जहांगीर खान चुनाव में नहीं, पर EVM पर रहेगा नाम, ममता के गढ़ में उम्मीदवार को लेकर बढ़ी चुनौती

पश्चिम बंगाल की फलता सीट पर टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनाव से नाम वापस ले लिया, लेकिन तय प्रक्रिया पूरी होने के कारण उनका नाम ईवीएम पर रहेगा. इस फैसले के बाद राज्य की राजनीति में हलचल तेज हो गई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

कोलकता: पश्चिम बंगाल की राजनीति में फलता विधानसभा सीट को तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन चुनाव से ठीक पहले पार्टी को बड़ा झटका लगा है. टीएमसी उम्मीदवार जहांगीर खान ने चुनावी मैदान से पीछे हटने का फैसला कर लिया है. हालांकि, नाम वापस लेने के बावजूद उनका नाम ईवीएम मशीन पर बना रहेगा, जिससे राजनीतिक हलकों में नई चर्चा शुरू हो गई है.

फलता सीट लंबे समय से तृणमूल कांग्रेस के लिए बेहद अहम मानी जाती रही है. यही वजह है कि जहांगीर खान के अचानक चुनाव से हटने के फैसले ने राज्य की राजनीति को गरमा दिया है. अब सवाल यह भी उठ रहा है कि जब उम्मीदवार मैदान में नहीं है, तब भी ईवीएम पर उसका नाम क्यों रहेगा.

टीएमसी के लिए क्यों अहम है फलता सीट

फलता विधानसभा सीट पर साल 2011 से लगातार तृणमूल कांग्रेस जीत दर्ज करती आ रही है. पार्टी का जीत का अंतर भी हर चुनाव में बढ़ता गया. साल 2016 में टीएमसी ने करीब 13 प्रतिशत वोटों के अंतर से जीत हासिल की थी, जबकि 2021 में यह अंतर बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंच गया. यह विधानसभा क्षेत्र डायमंड हार्बर लोकसभा सीट के अंतर्गत आता है, जहां से अभिषेक बनर्जी सांसद हैं. साल 2024 के लोकसभा चुनाव में अभिषेक बनर्जी ने यहां 7.1 लाख वोटों के भारी अंतर से जीत दर्ज की थी, जो पूरे पश्चिम बंगाल में सबसे बड़ी जीत मानी गई.

EVM पर क्यों रहेगा जहांगीर खान का नाम

खबरों के मुताबिक, चुनाव आयोग के अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उम्मीदवारों के नाम वापस लेने की अंतिम तारीख गुजर चुकी है. इसी वजह से ईवीएम और बैलेट पेपर में किसी तरह का बदलाव संभव नहीं है. एक अधिकारी ने कहा, फलता उपचुनाव के लिए नाम वापस लेने की आखिरी तारीख 13 अप्रैल थी. बैलेट पेपर और ईवीएम के पैनल पहले ही फाइनल किए जा चुके हैं.

चुनाव से पीछे हटने की क्या रही वजह?

फलता विधानसभा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर चुनावी धांधली के आरोपों के बाद दोबारा मतदान कराने का आदेश दिया गया था. इसी बीच जहांगीर खान ने चुनावी मैदान छोड़ने का फैसला लिया. खान ने कहा कि उन्होंने यह निर्णय फलता के हित और इलाके के विकास को ध्यान में रखते हुए लिया है. उन्होंने दावा किया कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने क्षेत्र के विकास के लिए विशेष पैकेज देने का आश्वासन दिया है. उन्होंने कहा, मैं फलता का बेटा हूं और मैं चाहता हूं कि यह क्षेत्र शांतिपूर्ण रहे तथा इसका विकास हो. इसके साथ ही उन्होंने कहा, मुख्यमंत्री ने फलता के विकास के लिए एक विशेष पैकेज की घोषणा की है, इसीलिए मैंने इस निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान प्रक्रिया से दूर रहने का निर्णय लिया है.

भाजपा ने साधा तंज

मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने हाल ही में जहांगीर खान पर निशाना साधते हुए कहा था, खुद को पुष्पा कहने वाले कहां है? उनके पास कोई और रास्ता नहीं था, क्योंकि उन्हें कोई मतदान एजेंट नहीं मिला, इसलिए उन्होंने चुनाव मैदान से भागने का फैसला किया. इस बयान के बाद भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के बीच आरोप-प्रत्यारोप और तेज हो गए हैं.

TMC ने फैसले से बनाई दूरी

तृणमूल कांग्रेस ने जहांगीर खान के फैसले को उनका निजी निर्णय बताया है. पार्टी ने साफ किया कि चुनाव से पीछे हटने का फैसला संगठन का नहीं, बल्कि उम्मीदवार का व्यक्तिगत फैसला है. पार्टी ने एक बयान में आरोप लगाया कि चार मई को विधानसभा चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद क्षेत्र में भय का माहौल बना हुआ है.

चुनाव में छाया रहा पुष्पा फैक्टर

पूरे चुनाव प्रचार के दौरान जहांगीर खान ने फिल्म पुष्पा के अंदाज को अपनाया था. वह लगातार फिल्म का चर्चित डायलॉग ‘पुष्पा झुकेगा नहीं’ बोलते नजर आए थे. मतदान से पहले उन्होंने पुलिस पर्यवेक्षक अजयपाल शर्मा को सार्वजनिक तौर पर चुनौती देते हुए कहा था कि पुष्पा की तरह वह भी किसी दबाव के आगे नहीं झुकेंगे.

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