नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच गहराते सैन्य तनाव के बीच अब ईरानी सत्ता के भीतर भी दरारें खुलकर सामने आने लगी हैं. रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण 'होर्मुज जलडमरूमध्य' को लेकर ईरान के सैन्य कमांडरों और वहां की लोकतांत्रिक सरकार के बीच गंभीर मतभेद पैदा हो गए हैं. जहां एक तरफ देश की सेना का सबसे शक्तिशाली धड़ा 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' अमेरिका के खिलाफ आर-पार की लड़ाई के मूड में है, वहीं राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान की अगुवाई वाली नागरिक सरकार कूटनीतिक समाधान तलाश रही है.
दो विपरीत विचारधाराओं में बंटा ईरान
सौफान सेंटर के वरिष्ठ विश्लेषक केनेथ कैट्ज़मैन के मुताबिक, इस समय ईरान के भीतर दो बिल्कुल अलग और विरोधी सोच काम कर रही हैं. IRGC के शीर्ष कमांडर और कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि होर्मुज स्ट्रेट पर ईरान का कड़ा नियंत्रण ही उसकी सबसे बड़ी रणनीतिक ताकत है. IRGC का मौजूदा रुख सिर्फ समुद्री मार्ग को ब्लॉक करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत का बदला लेने की भावना भी जुड़ी है. सैन्य गुट अमेरिका को एक ऐसा आक्रामक और कड़ा सबक सिखाना चाहता है. जिससे वाशिंगटन भविष्य में कभी भी ईरान की तरफ आंख उठाने की हिम्मत न कर सके.
IRGC बनाम मसूद पेजेशकियान सरकार
सैन्य कमांडरों के इस अड़ियल रुख के विपरीत, ईरान के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान और संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकर गालिबाफ जैसे नागरिक नेता युद्ध को टालने के पक्ष में हैं. राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि निर्वाचित सरकार देश की चरमराती आर्थिक स्थिति को देखते हुए और अधिक प्रतिबंध या सैन्य नुकसान नहीं झेलना चाहती. यही वजह है कि पेजेशकियान सरकार चाहती है कि ओमान की मध्यस्थता के जरिए अमेरिका के साथ बैक-चैनल बातचीत फिर से शुरू हो, ताकि होर्मुज स्ट्रेट के इस्तेमाल को लेकर एक साझा सहमति बनाई जा सके.
अमेरिका का कड़ा रुख और वैश्विक चिंता
दूसरी ओर, वाशिंगटन ने अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है. अमेरिकी रक्षा मंत्रालय का कहना है कि वैश्विक तेल व्यापार का लगभग 20 प्रतिशत हिस्सा इसी संकीर्ण समुद्री मार्ग से होकर गुजरता है. इसे खुला रखना अमेरिका की राष्ट्रीय और रणनीतिक प्राथमिकता है. व्हाइट हाउस ने चेतावनी दी है कि इस वैश्विक व्यापार मार्ग को बाधित करने या बंद करने के किसी भी ईरानी प्रयास का बेहद सख्त और सीधा सैन्य जवाब दिया जाएगा.
समझौता या भीषण युद्ध?
अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान का यह आंतरिक गतिरोध ही आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की दिशा तय करेगा. यदि IRGC के कट्टरपंथी अपने रुख पर अड़े रहे और होर्मुज स्ट्रेट को बंद करने की कोशिश की, तो अमेरिका की ओर से बड़े पैमाने पर विनाशकारी सैन्य हमले होना तय है. इसके विपरीत, यदि राष्ट्रपति पेजेशकियान का कूटनीतिक धड़ा IRGC को पीछे हटने के लिए मजबूर करने में कामयाब रहता है, तो ओमान की मध्यस्थता से एक नया शांति समझौता आकार ले सकता है. First Updated : Sunday, 12 July 2026