US-China relations: अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक अहम बातचीत हुई है. यह चर्चा सोमवार को ट्रंप के शपथ ग्रहण से कुछ दिन पहले हुई. इस बातचीत में दोनों नेताओं ने टिकटॉक, व्यापार और ताइवान जैसे विवादास्पद मुद्दों पर चर्चा की. ट्रंप ने इस बातचीत को दोनों देशों के संबंधों के लिए "बेहद सकारात्मक" बताया.
चीन के विदेश मंत्रालय ने भी इस वार्ता की पुष्टि करते हुए इसे द्विपक्षीय संबंधों के लिए महत्वपूर्ण बताया. शी जिनपिंग ने ट्रंप को उनके दोबारा चुने जाने पर बधाई दी और दोनों देशों के बीच आपसी सहयोग को मजबूत करने की इच्छा जताई.
अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में टिकटॉक पर प्रतिबंध को बरकरार रखते हुए इसे राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया. ट्रंप और शी जिनपिंग के बीच टिकटॉक के स्वामित्व और इसके संचालन को लेकर चर्चा हुई. शी ने उम्मीद जताई कि इस मुद्दे पर समाधान निकाला जा सकेगा.
ट्रंप ने अपने चुनावी वादे के तहत चीनी आयात पर 60% टैरिफ लगाने की बात कही थी, जिससे चीन की चिंता बढ़ गई है. शी जिनपिंग ने इस पर जोर दिया कि दोनों देशों के आर्थिक संबंध परस्पर लाभकारी हैं और टकराव से बचने की आवश्यकता है. उन्होंने द्विपक्षीय सहयोग के रचनात्मक दृष्टिकोण पर बल दिया.
ताइवान का मुद्दा भी इस बातचीत का मुख्य केंद्र रहा. शी जिनपिंग ने कहा कि यह चीन की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सवाल है. उन्होंने ट्रंप से इस पर गंभीरता से विचार करने का आग्रह किया। दोनों नेताओं ने इस मुद्दे पर आपसी सम्मान और संवाद बनाए रखने की प्रतिबद्धता जताई.
ट्रंप के शपथ ग्रहण समारोह में चीन का प्रतिनिधित्व उपराष्ट्रपति हान झेंग करेंगे. यह पहली बार है जब कोई वरिष्ठ चीनी अधिकारी इस तरह के समारोह में हिस्सा लेगा. शी ने उम्मीद जताई कि नए प्रशासन के तहत अमेरिका-चीन संबंधों में स्थिरता आएगी.
डोनाल्ड ट्रंप ने बातचीत के बाद ट्रुथ सोशल पर लिखा, "राष्ट्रपति शी और मैं दुनिया को अधिक शांतिपूर्ण और सुरक्षित बनाने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे." उन्होंने अपने और शी के "बहुत अच्छे संबंधों" पर जोर दिया और यह भी कहा कि चीन वैश्विक मुद्दों, विशेषकर यूक्रेन युद्ध, में मध्यस्थता कर सकता है. First Updated : Saturday, 18 January 2025