इराक के रेगिस्तान में इजरायल का गुप्त सैन्य अड्डा! ईरान युद्ध के बीच सामने आया बड़ा खुलासा
एक रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने पश्चिमी इराक में गुप्त सैन्य बेस बनाकर ईरान पर हमलों को अंजाम दिया. जब इराकी सैनिक वहां पहुंचे तो उन पर भी हमला हुआ. बाद में इराक ने संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कर विदेशी ताकतों पर आरोप लगाए.

ईरान के खिलाफ जारी संघर्ष के दौरान इजरायल ने पश्चिमी इराक के सुनसान रेगिस्तानी इलाके को अपने गुप्त सैन्य मोर्चे में बदल दिया था. दूर-दराज के इस इलाके में तैयार किया गया सीक्रेट बेस इजरायली विशेष बलों, रेस्क्यू टीमों और लॉजिस्टिक ऑपरेशनों का केंद्र बना हुआ था, जहां से ईरान के भीतर चलाए जा रहे सैन्य अभियानों को समर्थन दिया जा रहा था.
हालांकि यह गुप्त ऑपरेशन कुछ ही दिनों में उजागर होने के कगार पर पहुंच गया. एक रिपोर्ट के मुताबिक एक स्थानीय चरवाहे ने इलाके में संदिग्ध हेलीकॉप्टर गतिविधियों की सूचना दी, जिसके बाद इराकी सैनिक जांच के लिए वहां पहुंचने लगे. इसी दौरान इजरायल ने कथित तौर पर इराकी सैनिकों को रोकने के लिए हवाई हमला कर दिया.
गुप्त अड्डे पर तैनात थीं स्पेशल फोर्स और रेस्क्यू टीमें
रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों समेत ऑपरेशन से जुड़े लोगों के हवाले से कहा गया कि इस गुप्त ठिकाने पर इजरायल की स्पेशल फोर्स और रेस्क्यू टीमें तैनात थीं. इनका मकसद उन हालात से निपटना था, जब ईरान के भीतर मिशन के दौरान इजरायली पायलटों के विमान गिराए जाएं.
इजरायली अधिकारियों को आशंका थी कि घर से करीब 1,000 मील दूर किए जा रहे हमलों के दौरान उनके एयरक्रू दुश्मन के इलाके में फंस सकते हैं. संघर्ष के शुरुआती दौर में ऐसी स्थिति तब बनी जब इस्फहान के पास एक अमेरिकी F-15 विमान दुर्घटनाग्रस्त हो गया.
रिपोर्ट के अनुसार इजरायल ने दो अमेरिकी एयरमैन को बचाने में मदद की पेशकश की थी, हालांकि बाद में अमेरिकी बलों ने खुद ही रेस्क्यू ऑपरेशन संभाला. इसके बावजूद इजरायल ने बचाव अभियान को सुरक्षित बनाने के लिए हवाई हमले किए थे.
चरवाहे की सूचना से खुला राज
गुप्त अड्डे का खुलासा तब होने लगा जब एक स्थानीय चरवाहे ने रेगिस्तान में असामान्य सैन्य गतिविधियां देखीं. इराकी सरकारी मीडिया के मुताबिक हेलीकॉप्टर बेहद नीची उड़ान भर रहे थे और बार-बार उसी इलाके के ऊपर मंडरा रहे थे.
इसके बाद इराकी सैनिक हमवी वाहनों में सवार होकर जांच के लिए पहुंचे, लेकिन सुबह होते ही उन पर भारी गोलीबारी शुरू हो गई. इस हमले में एक इराकी सैनिक की मौत हो गई जबकि दो अन्य घायल हो गए. लेफ्टिनेंट जनरल कैस अल-मुहम्मदावी ने इराकी सरकारी मीडिया से कहा, यह गैरजिम्मेदाराना अभियान बिना समन्वय या अनुमोदन के अंजाम दिया गया.
इराक ने अमेरिका पर लगाया आरोप, बाद में हुआ खुलासा
इस घटना के बाद बगदाद में भारी नाराजगी देखने को मिली. इराक ने संयुक्त राष्ट्र में शिकायत दर्ज कराते हुए शुरुआत में विदेशी बलों को जिम्मेदार ठहराया और अमेरिका पर शक जताया. हालांकि बाद में सामने आया कि इराकी सैनिकों पर हुए हमले में अमेरिकी सेना शामिल नहीं थी, बल्कि कार्रवाई इजरायल ने की थी.
इजरायली वायुसेना प्रमुख ने दिए थे संकेत
संघर्ष के दौरान इजरायली अधिकारियों ने सार्वजनिक तौर पर इन गुप्त मिशनों को लेकर ज्यादा जानकारी नहीं दी. मार्च की शुरुआत में इजरायली वायुसेना के तत्कालीन प्रमुख टोमर बार ने विशेष यूनिट्स की भूमिका की तारीफ की थी. उन्होंने अपने विदाई संदेश में लिखा, इन दिनों, वायुसेना की विशेष इकाइयों के लड़ाकू विमान ऐसे विशेष मिशनों को अंजाम दे रहे हैं जो कल्पना को जगा सकते हैं.
रेगिस्तान में बढ़ी तलाशी और जांच
इस घटना के बाद इराकी और अरब मीडिया में कई तरह की अटकलें तेज हो गईं. सवाल उठने लगे कि आखिर इस सुनसान रेगिस्तानी इलाके में गुप्त ऑपरेशन कौन चला रहा था. इसके बाद इराकी प्रशासन ने इलाके में अतिरिक्त काउंटर टेररिज्म सर्विस यूनिट्स तैनात कीं. जांच के दौरान ऐसे संकेत मिले कि हाल ही में वहां बेहद प्रशिक्षित सैन्य बल सक्रिय थे.
मुहम्मदावी ने द वॉल स्ट्रीट जर्नल के हवाले से कहा, ऐसा प्रतीत होता है कि हमले से पहले जमीन पर एक निश्चित बल मौजूद था, जिसे हवाई सहायता प्राप्त थी, और जो हमारी इकाइयों की क्षमताओं से परे काम कर रहा था.
पहले भी सैन्य अभियानों का केंद्र रहा है इलाका
पश्चिमी इराक का विशाल रेगिस्तानी इलाका लंबे समय से सैन्य अभियानों के लिए इस्तेमाल होता रहा है. 1991 में सद्दाम हुसैन के खिलाफ अभियान के दौरान और फिर 2003 में भी अमेरिकी स्पेशल फोर्स ने इसी क्षेत्र का इस्तेमाल ऑपरेशन बेस के तौर पर किया था.


