नई दिल्ली: राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने मंगलवार को ईरान से कहा कि वह अपना एनरिच्ड यूरेनियम अमेरिका को सौंप दे ताकि उसे नष्ट किया जा सके। ट्रंप ने कहा कि यह यूरेनियम मध्य पूर्व में युद्ध खत्म करने की कोशिशों में सबसे बड़ी रुकावट है। उन्होंने विकल्प दिया कि ईरान चाहे तो अंतर्राष्ट्रीय निगरानी में अपने देश में ही यूरेनियम नष्ट कर दे।
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा, "एनरिच्ड यूरेनियम यानी न्यूक्लियर डस्ट तुरंत अमेरिका को सौंप दिया जाए ताकि उसे वापस लाकर नष्ट किया जा सके। या फिर बेहतर होगा कि इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के साथ मिलकर, उसी जगह या किसी मंजूर जगह पर उसे नष्ट कर दिया जाए।" उन्होंने कहा कि पूरी प्रक्रिया की निगरानी एटॉमिक एनर्जी कमीशन या कोई दूसरा संगठन करेगा।
दरअसल 28 फरवरी को मध्य पूर्व में युद्ध शुरू होने के बाद से ट्रंप लगातार कह रहे हैं कि उनका मुख्य मकसद ईरान को हाईली एनरिच्ड यूरेनियम से परमाणु हथियार बनाने से रोकना है। तेहरान ने हमेशा इस बात से इनकार किया है कि उसकी परमाणु हथियार बनाने की कोई योजना है।
ट्रंप का बयान ऐसे समय आया जब अमेरिकी सेना ने ईरानी नावों और मिसाइल लॉन्च ठिकानों पर आत्मरक्षा में हमले किए। US सेंट्रल कमांड के प्रवक्ता टिम हॉकिन्स ने कहा कि दक्षिणी ईरान में ये हमले अमेरिकी सैनिकों को ईरानी सेना से बचाने के लिए किए गए। निशाने पर मिसाइल लॉन्च साइटें और माइन बिछाने वाली नावें थीं। इन हमलों से 8 अप्रैल को शुरू हुआ कमजोर सीजफायर टूटने के कगार पर है।
हमलों के वक्त ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बाकिर गालिबफ और विदेश मंत्री अब्बास अराक्ची कतर के प्रधानमंत्री से मिलने दोहा में थे। वे युद्ध खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ संभावित समझौते पर चर्चा कर रहे थे।
सोमवार को ट्रंप ने कहा कि ईरान के साथ बातचीत "अच्छी" चल रही है, लेकिन चेतावनी दी कि बात नाकाम रही तो नए हमले होंगे। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर लिखा कि यह या तो "शानदार समझौता" होगा या कोई समझौता नहीं होगा। ट्रंप चाहते हैं कि युद्ध खत्म करने की शर्त में सऊदी अरब, पाकिस्तान, कतर, मिस्र, तुर्की और जॉर्डन अब्राहम समझौते में शामिल हों।
गौरतलब है कि अब्राहम समझौते ट्रंप के पहले कार्यकाल में अमेरिका की मध्यस्थता से हुए थे। इनका मकसद इजरायल के साथ संबंध सामान्य बनाना था। बहरीन और UAE 2020 में इसमें शामिल हुए थे। मिस्र, जॉर्डन और तुर्की पहले से इजरायल को मान्यता देते हैं।
सऊदी अरब का कहना है कि पहले फिलिस्तीनी राष्ट्र का रास्ता साफ होना चाहिए। पाकिस्तान के इजरायल से राजनयिक संबंध नहीं हैं। ट्रंप ने कहा कि एक-दो देशों को छोड़कर बाकी सभी को एक साथ दस्तखत करने होंगे। First Updated : Tuesday, 26 May 2026