सीजफायर ऐलान पर विवाद: शहबाज शरीफ के पोस्ट को लेकर उठे सवाल, 'कॉपी-पेस्ट' का आरोप

ईरान-अमेरिका सीजफायर के ऐलान के बीच पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ का एक सोशल मीडिया पोस्ट विवादों में घिर गया है. पोस्ट के ड्राफ्ट सामने आने के बाद इस पर 'कॉपी-पेस्ट' और बाहरी हस्तक्षेप के आरोप लगने लगे हैं.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका-इजरायल के बीच कुछ समय के लिए युद्धविराम की घोषणा हुई, लेकिन इस ऐलान के साथ ही पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ एक नए विवाद में घिर गए हैं. सोशल मीडिया पर उनके द्वारा साझा किया गया पोस्ट अब सवालों के घेरे में आ गया है.

दरअसल, शहबाज शरीफ के उस संदेश पर यूजर्स ने संदेह जताया है, जिसमें उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से ईरान को लेकर अपनी आक्रामक बयानबाजी रोकने की अपील की थी. कई लोगों का दावा है कि यह पोस्ट पाकिस्तान में नहीं बल्कि किसी बाहरी संस्था द्वारा तैयार किया गया हो सकता है.

पोस्ट के ड्राफ्ट ने बढ़ाया विवाद

शहबाज शरीफ के सोशल मीडिया पोस्ट का एक ड्राफ्ट सामने आया, जिसे अंतिम पोस्ट से महज एक मिनट पहले अपडेट किया गया था.

इस ड्राफ्ट पर लिखा था: "ड्राफ्ट: X पर पाकिस्तान के PM का मैसेज."

यही लाइन अब पूरे विवाद की वजह बन गई है.

shehbaze shariz ceasefire post controversy
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'क्या पोस्ट बाहर से लिखा गया?'

ड्रॉप साइट सबस्टैक के संस्थापक रयान ग्रिम ने इस पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह पोस्ट संभवतः खुद शहबाज शरीफ ने नहीं लिखा होगा. उनका तर्क था कि प्रधानमंत्री का अपना स्टाफ उन्हें "पाकिस्तान के PM" कहकर संबोधित नहीं करेगा.
उन्होंने आशंका जताई कि यह संदेश अमेरिका या इजरायल में से किसी एक द्वारा तैयार किया गया हो सकता है.

सोशल मीडिया पर उठे कई सवाल

अन्य यूजर्स ने भी पोस्ट के शुरुआती ड्राफ्ट को लेकर सवाल खड़े किए. उन्होंने पूछा कि इसमें "ड्राफ्ट" का उल्लेख क्यों था और प्रधानमंत्री का जिक्र अंग्रेजी में क्यों किया गया. इन बिंदुओं के आधार पर कई लोगों ने इसे बाहरी हस्तक्षेप से जोड़कर देखा.

सीजफायर से जुड़े बड़े अपडेट

डोनाल्ड ट्रंप ने बताया कि वह ईरान के साथ दो सप्ताह के सीजफायर के लिए सहमत हो गए हैं. इसके तहत स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा खोलने के बदले अमेरिका और इजरायल अपने हमलों को अस्थायी रूप से रोकेंगे.

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी इस युद्धविराम को स्वीकार करने की पुष्टि की. उन्होंने कहा कि इस अवधि में होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन ईरानी सेना के समन्वय से ही संभव होगा.

पाकिस्तान की मध्यस्थता और वार्ता

शहबाज शरीफ ने कहा कि यह समझौता न केवल ईरान और अमेरिका के बीच बल्कि लेबनान समेत अन्य क्षेत्रों में भी लागू होगा और तुरंत प्रभावी होगा. उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि दोनों देशों के बीच बातचीत पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में शुरू होगी.

अमेरिका में भी उठी ट्रंप के खिलाफ आवाज

सीजफायर की घोषणा के बावजूद, अमेरिका में कई डेमोक्रेटिक सांसदों ने ट्रंप की ईरान को लेकर दी गई धमकियों की आलोचना की है. उन्होंने उनकी भाषा को लेकर कड़ा विरोध जताया और उन्हें पद से हटाने की मांग तक कर डाली.

तेल और शेयर बाजार पर असर

इस युद्धविराम के ऐलान का असर वैश्विक बाजारों पर भी पड़ा. अमेरिका में तेल की कीमतों में 17 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की गई, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया के शेयर बाजार मजबूती के साथ खुले.

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