अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा प्रस्तावित “गोल्ड कार्ड इमिग्रेशन प्रोग्राम” ने अमीर भारतीयों के बीच जबरदस्त दिलचस्पी पैदा कर दी है. भले ही यह योजना अभी आधिकारिक रूप से शुरू नहीं हुई है, लेकिन हाई-नेट-वर्थ इंडिविजुअल्स (HNIs) – विशेषकर टेक, फाइनेंस और हेल्थ सेक्टर से जुड़े पेशेवर – इसके बारे में जानकारी जुटाने में लग चुके हैं. ये लोग आमतौर पर अमेरिका में रह रहे 28 से 45 वर्ष की उम्र वाले कामकाजी वर्ग के अंतर्गत आते हैं.
ट्रंप के इस प्रस्तावित गोल्ड कार्ड वीज़ा की कीमत करीब $5 मिलियन (लगभग ₹40 करोड़) बताई जा रही है. इसकी लॉन्चिंग के कुछ ही दिनों में 70,000 से अधिक रजिस्ट्रेशन हो चुके हैं. हालांकि यह योजना फिलहाल केवल निवेशकों और अमीर प्रवासियों के लिए लक्षित है, न कि सामान्य पेशेवरों के लिए.
इमिग्रेशन लॉ फर्म्स के अनुसार, 50% इंटरेस्ट मिडिल ईस्ट और अन्य ऐसे देशों से आ रहा है, जहां भारतीयों की मजबूत उपस्थिति है. दावीज़ एंड एसोसिएट्स की कंट्री हेड सुकन्या रमन बताती हैं कि भारतीय प्रवासी बड़े पैमाने पर इस योजना को लेकर पूछताछ कर रहे हैं.
हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि अभी यह योजना एक मार्केटिंग रणनीति जैसी लग रही है क्योंकि इसके पीछे कोई ठोस वैधानिक ढांचा मौजूद नहीं है. फिलहाल केवल एक वेबसाइट उपलब्ध है जिसमें इच्छुक लोग रजिस्ट्रेशन कर सकते हैं ताकि योजना शुरू होने पर उन्हें सूचना दी जा सके. इसमें सिर्फ नाम जैसी बुनियादी जानकारी ही मांगी जा रही है.
ग्लोबल नॉर्थ रेसिडेंसी एंड सिटिजनशिप के फाउंडर रजनीश पाठक के मुताबिक, कई क्लाइंट्स जानना चाहते हैं कि यह नई योजना मौजूदा EB5 वीज़ा को कैसे प्रभावित करेगी. विशेषज्ञों की मानें तो जब तक गोल्ड कार्ड टैक्स छूट और स्थायी निवास जैसी शर्तें स्पष्ट नहीं करता, तब तक EB5 ही बेहतर विकल्प रहेगा.
ET की रिपोर्ट्स के अनुसार, यह भी चर्चा है कि गोल्ड कार्ड आने से EB5 वीज़ा खत्म किया जा सकता है. इसी आशंका से लोग तेजी से EB5 के लिए आवेदन कर रहे हैं क्योंकि इसमें निवेश की राशि तुलनात्मक रूप से कम है. First Updated : Wednesday, 09 July 2025