युद्ध के बीच शांति की कोशिश... ओमान की मध्यस्थता से क्या रुक पाएगा अमेरिका-ईरान टकराव?
अमेरिका और इज़रायल के हमलों के बीच ओमान ने ईरान से युद्धविराम की अपील की है. ईरान ने शांति के लिए खुलापन दिखाया, जबकि ट्रंप ने संभावित बातचीत की पुष्टि की. ड्रोन हमले से क्षेत्रीय तनाव और बढ़ गया है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच जहां एक ओर अमेरिका और इजरायल के हमलों के जवाब में ईरान ने लगातार दूसरे दिन जवाबी कार्रवाई की, वहीं दूसरी ओर ओमान ने एक बार फिर शांति की पहल करते हुए युद्धविराम की अपील की है. हालात ऐसे मोड़ पर पहुंच गए हैं जहां हर कदम क्षेत्र की स्थिरता को प्रभावित कर सकता है.
बता दें कि ओमान लंबे समय से अमेरिका और ईरान के बीच एक तटस्थ मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है. रविवार को ओमान के विदेश मंत्री बदर अलबुसैदी ने ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची से फोन पर बातचीत की. इस दौरान उन्होंने सभी पक्षों से युद्धविराम लागू करने और दोबारा बातचीत शुरू करने का आग्रह किया.
ओमान की शांति पहल
ओमान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, अलबुसैदी ने दोहराया कि सल्तनत की नीति स्पष्ट है- तनाव को कम किया जाए और ऐसे समाधान की ओर बढ़ा जाए जो सभी पक्षों की वैध चिंताओं को ध्यान में रखे. बयान में यह भी कहा गया कि ईरान ने शांति के लिए अपनी इच्छा जताई है और ऐसे किसी भी गंभीर प्रयास के लिए तैयार है जो क्षेत्र में स्थिरता ला सके.
जमीनी हालात तनावपूर्ण
हालांकि कूटनीतिक स्तर पर शांति की बात हो रही है, लेकिन जमीनी हालात अब भी तनावपूर्ण हैं. अमेरिका और इजरायल द्वारा किए गए हवाई हमलों के जवाब में ईरान ने दूसरे दिन भी हमले जारी रखे. इस बीच शुरुआती हमलों से बचा हुआ खाड़ी का एकमात्र देश ओमान भी अब इसकी चपेट में आ गया.
रविवार को ओमान के दुक्म बंदरगाह को दो ईरानी ड्रोन ने निशाना बनाया. इस हमले में एक विदेशी कामगार घायल हो गया. ओमान के सरकारी मीडिया ने इस घटना की पुष्टि की है. इस हमले ने यह संकेत दिया है कि संघर्ष का दायरा धीरे-धीरे बढ़ सकता है.
ट्रंप का बयान और संभावित वार्ता
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी इस मुद्दे पर बयान दिया है. उन्होंने एक साक्षात्कार में कहा कि ईरान का नया नेतृत्व उनसे बातचीत करना चाहता है और उन्होंने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया है. ट्रंप ने कहा कि यह कदम पहले उठाया जाना चाहिए था और अब काफी देर हो चुकी है. हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि बातचीत किससे और कब होगी. इससे यह अंदाजा लगाया जा रहा है कि फिलहाल वार्ता की रूपरेखा पूरी तरह तय नहीं है.
मध्यस्थ के रूप में ओमान
ओमान पहले भी अमेरिका और ईरान के बीच अप्रत्यक्ष वार्ताओं की मेजबानी करता रहा है. मस्कट में हुई चर्चाओं का उद्देश्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े मुद्दों पर समाधान तलाशना था. साल की शुरुआत में जिनेवा में चल रही बातचीत में भी ओमान ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. हालिया संयुक्त हमलों के बाद हालात जरूर बिगड़े हैं, लेकिन ओमान अब भी संवाद का रास्ता खुला रखना चाहता है. वह लगातार यह संदेश दे रहा है कि बातचीत ही इस संकट का स्थायी समाधान हो सकती है.


