ट्रंप की घोषणा के बाद ईरान ने किया ‘ऐतिहासिक जीत’ का दावा, क्या है सीजफायर के पीछे की असली कहानी?

अमेरिका के युद्धविराम फैसले के बाद ईरान ने इसे अपनी बड़ी जीत बताया है. दोनों देशों के दावों में अंतर और शर्तों से जुड़ी अनिश्चितता ने इस पूरे घटनाक्रम को और दिलचस्प बना दिया है.

Shraddha Mishra

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव ने एक नया मोड़ ले लिया है, जहां दोनों पक्ष अपनी-अपनी जीत का दावा कर रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा अचानक हमले रोकने और दो हफ्तों के युद्धविराम की घोषणा के बाद ईरान ने इसे अपनी “ऐतिहासिक जीत” बताया है. इस घटनाक्रम ने वैश्विक राजनीति में नई बहस छेड़ दी है कि आखिर इस समझौते में किसकी बढ़त रही. ट्रंप के ऐलान के तुरंत बाद ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने एक बयान जारी किया.

बयान में कहा गया कि अमेरिका को तेहरान के सैन्य और राजनीतिक दबाव के कारण अपने हमले रोकने पड़े. परिषद के अनुसार, अमेरिका ने दो सप्ताह के “दोतरफा युद्धविराम” को स्वीकार कर लिया है. ईरान ने इसे अपनी बड़ी सफलता बताते हुए कहा कि उसने अमेरिका को अपनी 10 सूत्रीय योजना मानने के लिए मजबूर कर दिया. यह बयान साफ तौर पर दिखाता है कि तेहरान इस समझौते को अपनी रणनीतिक जीत के रूप में पेश कर रहा है.

10 सूत्रीय योजना में क्या है?

ईरान की ओर से पेश किए गए प्रस्ताव में कई अहम मांगें शामिल हैं. इसमें गैर-आक्रामकता की गारंटी, ईरान के परमाणु कार्यक्रम के अधिकारों की मान्यता, आर्थिक प्रतिबंधों को हटाना और क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी जैसे मुद्दे प्रमुख हैं. ईरान का कहना है कि अमेरिका ने इन बिंदुओं पर सैद्धांतिक सहमति दे दी है, हालांकि इस पर आधिकारिक पुष्टि अभी स्पष्ट नहीं है. इसके बावजूद, यह दावा कूटनीतिक स्तर पर काफी अहम माना जा रहा है.

युद्धविराम पर पहले क्यों नहीं बनी सहमति?

ईरान ने यह भी खुलासा किया कि अमेरिका पिछले एक महीने से युद्धविराम के लिए लगातार दबाव बना रहा था. लेकिन तेहरान ने हर बार इसे ठुकरा दिया और अपने लक्ष्य हासिल होने तक संघर्ष जारी रखने का फैसला किया. ईरान के अनुसार, यह लड़ाई 40 दिनों तक चली और उसने अपने हितों को प्राथमिकता देते हुए कोई समझौता नहीं किया. परिषद ने यह भी कहा कि उनका उद्देश्य केवल युद्ध रोकना नहीं, बल्कि भविष्य के खतरों को खत्म करना भी है.

युद्धविराम के बावजूद खतरा कायम

हालांकि दोनों देशों के बीच युद्धविराम की घोषणा हो चुकी है, लेकिन ईरान ने साफ कर दिया है कि यह पूरी तरह स्थायी नहीं है. उसने कहा कि यह विराम कुछ शर्तों पर आधारित है और इन शर्तों के पालन पर ही आगे की स्थिति तय होगी. तेहरान ने चेतावनी दी है कि यदि उसकी मांगों को नजरअंदाज किया गया, तो संघर्ष फिर से शुरू हो सकता है. इससे साफ है कि स्थिति अभी भी पूरी तरह सामान्य नहीं हुई है.

मौजूदा हालात में यह कहना मुश्किल है कि यह युद्धविराम कितने समय तक टिकेगा. जहां एक तरफ ईरान इसे अपनी जीत बता रहा है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका की ओर से अभी तक इन दावों की पूरी पुष्टि नहीं की गई है. विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले दिनों में होने वाली बातचीत इस पूरे मामले की दिशा तय करेगी. फिलहाल, यह युद्धविराम राहत जरूर देता है, लेकिन स्थायी शांति के लिए अभी कई चुनौतियां बाकी हैं.

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