पुतिन का बड़ा खुलासा, अब चलेगी अपनी करेंसी! BRICS देशों के सामने बेअसर हुआ डॉलर

अब दुनिया भर के देश व्यापार के लिए अपनी स्वदेशी करेंसी और डिजिटल फाइनेंस एसेट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण खुद रूस है.

Nidhi Jha
Edited By: Nidhi Jha

नई दिल्ली: वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंच पर एक बहुत बड़ा ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिल रहा है. रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने पश्चिमी देशों के आर्थिक एकाधिकार को खुली चुनौती दी है. उन्होंने एलान किया कि वैश्विक मंच पर अब अमेरिकी डॉलर और यूरो पर से दुनिया का भरोसा हमेशा के लिए टूट गया है.

पैरों पर कुल्हाड़ी मार दी

सेंट पीटर्सबर्ग इंटरनेशनल इकोनॉमिक फोरम के एक मुख्य सत्र में बोलते हुए पुतिन ने कहा कि पश्चिमी देशों द्वारा लगाए गए आर्थिक प्रतिबंधों और दूसरों की संपत्तियों को फ्रीज करने की नीति ने खुद उनके पैरों पर कुल्हाड़ी मार दी है. इस महत्वपूर्ण सत्र का संचालन भारत की जानी-मानी पत्रकार गीता मोहन ने किया.

पश्चिमी देशों के अविश्वास का दौर

पुतिन ने अपने संबोधन में साफ शब्दों में कहा कि यूक्रेन विवाद के बाद रूस के रिजर्व फंड को फ्रीज करना किसी 'चोरी' से कम नहीं था. उन्होंने दुनिया को आगाह करते हुए कहा कि आज जो देश पश्चिमी देशों के राष्ट्रीय हितों के खिलाफ जाएगा, उसका सेटलमेंट, तकनीक और लॉजिस्टिक सिस्टम पलक झपकते ही बंद कर दिया जाएगा. इसी डर और अविश्वास के कारण अब 'ग्लोबल साउथ' और ब्रिक्स देश डॉलर के विकल्प की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहे हैं.

राष्ट्रीय मुद्राओं में व्यापार

अब दुनिया भर के देश व्यापार के लिए अपनी स्वदेशी करेंसी और डिजिटल फाइनेंस एसेट्स को प्राथमिकता दे रहे हैं. इसका सबसे बड़ा उदाहरण खुद रूस है, जो अपने कुल निर्यात का लगभग 65 फीसदी लेन-देन अब अपनी राष्ट्रीय मुद्रा 'रूबल' में कर रहा है. पुतिन के अनुसार, अब वह समय दूर नहीं जब वैश्विक व्यापार से डॉलर का 'भौकाल' पूरी तरह गायब हो जाएगा.

G7 को पछाड़कर ब्रिक्स बना ग्लोबल ग्रोथ का इंजन

पुतिन ने आर्थिक आंकड़ों को सामने रखा. उन्होंने साबित किया कि ब्रिक्स समूह अब मिडिल ईस्ट के संगठन G7 से कहीं आगे निकल चुका है.

वैश्विक जीडीपी ग्रोथ: पिछले 5 वर्षों में वैश्विक विकास दर में ब्रिक्स की हिस्सेदारी 49% रही है, जबकि G7 का योगदान मात्र 18% सिमट कर रह गया है.

क्रय शक्ति: पीपीपी के आधार पर वैश्विक अर्थव्यवस्था में ब्रिक्स का हिस्सा 40% हो चुका है, जबकि G7 अब 20% से भी नीचे गिर गया है.

भविष्य की रफ्तार: आने वाले समय में ब्रिक्स देश 4% की सालाना दर से बढ़ेंगे, जबकि G7 देशों की विकास दर महज 1.1% रहने का अनुमान है.

नए व्यापारिक रास्तों का उदय

पुतिन ने साफ किया कि विश्व व्यापार का केंद्र अब पश्चिम से खिसककर पूर्व और दक्षिण की ओर आ गया है. 'नॉर्थ-साउथ कॉरिडोर' और 'ट्रांस-आर्कटिक ट्रांसपोर्टेशन रूट' जैसे नए रास्ते अब पश्चिमी नियंत्रण वाले हब्स को पूरी तरह दरकिनार कर रहे हैं. डब्ल्यूटीओ जैसी संस्थाओं पर निशाना साधते हुए उन्होंने कहा कि जब तक पश्चिम को फायदा था, उन्होंने नियम माने; लेकिन प्रतियोगिता में पिछड़ते ही उन्होंने नियमों को तोड़ना शुरू कर दिया.

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