रद्द होने की कगार पर पाकिस्तान में होने वाली वार्ता 2.0? ईरान ने अमेरिका पर लगाए आरोप
ईरान ने पाकिस्तान में अमेरिका के साथ होने वाली अहम वार्ता से अचानक इनकार कर दिया है, जिससे युद्धविराम पर खतरा बढ़ गया है. ट्रंप की चेतावनियों और बढ़ते तनाव के बीच हालात और जटिल होते नजर आ रहे हैं.

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव ने एक बार फिर बड़ा मोड़ ले लिया है. दो महीने से जारी संघर्ष के बीच जहां युद्धविराम को आगे बढ़ाने की उम्मीदें लगाई जा रही थीं, वहीं अब ईरान के एक फैसले ने हालात को और उलझा दिया है. पाकिस्तान में होने वाली अहम वार्ता से पीछे हटने के ईरानी फैसले ने न केवल कूटनीतिक कोशिशों को झटका दिया है, बल्कि क्षेत्र में तनाव भी बढ़ा दिया है.
सरकारी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने पाकिस्तान में अमेरिका के साथ होने वाली दूसरे दौर की बातचीत में शामिल होने से मना कर दिया है. यह फैसला ऐसे समय पर आया है, जब दोनों देशों के बीच युद्धविराम की अवधि 22 अप्रैल को खत्म होने वाली है. ईरान के इस कदम से उन उम्मीदों को बड़ा झटका लगा है, जिनके तहत माना जा रहा था कि बातचीत के जरिए तनाव कम किया जा सकता है. इससे पहले संकेत मिले थे कि ईरान वार्ता में भाग ले सकता है, लेकिन आखिरी समय में उसने अपना रुख बदल लिया.
ट्रंप का बयान आया सामने
ईरान के इनकार से कुछ ही घंटे पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि उनके प्रतिनिधि सोमवार को इस्लामाबाद पहुंचेंगे और शांति वार्ता में हिस्सा लेंगे. इस बयान के बाद ऐसा लग रहा था कि बातचीत के जरिए कोई सकारात्मक नतीजा निकल सकता है. व्हाइट हाउस ने भी पुष्टि की थी कि उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और अन्य वरिष्ठ अधिकारी इस टीम का हिस्सा होंगे. पाकिस्तान ने भी वार्ता को देखते हुए सुरक्षा व्यवस्था सख्त कर दी थी. लेकिन ईरान के फैसले के बाद अब यह पूरी प्रक्रिया अधर में लटकती नजर आ रही है.
ईरान ने अमेरिका पर लगाए गंभीर आरोप
तेहरान ने वार्ता से पीछे हटने के पीछे अमेरिका को जिम्मेदार ठहराया है. ईरान का कहना है कि वाशिंगटन की मांगें बहुत ज्यादा हैं और उनकी अपेक्षाएं वास्तविकता से परे हैं. ईरानी अधिकारियों ने यह भी आरोप लगाया कि अमेरिका बार-बार अपना रुख बदलता है और उसके बयान एक-दूसरे से मेल नहीं खाते. इसके अलावा, ईरान ने अपने बंदरगाहों के आसपास जारी अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी को भी युद्धविराम का उल्लंघन बताया है.
ईरानी नेतृत्व की कड़ी प्रतिक्रिया
रविवार को हुई एक उच्च स्तरीय बैठक में ईरान के प्रथम उपराष्ट्रपति मोहम्मद रजा आरिफ ने अमेरिका के रवैये की तीखी आलोचना की. उन्होंने कहा कि अमेरिकी नीति असंगत और बचकानी है. उनके अनुसार, अमेरिका पहले दबाव बनाकर युद्धविराम और वार्ता की बात करता है, लेकिन बाद में अपनी शर्तें और सख्त कर देता है. इस तरह का व्यवहार भरोसा बनाने में सबसे बड़ी बाधा बन रहा है.
अचानक बदला रुख
दिलचस्प बात यह है कि कुछ दिन पहले तक ईरान के वार्ता में शामिल होने के संकेत मिल रहे थे. खबरें थीं कि ईरानी प्रतिनिधिमंडल पाकिस्तान जा सकता है. यहां तक कि संसद अध्यक्ष मोहम्मद बगेर क़लीबाफ़ ने कहा था कि कूटनीति के रास्ते से पीछे हटने का सवाल ही नहीं है. लेकिन बाद में हालात तेजी से बदले और ईरान ने बातचीत से दूरी बना ली. माना जा रहा है कि अमेरिका की नई चेतावनियों ने इस फैसले को प्रभावित किया.
ट्रंप की धमकी से बढ़ा तनाव
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक कड़ा संदेश देते हुए ईरान को चेतावनी दी. उन्होंने कहा कि अगर ईरान प्रस्तावित समझौते को नहीं मानता है, तो अमेरिका उसके नागरिक ढांचे को निशाना बना सकता है. ट्रंप ने यहां तक कहा कि अमेरिका ईरान के पावर प्लांट और पुलों को नष्ट कर सकता है. इस बयान ने दोनों देशों के बीच पहले से मौजूद तनाव को और बढ़ा दिया है.
मुख्य मुद्दों पर कायम है टकराव
गुप्त स्तर पर बातचीत के प्रयासों के बावजूद, कई बड़े मुद्दों पर दोनों देशों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. इनमें ईरान का परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय संगठनों के साथ उसके संबंध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण जैसे मुद्दे शामिल हैं. अमेरिकी पक्ष का कहना है कि दोनों देशों के बीच गहरा अविश्वास है, जो किसी भी समझौते के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है.
इधर, होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर भी स्थिति गंभीर बनी हुई है. ईरान ने चेतावनी दी है कि अगर कोई जहाज उसके निर्देशों का पालन नहीं करता है, तो उसे निशाना बनाया जा सकता है. बताया जा रहा है कि इस जलमार्ग के दोनों सिरों पर सैकड़ों जहाज फंसे हुए हैं. यह रास्ता वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए बेहद अहम है, क्योंकि दुनिया के करीब पांचवें हिस्से का तेल इसी रास्ते से गुजरता है.
ईरान ने अमेरिकी नाकाबंदी को आक्रामक कदम बताया है और उस पर युद्धविराम तोड़ने का आरोप लगाया है. वहीं, अमेरिका ने ईरान पर जहाजों पर गोलीबारी करने का आरोप लगाया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में ईरानी युद्धपोतों ने भारतीय झंडे वाले दो व्यापारिक जहाजों पर फायरिंग की, जिससे उन्हें वापस लौटना पड़ा. इस घटना ने समुद्री सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ा दी है.
अमेरिका का कहना है
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि उनकी टीम पाकिस्तान में शांति वार्ता के लिए तैयार है. उन्होंने ईरान से अपील की कि वह समझौता स्वीकार करे, नहीं तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. व्हाइट हाउस के अनुसार, उपराष्ट्रपति जेडी वैंस और अन्य अधिकारी इस वार्ता में शामिल होने वाले थे.
ईरान का कहना है
ईरानी सरकारी मीडिया का कहना है कि तेहरान ने अमेरिका के साथ नई वार्ता को खारिज कर दिया है. इसके पीछे अमेरिका की कठोर शर्तें, बार-बार बदलता रुख और जारी नौसैनिक नाकाबंदी को मुख्य कारण बताया गया है. ईरान का मानना है कि इस तरह के माहौल में निष्पक्ष और सार्थक बातचीत संभव नहीं है.


