13 मई को बीजिंग पहुंचेंगे डोनाल्ड ट्रंप, शी जिनपिंग के साथ होने वाली है ऐतिहासिक मुलाकात; जानिए दौरे का उद्देश्य

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 से 15 मई तक चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर बीजिंग का राजकीय दौरा करेंगे. यह 'सुपर-मुलाकात' दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संबंध सुधारने और होर्मुज स्ट्रेट जैसे विवादित मुद्दों पर चर्चा के लिए महत्वपूर्ण मानी जा रही है.

Sonee Srivastav

चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने आधिकारिक घोषणा कर दी है कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप 13 मई से 15 मई तक चीन का राजकीय दौरा करेंगे. चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर हो रही यह तीन दिवसीय यात्रा दोनों देशों के बीच संबंधों को नई दिशा देने वाली मानी जा रही है.

यात्रा का मुख्य उद्देश्य

यह दौरा दोनों देशों के बीच कूटनीतिक संवाद को मजबूत करने का प्रयास है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और चीन के बीच कई मुद्दों पर मतभेद रहे हैं. ऐसे में ट्रंप-शी मुलाकात को 'सुपर-मुलाकात' कहा जा रहा है. उम्मीद है कि इस यात्रा से दोनों देशों के बीच व्यापार, सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर खुली चर्चा होगी.

यह यात्रा अंतरराष्ट्रीय मंच पर बीजिंग और वॉशिंगटन के बीच नए अध्याय की शुरुआत कर सकती है। दोनों नेता व्यक्तिगत स्तर पर भी अच्छे संबंध रखते हैं, जिससे बातचीत में सकारात्मक नतीजे निकलने की संभावना बढ़ जाती है.

होर्मुज स्ट्रेट पर पहले का तनाव

पिछले महीने दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ा था .होर्मुज जलडमरू में अमेरिकी नौसेना की गतिविधियों को लेकर चीन ने साफ चेतावनी दी थी. चीनी रक्षा मंत्री एडमिरल डोंग जून ने कहा था कि अमेरिका को ईरान के साथ चीन के व्यापार और ऊर्जा संबंधों में दखल नहीं देना चाहिए. उन्होंने जोर देकर कहा कि होर्मुज स्ट्रेट चीन के लिए खुला रहना चाहिए. 

चीन की करीब 40 प्रतिशत तेल और 30 प्रतिशत एलएनजी जरूरतें इसी जलमार्ग से पूरी होती हैं. इसलिए चीन खाड़ी क्षेत्र में शांति और संघर्ष विराम पर लगातार जोर देता रहा है.

अमेरिका की नौसैनिक गतिविधियां सिर्फ ईरान पर नहीं, बल्कि चीनी युआन मुद्रा के इस्तेमाल को भी निशाना बना सकती हैं. कुछ जहाज युआन का उपयोग करके पेट्रोडॉलर व्यवस्था से बचने की कोशिश करते हैं. ऐसे में ट्रंप की इस यात्रा से इन मुद्दों पर भी बात हो सकती है.

उम्मीदें और आगे का रास्ता

दोनों देश जानते हैं कि आर्थिक और सामरिक रूप से एक-दूसरे पर निर्भर हैं. ट्रंप की चीन यात्रा से व्यापार संबंध सुधारने, नई समझौतों और क्षेत्रीय सुरक्षा पर सहमति बनाने की कोशिश रहेगी. यह मुलाकात न सिर्फ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करेगी बल्कि वैश्विक स्थिरता के लिए भी अहम साबित हो सकती है. पूरी दुनिया इस 'सुपर-मुलाकात' के नतीजों का इंतजार कर रही है.

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