नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच एक नई बहस छिड़ गई है कि क्या वॉशिंगटन ने तेहरान को शांति प्रस्ताव के लिए सीमित समय दिया है. कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को 3 से 5 दिन की मोहलत दी है, लेकिन अब व्हाइट हाउस ने इन अटकलों पर स्पष्ट जवाब दे दिया है.
व्हाइट हाउस ने साफ किया है कि ईरान के साथ बातचीत के लिए कोई तय समय-सीमा नहीं है और यह पूरी तरह राष्ट्रपति ट्रंप के निर्णय पर निर्भर करेगा कि युद्ध कब समाप्त होगा. इस बीच, अमेरिका ने एकतरफा सीजफायर बढ़ाते हुए भी ईरान पर आर्थिक और समुद्री दबाव बनाए रखा है.
व्हाइट हाउस की प्रेस सेक्रेटरी कैरोलाइन लेविट ने मीडिया से बातचीत में कहा कि ईरान को कोई निश्चित समय सीमा नहीं दी गई है.
उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति ने ईरान से प्रस्ताव पाने के लिए कोई पक्की डेडलाइन तय नहीं की है, जैसा कि आज कुछ रिपोर्टों में बताया गया है. आखिर में, डेडलाइन का फैसला सुप्रीम कमांडर (राष्ट्रपति) ही करेंगे."
लेविट ने बताया कि अमेरिका इस समय दोहरी रणनीति पर काम कर रहा है. एक तरफ सैन्य हमलों को रोकने के लिए सीजफायर लागू है, वहीं दूसरी तरफ आर्थिक और समुद्री पाबंदियों को और सख्त किया जा रहा है.
उन्होंने स्पष्ट किया कि लड़ाई रुकने का मतलब यह नहीं है कि ईरान पर दबाव कम हो गया है.
व्हाइट हाउस के अनुसार, अमेरिका का आर्थिक अभियान लगातार जारी है.
लेविट ने कहा, "ऑपरेशन इकोनॉमिक फ्यूरी' जारी है, और असरदार व सफल नौसैनिक नाकाबंदी भी जारी है."
अमेरिका का दावा है कि समुद्री नाकाबंदी के कारण ईरान को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ रहा है.
लेविट ने कहा, "हम इस नाकाबंदी के जरिए ईरान की अर्थव्यवस्था को पूरी तरह जकड़ रहे हैं… वे रोज 500 मिलियन डॉलर का नुकसान झेल रहे हैं."
उन्होंने यह भी बताया कि ईरान के लिए तेल निर्यात करना मुश्किल हो गया है और भुगतान व्यवस्था भी प्रभावित हो रही है.
जब सीजफायर और नाकाबंदी की अवधि को लेकर सवाल किया गया, तो व्हाइट हाउस ने कोई स्पष्ट समयसीमा नहीं बताई.
लेविट ने दोहराया कि आगे की रणनीति का फैसला राष्ट्रपति ही करेंगे, “जब उन्हें लगेगा कि यह अमेरिका और अमेरिकी लोगों के हित में है.”
ट्रंप प्रशासन का मानना है कि मौजूदा हालात में अमेरिका मजबूत स्थिति में है.
लेविट ने कहा, "इस समय सारे पत्ते राष्ट्रपति ट्रंप के हाथ में हैं… ईरान बहुत कमजोर स्थिति में है."
उन्होंने यह भी जोड़ा कि राष्ट्रपति के सार्वजनिक बयान बातचीत को प्रभावित नहीं कर रहे हैं और अमेरिका अपनी शर्तों को लेकर स्पष्ट है.
"अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रंप अपनी मांगों और लाल रेखाओं (रेड लाइन्स) को लेकर बहुत स्पष्ट रहे हैं." First Updated : Thursday, 23 April 2026