ईरान को हथियार सप्लाई कर रहा चीन, अमेरिकी खुफिया एजेंसी का बड़ा खुलासा, ट्रंप का गुस्सा फूट पड़ेगा?
ईरान ने जिस अमेरिकी F-15 लड़ाकू विमान को मार गिराया, राष्ट्रपति ट्रंप ने संकेत दिया कि इसमें एक हैंडहेल्ड हीट-सीकिंग मिसाइल का इस्तेमाल हुआ था. अगर यह मिसाइल चीनी बनी हुई निकली, तो यह बीजिंग की सीधी भागीदारी का बड़ा सबूत माना जाएगा.

चीन एक तरफ खुद को अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम कराने वाला शांतिदूत बताने की कोशिश कर रहा है, वहीं दूसरी ओर अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बीजिंग अगले कुछ हफ्तों में ईरान को नए कंधे से दागे जाने वाले विमान भेदी मिसाइल सिस्टम पहुंचाने की तैयारी कर रहा है. ये मिसाइल सिस्टम कम ऊंचाई पर उड़ने वाले अमेरिकी हेलीकॉप्टरों और लड़ाकू विमानों के लिए बड़ा खतरा साबित हो सकते हैं. खुफिया सूत्रों के मुताबिक, चीन इन हथियारों को तीसरे देशों के रास्ते भेजने की योजना बना रहा है ताकि उनकी असली उत्पत्ति छिपाई जा सके.
चीन MANPADS भेजने की तैयारी में
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने रिपोर्ट दी है कि चीन ईरान को आधुनिक हैंडहेल्ड हीट-सीकिंग मिसाइल सिस्टम सप्लाई करने वाला है. पिछले हफ्ते ईरान ने जिस अमेरिकी F-15 जेट को मार गिराया था, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने संकेत दिया कि उसमें इसी तरह की मिसाइल का इस्तेमाल हुआ था. यदि यह मिसाइल चीनी मूल की साबित होती है तो यह बीजिंग की प्रत्यक्ष भागीदारी का सबूत माना जाएगा.
ट्रंप की बीजिंग यात्रा पर साया
यह खबर ऐसे समय आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप अगले महीने चीन की राजधानी बीजिंग में राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मुलाकात करने वाले हैं. एक तरफ चीन युद्धविराम कराने में अपनी भूमिका का दावा कर रहा है, वहीं दूसरी ओर वह ईरान की सैन्य क्षमता को मजबूत करने में लगा है. ऐसे में ट्रंप-शी वार्ता अब काफी तनावपूर्ण होने की उम्मीद है. यदि अमेरिका को चीनी हथियारों के ठोस सबूत मिलते हैं तो न सिर्फ युद्धविराम टूट सकता है, बल्कि अमेरिका चीन पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध भी लगा सकता है.
चीन ने आरोपों को खारिज किया
अमेरिका में चीनी दूतावास ने इन आरोपों को पूरी तरह निराधार और सनसनीखेज बताया है. चीन का कहना है कि वह केवल रक्षात्मक प्रणालियों की बात कर रहा है. बीजिंग का तर्क है कि वह ईरान पर बहुत अधिक तेल निर्भर है, इसलिए तेहरान का साथ नहीं छोड़ सकता. तीसरे देशों के जरिए हथियार भेजकर चीन युद्ध के बाद तटस्थ रहने का दावा कर सकेगा, जबकि पर्दे के पीछे उसने ईरान की रक्षा क्षमता को मजबूत कर दिया होगा.
ईरान को मिल रही दोतरफा विदेशी मदद
ईरान को विदेशी सहायता अब दो हिस्सों में बंटी नजर आ रही है. रूस सक्रिय रूप से खुफिया जानकारी साझा कर ईरान को अमेरिकी संपत्तियों को निशाना बनाने में मदद कर रहा है. अब चीन का नाम भी इसमें शामिल हो गया है. खुफिया रिपोर्ट के अनुसार, चीन MANPADS को तीसरे देशों के माध्यम से भेजकर अपनी भागीदारी छिपाने की कोशिश कर रहा है.


