अमेरिका का ईरान पर बड़ा हमला: 140 ठिकाने तबाह, ईरान ने भी किया पलटवार!

रविवार को अमेरिका ने ईरान पर सबसे बड़ा हमला किया। ये जवाबी कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कंटेनर जहाज पर हुए हमले के बाद हुई थी। उस हमले में जहाज में आग लग गई थी और क्रू को लाइफबोट लेनी पड़ी थी।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: रविवार को अमेरिका ने ईरान पर सबसे बड़ा हमला किया। ये जवाबी कार्रवाई स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में एक कंटेनर जहाज पर हुए हमले के बाद हुई थी। उस हमले में जहाज में आग लग गई थी और क्रू को लाइफबोट लेनी पड़ी थी। इसके बाद दोनों देशों के बीच तनाव फिर खतरनाक स्तर पर पहुंच गया है।  

US सेंट्रल कमांड का प्रहार   

अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक हमले में लगभग 140 ठिकानों को निशाना बनाया गया। ये संख्या पिछले दो दौर के हमलों से कहीं ज्यादा है। टारगेट में मिसाइल और ड्रोन लॉन्च साइट, गोला-बारूद के भंडार, संचार केंद्र और सैन्य ठिकाने शामिल थे।  

कमांड ने कहा कि इन हमलों का मकसद ईरान की उस क्षमता को कमजोर करना है जिसके जरिए वह नागरिक जहाजों को धमकाता है। अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने कहा, "ईरान ने गलत फैसला किया। अब उन्हें इसकी कीमत चुकानी होगी।"  

ईरान का पलटवार और एयर डिफेंस    

अमेरिकी हमलों के जवाब में ईरान ने खाड़ी के कई देशों पर हमले किए। निशाने पर बहरीन, कुवैत, कतर और ओमान थे। तेहरान ने इसे अमेरिकी दखल का जवाब बताया। खोर्रमाबाद में IRGC एयरोस्पेस फोर्स के नए एयर डिफेंस सिस्टम ने एक अमेरिकी क्रूज मिसाइल को हवा में मार गिराया।

ये ईरान की बढ़ी हुई डिफेंस तैयारी का संकेत माना जा रहा है। रिपोर्ट्स के अनुसार जास्क बंदरगाह पर हुए हमले में ईरान की नौसेना के लेफ्टिनेंट हामिदरेजा देहघानी की मौत हो गई। स्थानीय सूत्रों ने इसकी पुष्टि की है।  

होर्मुज बना सबसे बड़ी अड़चन  

तेल और गैस के लिए दुनिया का सबसे अहम रास्ता होने की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य अब बातचीत की सबसे बड़ी रुकावट बन गया है। पिछले हफ्ते हुई झड़पों के बाद शांति वार्ता टूटने के कगार पर पहुंच गई है। दिलचस्प बात ये है कि कुछ दिन पहले ही ईरान ने होर्मुज खोलने का ऐलान किया था।

तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इसे "दुनिया के लिए सबसे खास दिन" कहा था और उम्मीद जताई थी कि इससे शांति की राह खुलेगी। लेकिन अब हालात फिर बिगड़ गए हैं। 28 फरवरी को शुरू हुआ युद्ध अब नए दौर में है। दोनों तरफ से लगातार हमले और पलटवार से खाड़ी क्षेत्र में युद्ध फैलने का खतरा बढ़ गया है।

विशेषज्ञों का मानना है कि जब तक होर्मुज का मुद्दा नहीं सुलझता, तब तक बातचीत आगे नहीं बढ़ पाएगी। अमेरिका जहां ईरान की हमला करने की ताकत तोड़ना चाहता है, वहीं ईरान क्षेत्र में अमेरिकी मौजूदगी को चुनौती दे रहा है। नतीजा: खाड़ी में तनाव, तेल की कीमतों में उछाल और एक नए संघर्ष की आशंका।  

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