ईरान-अमेरिका तनाव के बीच शांति की कोशिश फिर फेल, ट्रंप ने ठुकराया तेहरान का नया प्रस्ताव

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव कम होने के बजाय और बढ़ता दिख रहा है. तेहरान ने नया शांति प्रस्ताव भेजते हुए होर्मुज जलडमरूमध्य पर अपनी संप्रभुता मानने की शर्त रखी, लेकिन डोनाल्ड ट्रंप ने इसे देखते ही ठुकरा दिया.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

अमेरिका और ईरान के बीच जारी तनाव खत्म होने का नाम नहीं ले रहा है. दोनों देशों के बीच युद्ध रोकने की तमाम कोशिशें लगातार नाकाम होती दिखाई दे रही हैं. इसी बीच होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते संकट और अमेरिका की नाकेबंदी ने दुनियाभर में तेल और गैस आपूर्ति को गंभीर रूप से प्रभावित कर दिया है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में बेचैनी बढ़ गई है.

तनाव कम करने के लिए ईरान ने अमेरिका को एक नया शांति प्रस्ताव भेजा, लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे तुरंत खारिज कर दिया. ईरान की ओर से युद्धविराम, प्रतिबंधों में राहत और होर्मुज पर अपनी संप्रभुता को मान्यता देने जैसी शर्तें रखी गई थीं, जिन्हें वॉशिंगटन ने स्वीकार करने से इनकार कर दिया.

हर मोर्चे पर युद्धविराम चाहता है ईरान

रविवार को ईरान ने अमेरिका के सामने नया प्रस्ताव रखा था. इसमें सभी मोर्चों पर युद्धविराम लागू करने की मांग की गई थी. खासतौर पर लेबनान में संघर्ष रोकने और होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया था.

ईरान का कहना था कि युद्ध के दौरान उसे हुए नुकसान की भरपाई अमेरिका करे और मुआवजा दिया जाए. साथ ही अमेरिका अपने सभी प्रतिबंध हटाए ताकि ईरान को अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल बेचने की पूरी छूट मिल सके. प्रस्ताव में यह भी कहा गया था कि होर्मुज पर ईरान की संप्रभुता को मान्यता दी जाए.

ट्रंप ने क्या बताया? 

डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया के जरिए साफ कर दिया कि ईरान का यह प्रस्ताव उनके लिए पूरी तरह अस्वीकार्य है. अमेरिकी प्रशासन का मानना है कि तेहरान की शर्तें अमेरिका के रणनीतिक हितों के खिलाफ हैं. वहीं, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने रविवार को कहा कि अमेरिका के साथ बातचीत का मकसद केवल देश के अधिकारों की रक्षा करना और राष्ट्रीय हितों को मजबूत बनाना है. उन्होंने कहा कि इसका मतलब किसी के सामने आत्मसमर्पण करना नहीं है. ईरानी सरकारी मीडिया के मुताबिक पेजेश्कियन ने कहा कि ईरानी राष्ट्र दुश्मन के सामने कभी नहीं झुकेगा.

पाकिस्तान निभा रहा मध्यस्थ की भूमिका

वॉशिंगटन और तेहरान के बीच जारी वार्ता में पाकिस्तान मध्यस्थता कर रहा है. मौजूदा हालात के कारण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाली जहाजरानी व्यवस्था प्रभावित हुई है, जिससे वैश्विक ऊर्जा बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है.

भारत और पाकिस्तान के बीच हुए पिछले संघर्ष ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ पर आयोजित कार्यक्रम में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने कहा, फिलहाल, फील्ड मार्शल ने मुझे सूचित किया है कि हमें ईरान का जवाब मिल गया है. मैं इससे अधिक विवरण नहीं दे सकता.

अमेरिका और ईरान के बीच कैसे बढ़ा संघर्ष?

इससे पहले ईरानी मीडिया ने दावा किया था कि तेहरान ने अमेरिकी प्रस्ताव पर अपनी प्रतिक्रिया पाकिस्तान को सौंप दी थी, जिसे बाद में वॉशिंगटन भेजा गया. अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को ईरान पर किए गए संयुक्त हमलों और तेहरान की जवाबी कार्रवाई के बाद यह संघर्ष शुरू हुआ था. हालांकि आठ अप्रैल से युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों देशों के बीच तनाव अभी भी बना हुआ है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो