यूरोप में गर्मी का कहर: फ्रांस में 1,000 से ज्यादा अतिरिक्त मौतें, जर्मनी में जंगल की आग

एजेंसी ने कहा कि सबसे ज्यादा मौतें उन इलाकों में हुईं जहां भीषण गर्मी का रेड अलर्ट था। गर्मी के चरम पर देश का तीन-चौथाई हिस्सा इसकी चपेट में था। मरने वालों में 85% लोग 65 साल से ऊपर के थे।

Sachin Hari Legha

नई दिल्ली: पिछले हफ्ते यूरोप में पड़ी रिकॉर्डतोड़ गर्मी ने फ्रांस में करीब 1,000 लोगों की जान ले ली। कई देशों में तापमान के नए रिकॉर्ड बने। जर्मनी के कुछ हिस्सों में जंगल की आग भड़क गई। आपातकालीन सेवाओं पर दबाव बढ़ा और ट्रांसपोर्ट सिस्टम भी चरमरा गया, क्योंकि गर्मी अब महाद्वीप के पूर्वी हिस्सों की ओर बढ़ रही है।  

फ्रांस में तीन दिन में मौतों का आंकड़ा बढ़ा   

फ्रांस की सार्वजनिक स्वास्थ्य एजेंसी ने रविवार को बताया कि गर्मी के पीक पर देश में मौतें तेजी से बढ़ीं। खासकर पेरिस क्षेत्र में घरों से इमरजेंसी कॉल भी बढ़ीं। बुधवार को जब फ्रांस में अब तक का सबसे ज्यादा तापमान दर्ज हुआ, उस दिन 1,200 से ज्यादा मौतें हुईं। अगले दो दिनों में रोज 1,400 से ज्यादा लोग मरे।  

गर्मी से पहले अप्रैल-मई में फ्रांस में रोजाना 900 से 1,000 मौतें हो रही थीं। एजेंसी के मुताबिक सिर्फ उन तीन दिनों में कम से कम 1,000 अतिरिक्त मौतें हुईं। यह आंकड़ा बढ़ सकता है क्योंकि घरों में हुई मौतों का डेटा अभी जुटाया जा रहा है।  

बुजुर्गों पर सबसे ज्यादा असर, रेड अलर्ट वाले इलाके बेहाल    

एजेंसी ने कहा कि सबसे ज्यादा मौतें उन इलाकों में हुईं जहां भीषण गर्मी का रेड अलर्ट था। गर्मी के चरम पर देश का तीन-चौथाई हिस्सा इसकी चपेट में था। मरने वालों में 85% लोग 65 साल से ऊपर के थे।  

जर्मनी में दिन-रात के तापमान ने तोड़े रिकॉर्ड      

जर्मनी में जर्मन मौसम सेवा DWD के मुताबिक रविवार को पूर्वी सैक्सनी के कुबशिट्ज़ में रात का तापमान 29.4 डिग्री से नीचे नहीं गिरा, जो नया रिकॉर्ड है। कुछ घंटे पहले ही सैक्सनी-एनहाल्ट के मैकर्न-ड्रेविट्ज़ में दिन का तापमान 41.5 डिग्री पहुंचा था। पिछला रिकॉर्ड एक दिन पहले ही बना था।  

बर्लिन में पुलिस ने ब्रैंडेनबर्ग गेट के पास लोगों पर वॉटर कैनन से पानी की बौछार की। आमतौर पर प्रदर्शनकारियों पर इस्तेमाल होने वाली तोपों से भीड़ को राहत दी गई।  

जंगल की आग और फटा इन्फ्रास्ट्रक्चर   

पूर्वी जर्मनी के गोहरिशहाइड में जंगल में आग लगी। यह इलाका दूसरे विश्व युद्ध के गोला-बारूद से दूषित है, जिससे आग बुझाना खतरनाक हो गया। ट्राइसेन शहर के पास भी बिना फटे बम वाले इलाके में आग लगी। धमाकों के बाद काम रोकना पड़ा।  

बर्लिन में शनिवार को गर्मी से जुड़ी इमरजेंसी के लिए 500 अतिरिक्त एम्बुलेंस भेजी गईं। कई हाईवे की कंक्रीट सतह टूट गई। डॉयचे बान ने गैर-जरूरी ट्रेन यात्रा न करने की चेतावनी दी। लीपज़िग में ट्रैक पिघलने से सोमवार सुबह तक ट्राम सेवा बंद रही।  

ग्रीस-डेनमार्क में भी हालात खराब   

ग्रीस में पांच इलाकों में आग का बहुत ज्यादा खतरा बताया गया। डेनमार्क में शनिवार को रिकॉर्ड गर्मी के बाद तेज आंधी-तूफान आया। एक दिन में बिजली गिरने की 1,156 घटनाएं दर्ज हुईं।  

वर्ल्ड वेदर एट्रिब्यूशन की स्टडी कहती है कि ऐसी गर्मी क्लाइमेट चेंज के बिना मुमकिन नहीं थी। 50 साल पहले यह नामुमकिन थी, अब 20 साल पहले के मुकाबले 200 गुना ज्यादा संभावना है।  

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