नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए समझौते के बाद पाकिस्तान ने खुद को इस प्रक्रिया से जोड़ने की कोशिश तेज कर दी है. पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने इस समझौते को ऐतिहासिक बताते हुए अपनी सरकार की भूमिका को प्रमुखता से सामने रखा है. पाकिस्तान सरकार का दावा है कि समझौते की प्रक्रिया में इस्लामाबाद ने मध्यस्थ और सहयोगी की भूमिका निभाई, जिससे दोनों देशों के बीच संवाद को आगे बढ़ाने में मदद मिली.
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री कार्यालय द्वारा जारी बयान में कहा गया कि एक समझौता दस्तावेज पर प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने गारंटर और मध्यस्थ के रूप में हस्ताक्षर किए. वहीं अमेरिका और ईरान के शीर्ष नेतृत्व ने अपने-अपने देशों का प्रतिनिधित्व करते हुए दस्तावेज को मंजूरी दी. इस घटनाक्रम को पाकिस्तान सरकार ने अपनी कूटनीतिक सफलता के रूप में प्रस्तुत किया है.
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस अवसर को अपनी विदेश नीति की उपलब्धि के रूप में पेश करना चाहता है. देश इस समय आर्थिक चुनौतियों, वित्तीय दबाव और कई घरेलू मुद्दों का सामना कर रहा है. ऐसे में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर किसी बड़ी प्रक्रिया से जुड़ाव सरकार की छवि को मजबूत करने में मदद कर सकता है.
विशेषज्ञों के अनुसार, पाकिस्तान लंबे समय से क्षेत्रीय राजनीति में अपनी भूमिका बनाए रखने की कोशिश करता रहा है. मध्य पूर्व से जुड़े मुद्दों पर उसकी विशेष रुचि रही है, क्योंकि ईरान उसका पड़ोसी देश है और दोनों देशों के बीच रणनीतिक तथा आर्थिक संबंध भी मौजूद हैं.
ईरान और अमेरिका के रिश्तों में संभावित सुधार का असर पूरे मध्य पूर्व की राजनीति पर पड़ सकता है. यदि दोनों देशों के बीच तनाव कम होता है तो क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में भी बदलाव देखने को मिल सकता है. ऐसे में पाकिस्तान यह सुनिश्चित करना चाहता है कि बदलते हालात में उसकी प्रासंगिकता बनी रहे.
विश्लेषकों का कहना है कि इस्लामाबाद अक्सर बड़े अंतरराष्ट्रीय मुद्दों में अपनी भागीदारी दर्ज कराने की कोशिश करता है. चाहे वह क्षेत्रीय सुरक्षा का मामला हो या कूटनीतिक वार्ता, पाकिस्तान खुद को संवाद और समाधान का समर्थक बताता रहा है.
विदेश नीति विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी देश की अंतरराष्ट्रीय भूमिका केवल बयानों से नहीं बल्कि उसके वास्तविक प्रभाव और योगदान से तय होती है. इसलिए आने वाले समय में यह देखना दिलचस्प होगा कि ईरान-अमेरिका वार्ता प्रक्रिया में पाकिस्तान की भूमिका कितनी प्रभावी रहती है और क्या वह क्षेत्रीय राजनीति में अपनी स्थिति को और मजबूत कर पाता है.
फिलहाल पाकिस्तान इस समझौते को अपनी कूटनीतिक उपलब्धि के रूप में प्रस्तुत कर रहा है, जबकि अंतरराष्ट्रीय समुदाय की नजर आगे होने वाली वार्ताओं और उनके परिणामों पर बनी हुई है. First Updated : Thursday, 18 June 2026