LAC के पास चीन की नई चाल! अरुणाचल सीमा के पास तेजी से बस रहे सैकड़ों ‘शियाओकांग’ गांव
चीन ने LAC के पास 600 से अधिक ‘शियाओकांग’ गांव बसाए हैं, जिनमें से करीब 450 अरुणाचल प्रदेश सीमा के पास हैं. विशेषज्ञ इसे रणनीतिक कदम मान रहे हैं, जबकि भारत ‘वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम’ के जरिए सीमा गांवों को मजबूत कर रहा है.

नई दिल्ली: भारत-चीन सीमा पर हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं. इसी बीच चीन की एक नई रणनीति सामने आई है, जिसने सुरक्षा एजेंसियों की चिंता बढ़ा दी है. जानकारी के मुताबिक चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) के आसपास 600 से अधिक नए गांव बसाए हैं. इनमें से बड़ी संख्या अरुणाचल प्रदेश की सीमा के करीब है. भारतीय सेना के उपप्रमुख (रणनीति) लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि ये गांव तेजी से विकसित किए जा रहे हैं और इनमें से लगभग 72 प्रतिशत गांव उत्तर-पूर्वी राज्यों के पास स्थित हैं.
‘शियाओकांग’ गांव क्या हैं?
चीन इन सीमावर्ती गांवों को “शियाओकांग गांव” कहता है. चीनी भाषा में शियाओकांग का मतलब होता है “समृद्ध या खुशहाल गांव”. पिछले करीब पांच वर्षों से चीन तिब्बत स्वायत्त क्षेत्र (TAR) के पास भारतीय सीमा से लगे इलाकों में इन गांवों का निर्माण कर रहा है. इन गांवों में आधुनिक सुविधाओं से लैस दो मंजिला बड़े मकान, चौड़ी सड़कें और बुनियादी ढांचा तैयार किया गया है. देखने में ये सामान्य आवासीय बस्तियां लगती हैं, लेकिन रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इनका उद्देश्य केवल नागरिकों को बसाना नहीं है.
दोहरे इस्तेमाल की रणनीति
रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार, इन गांवों का निर्माण “ड्यूल यूज” यानी दोहरे इस्तेमाल के लिए किया गया है. सामान्य समय में इनका उपयोग नागरिकों के रहने के लिए किया जा सकता है, लेकिन तनाव या युद्ध की स्थिति में यहां सैनिकों को ठहराया जा सकता है या सैन्य आपूर्ति के लिए इनका इस्तेमाल हो सकता है. विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि चीन इस तरह विवादित क्षेत्रों में अपनी मौजूदगी मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. नागरिक आबादी बसाकर वह भविष्य में अपने दावे को मजबूत करने की रणनीति अपना सकता है.
अरुणाचल प्रदेश के पास सबसे ज्यादा गांव
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के अनुसार, बनाए गए गांवों में से लगभग 450 गांव सीधे तौर पर अरुणाचल प्रदेश की सीमा से सटे हुए हैं. इसके अलावा कुछ गांव भूटान की सीमा के पास भी बनाए गए हैं. खास तौर पर अरुणाचल प्रदेश के लोहित घाटी और तवांग सेक्टर के सामने वाले इलाकों में इन बस्तियों की गतिविधियां ज्यादा देखी जा रही हैं. इससे साफ है कि चीन इन संवेदनशील क्षेत्रों पर खास ध्यान दे रहा है.
गांवों में अब बसने लगे हैं लोग
हालांकि चीन ने इन गांवों का निर्माण 2019 से ही तेजी से शुरू कर दिया था, लेकिन शुरुआती वर्षों में इनमें ज्यादा लोग नहीं रहते थे. अब स्थिति बदल रही है. 2023 के बाद से चीनी नागरिक धीरे-धीरे इन गांवों में बसने लगे हैं. इससे इन बस्तियों की वास्तविक गतिविधियां बढ़ गई हैं और इलाके में स्थायी आबादी दिखाई देने लगी है.
चीन ने 1 जनवरी 2022 से एक नया थल सीमा कानून लागू किया है. इस कानून का उद्देश्य सीमावर्ती क्षेत्रों की सुरक्षा मजबूत करना और वहां आर्थिक विकास को बढ़ावा देना बताया गया है. इसके तहत सरकार लोगों को सीमा के पास बसने और वहां काम करने के लिए प्रोत्साहित करती है. विशेषज्ञों का मानना है कि इस नीति के जरिए चीन सीमावर्ती आबादी को निगरानी तंत्र और एक तरह की मानव ढाल के रूप में भी इस्तेमाल कर सकता है.
भारत भी कर रहा है तैयारी
चीन की इस रणनीति के जवाब में भारत भी अपनी सीमावर्ती बस्तियों को मजबूत बनाने की दिशा में काम कर रहा है. भारत सरकार ने 2022 में “वाइब्रेंट विलेज प्रोग्राम” की शुरुआत की है. इस योजना के तहत सीमा से सटे गांवों में सड़क, बिजली, संचार और पर्यटन जैसी सुविधाएं विकसित की जा रही हैं. कुल 663 सीमावर्ती गांवों को इस योजना के तहत विकसित किया जाएगा. इनमें से 17 गांवों को पायलट प्रोजेक्ट के रूप में चुना गया है. अरुणाचल प्रदेश के जेमीथांग, ताक्सिंग, चयांग ताजो, ट्यूटिंग और किबिथू जैसे गांवों को विकास के लिए प्राथमिकता दी गई है.
सीमा पर बढ़ रहा बुनियादी ढांचा
चीन केवल गांव ही नहीं बना रहा, बल्कि सीमा के पास नई सड़कों, पुलों और हवाई पट्टियों का भी तेजी से निर्माण कर रहा है. खासकर तवांग और सियांग घाटी के आसपास चीन का इंफ्रास्ट्रक्चर तेजी से विकसित हो रहा है. इसके जवाब में भारत भी सीमा पर अपनी कनेक्टिविटी मजबूत कर रहा है. नए हेलिपैड, वैकल्पिक सड़क मार्ग और घाटियों को जोड़ने वाली सड़कों के जरिए भारतीय सेना की आवाजाही पहले की तुलना में काफी तेज और आसान हो गई है.
भारत के सामने नई चुनौती
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के अनुसार, सीमा के पास तेजी से उभरती ये बस्तियां भारत के लिए एक नई रणनीतिक चुनौती हैं. ऐसे में भारत के लिए जरूरी है कि सीमावर्ती इलाकों में रहने वाली आबादी को वहीं बनाए रखा जाए और वहां बुनियादी सुविधाएं मजबूत की जाएं. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में सीमा क्षेत्रों का विकास और वहां की आबादी को मजबूत करना भारत की सुरक्षा रणनीति का अहम हिस्सा बन सकता है.


