कनाडा ने अमेरिका से दूरी बनाने के दिए संकेत, PM कार्नी ने US पर निर्भरता को बताया ‘खतरा’

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने अमेरिका के साथ आर्थिक रिश्तों को लेकर बड़ा बयान दिया है. ट्रंप की नीतियों और टैरिफ के असर से नाराज कनाडा अब नई रणनीति पर काम कर रहा है, जिससे संबंधों में बदलाव के संकेत मिल रहे हैं.

Shraddha Mishra

कनाडा और अमेरिका के रिश्तों में एक बार फिर खटास साफ नजर आने लगी है. जो संबंध कभी दोनों देशों की आर्थिक मजबूती की पहचान थे, अब वही चिंता का कारण बनते जा रहे हैं. कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने साफ शब्दों में कहा है कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में अमेरिका के साथ पुराने ढांचे पर निर्भर रहना अब सही रणनीति नहीं है. उनकी यह टिप्पणी ऐसे समय में आई है, जब दोनों देशों के बीच व्यापार और नीतियों को लेकर मतभेद बढ़ते दिख रहे हैं.

प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका के साथ कनाडा के आर्थिक संबंध, जो पहले ताकत माने जाते थे, अब कमजोर कड़ी बनते जा रहे हैं. उन्होंने जोर देकर कहा कि इन रिश्तों को नए तरीके से समझने और सुधारने की जरूरत है. कार्नी के अनुसार, दुनिया पहले से ज्यादा अस्थिर और विभाजित हो चुकी है. ऐसे में अमेरिका की बदलती व्यापार नीतियां भी चिंता का विषय बन गई हैं. उन्होंने कहा कि अमेरिका ने टैरिफ में भारी बढ़ोतरी की है, जो स्तर आखिरी बार महामंदी के दौर में देखने को मिला था.

टैरिफ का सीधा असर

कार्नी ने बताया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ का सीधा असर कनाडा की ऑटो और स्टील इंडस्ट्री पर पड़ा है. इन सेक्टरों में काम करने वाले लोगों के सामने रोजगार और आय को लेकर मुश्किलें बढ़ गई हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा अनिश्चित माहौल में कंपनियां नए निवेश से बच रही हैं. इससे आर्थिक विकास की गति पर असर पड़ सकता है. सरकार अब इस स्थिति से निपटने के लिए नए निवेशकों को आकर्षित करने और अन्य देशों के साथ व्यापार बढ़ाने की दिशा में काम कर रही है.

ट्रंप के बयान से बढ़ा विवाद

कनाडा में लोगों के बीच नाराजगी की एक बड़ी वजह डोनाल्ड ट्रंप का वह बयान भी है, जिसमें उन्होंने कनाडा को अमेरिका का 51वां राज्य बनने का सुझाव दिया था. इस टिप्पणी को कई लोगों ने कनाडा की संप्रभुता के खिलाफ माना. मार्क कार्नी ने भी इस बयान की कड़ी आलोचना करते हुए इसे अनुचित बताया. उनका मानना है कि इस तरह के बयान दोनों देशों के रिश्तों को और खराब करते हैं.

कार्नी का आर्थिक मामलों में लंबा अनुभव

मार्क कार्नी का आर्थिक मामलों में लंबा अनुभव रहा है. वह पहले बैंक ऑफ कनाडा और बैंक ऑफ इंग्लैंड के गवर्नर रह चुके हैं. उनकी बातों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर गंभीरता से लिया जाता है. हाल ही में स्विट्जरलैंड के दावोस में आयोजित विश्व आर्थिक मंच में उनके भाषण की काफी सराहना हुई थी. वहां उन्होंने बड़े देशों द्वारा छोटे देशों पर आर्थिक दबाव बनाने की नीति की आलोचना की थी और संतुलित वैश्विक व्यवस्था की जरूरत पर जोर दिया था.

चुनाव जीत के बाद नई रणनीति

कार्नी की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब उन्होंने हाल ही में हुए चुनाव में जीत हासिल कर बहुमत प्राप्त किया है. इसके बाद उनकी सरकार पर नई आर्थिक नीतियां लागू करने का दबाव बढ़ गया है. विपक्ष की कंजरवेटिव पार्टी लगातार सरकार से अमेरिका के साथ नया व्यापार समझौता करने की मांग कर रही है. हालांकि, कार्नी का रुख साफ है कि केवल अमेरिका पर निर्भर रहना अब सही नहीं है.

आने वाले समय में व्यापार समझौते की समीक्षा

कनाडा, अमेरिका और मेक्सिको के बीच मौजूदा मुक्त व्यापार समझौते की समीक्षा जुलाई में होने वाली है. यह बैठक तीनों देशों के आर्थिक रिश्तों के लिए अहम साबित हो सकती है. कार्नी ने कहा कि यह मान लेना सही नहीं होगा कि अमेरिका जल्द ही पहले जैसा हो जाएगा. उन्होंने स्पष्ट किया कि पुरानी सोच के साथ आगे बढ़ना अब व्यावहारिक नहीं है.

प्रधानमंत्री ने कहा कि अब समय आ गया है कि कनाडा अपनी आर्थिक और रणनीतिक स्वतंत्रता को मजबूत करे. उन्होंने जोर दिया कि देश को अपनी सुरक्षा, सीमाओं और भविष्य पर ज्यादा नियंत्रण हासिल करना होगा.

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