वेई फेंगहे और ली शांगफू पर चीन का बड़ा फैसला, जानें किन आरोपों में मिली मौत की सजा
चीन के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा सुनाई है. सजा के साथ-साथ उन्हें दो साल की मोहलत भी दी गई है. दोनों ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अधीन काम कर चुके थे.

बीजिंग: चीन के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को मौत की सजा सुनाई गई है. जिन पूर्व रक्षा मंत्रियों वेई फेंगहे और ली शांगफू को मौत की सजा मिली है उन पर भ्रष्टाचार के आरोप थे. उनकी सजा के साथ-साथ उन्हें दो साल की मोहलत भी दी गई है. चीनी मीडिया के अनुसार, फेंगहे और शांगफू, जिन्होंने उनके बाद रक्षा मंत्री का पद संभाला था. उनको 2024 में सत्ताधारी कम्युनिस्ट पार्टी से निकाल दिया गया था. दोनों ही राष्ट्रपति शी जिनपिंग के अधीन काम कर चुके थे.
जानें क्या किया था अपराध
चीन के दो पूर्व रक्षा मंत्रियों, वेई फेंगहे और ली शांगफू को भ्रष्टाचार के आरोपों में मौत की सजा सुनाई गई है. उनकी मौत की सजा को कुछ समय के लिए निलंबित कर दिया गया है. गुरुवार देर दोपहर शिन्हुआ न्यूज़ एजेंसी द्वारा जारी बयान के अनुसार एक सैन्य अदालत ने वेई को रिश्वत लेने का दोषी पाया जबकि ली को रिश्वत लेने और देने, दोनों का दोषी पाया गया. बयान में इन मामलों में शामिल रिश्वत की सटीक राशि का जिक्र नहीं किया गया था.
बयान से पता चलता है कि दोनों व्यक्तियों को मौत की सजा सुनाई गई थी जिसमें दो साल की मोहलत, राजनीतिक अधिकारों से स्थायी रूप से वंचित करना और उनकी सभी निजी संपत्तियों को जब्त करना शामिल है. इसमें आगे कहा गया है कि दो साल की मोहलत की अवधि समाप्त होने के बाद उनकी सजा को आजीवन कारावास में बदल दिया जाएगा. जिसमें सजा में कमी या पैरोल की कोई संभावना नहीं होगी.
दो पूर्व रक्षा मंत्रियों को सजा-ए-मौत
ये सजाएं 2012 में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग द्वारा अपना भ्रष्टाचार विरोधी अभियान शुरू करने के बाद से वरिष्ठ सैन्य अधिकारियों को दी गई अब तक की सबसे कठोर सजाएं हैं. ली ने मार्च से अक्टूबर 2023 तक चीन के राष्ट्रीय रक्षा मंत्री के रूप में कार्य किया. उन्हें चीन के सबसे कम समय तक सेवा देने वाले रक्षा मंत्री होने का गौरव प्राप्त है.
ली को शी जिनपिंग ने व्यक्तिगत रूप से एक शीर्ष रक्षा पद के लिए चुना था. ली को पद से हटाए जाने के बाद, रॉकेट फोर्स के कई शीर्ष अधिकारियों को भी भ्रष्टाचार के आरोपों में बर्खास्त कर दिया गया था. 2012 में सत्ता में आने के बाद से, राष्ट्रपति शी ने भ्रष्टाचार-विरोधी एक विशाल अभियान की अगुवाई की है.
इस अभियान के तहत दस लाख से अधिक अधिकारियों को दंडित किया गया है. इस अभियान का मुख्य उद्देश्य चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के भीतर से भ्रष्टाचार को जड़ से खत्म करना है.
विश्वासघात करने का आरोप
शी जिनपिंग के भ्रष्टाचार-विरोधी अभियान के दौरान वेई एकमात्र ऐसे शीर्ष-रैंकिंग वाले चीनी जनरल बन गए. यह चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के साथ विश्वासघात करने अथवा किसी शत्रुतापूर्ण शक्ति के प्रभाव में आ जाने का एक अप्रत्यक्ष संकेत माना जाता है. वर्ष 2024 के एक बयान में यह स्पष्ट रूप से कहा गया था कि उन्होंने विश्वास तोड़ा है और अपनी ईमानदारी गंवा दी है.


