनलाइन डिलीवरी और ई-कॉमर्स पर असर

फ्लिपकार्ट, अमेजन और क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स की डिलीवरी में देरी हो सकती है. बड़े सामान, फर्नीचर, इलेक्ट्रॉनिक्स और बल्क ऑर्डर्स ज्यादा प्रभावित होंगे. नोएडा एक्सटेंशन, फरीदाबाद और गाजियाबाद के कुछ इलाकों में लास्ट-माइल डिलीवरी सबसे ज्यादा प्रभावित होने की संभावना है.

फैक्टरियां और इंडस्ट्री पर असर

मानेसर, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद और फरीदाबाद की इंडस्ट्रियल यूनिट्स कच्चे माल और तैयार माल के लिए ट्रकों पर निर्भर हैं. मशीन पार्ट्स और पैकिंग सामग्री की सप्लाई रुकने से उत्पादन प्रभावित हो सकता है.

निर्माण कार्य और पेट्रोल पंप भी प्रभावित

सीमेंट, स्टील, रेत और भारी सामान की सप्लाई देरी से निर्माण साइट्स पर काम धीमा पड़ सकता है. पेट्रोल पंपों पर टैंकरों की आवाजाही धीमी होने से कुछ जगहों पर स्थानीय दबाव बढ़ सकता है. 

ट्रांसपोर्टरों ने सरकार से जल्द बातचीत की अपील की है ताकि देश की आर्थिक रीढ़ माने जाने वाले इस क्षेत्र को बड़ा नुकसान न पहुंचे. तीन दिनों तक सतर्क रहना और जरूरी सामान पहले से स्टॉक कर लेना उचित रहेगा.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो