नई दिल्ली: वैश्विक कूटनीति में बड़ा उलटफेर हुआ है। दशकों से अमेरिका को करीबी दोस्त मानने वाले भारतीयों का अब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और अमेरिकी सरकार से मोहभंग हो गया है। प्यू रिसर्च सेंटर के ताजा ग्लोबल ओपिनियन सर्वे ने चौंकाने वाले आंकड़े सामने रखे हैं।
पिछले 25 साल में पहली बार भारतीयों का अमेरिकी नेतृत्व पर भरोसा सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया है। अमेरिका को लेकर नकारात्मक सोच रखने वालों की संख्या ने भी रिकॉर्ड तोड़ दिया है।
सर्वे का सबसे दिलचस्प पहलू ये रहा कि भारतीयों ने ट्रंप के बजाय रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को सबसे भरोसेमंद विदेशी नेता माना। 51% भारतीयों ने पुतिन की लीडरशिप पर भरोसा जताया। वहीं डोनाल्ड ट्रंप सिर्फ 39% रेटिंग के साथ दूसरे स्थान पर खिसक गए।
लिस्ट में इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू 34% के साथ तीसरे, फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों 33% के साथ चौथे, यूक्रेन के वोलोडिमिर जेलेंस्की 29% के साथ पांचवें और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग 25% के साथ छठे नंबर पर हैं।
पिछले एक साल में भारत में अमेरिका की छवि को जबरदस्त झटका लगा है। 2024 में 54% भारतीय अमेरिका को सकारात्मक नजर से देखते थे। अब ये आंकड़ा गिरकर 45% रह गया है। इसके उलट अमेरिका को निगेटिव मानने वाले भारतीय 31% हो गए हैं।
2002 से शुरू हुए इस सर्वे में अमेरिका की ये सबसे खराब रेटिंग है। ट्रंप पर भरोसा भी तेजी से घटा है। सिर्फ 39% भारतीयों को लगता है कि ट्रंप वैश्विक मुद्दे सही से संभाल सकते हैं। पिछले साल तक 52% भारतीय ट्रंप पर भरोसा करते थे।
रक्षा विशेषज्ञों के मुताबिक ट्रंप की अपनी नीतियों ने ही भारतीयों को उनसे दूर किया है। ग्लोबल टैरिफ, वेनेजुएला और ईरान के साथ तनाव को संभालने का तरीका भारतीयों को पसंद नहीं आया।
सबसे बड़ा झटका ट्रंप की सख्त इमिग्रेशन नीतियों से लगा। सिर्फ 32% भारतीयों ने इसका समर्थन किया। वेनेजुएला और ईरान पर ट्रंप की आक्रामक कूटनीति को भारत में क्रमशः 17% और 28% लोगों का ही साथ मिला।
ये अविश्वास सिर्फ भारत तक नहीं है। 36 देशों में हुए सर्वे में औसतन सिर्फ 23% लोगों ने ट्रंप के नेतृत्व पर भरोसा जताया। इंडोनेशिया, इटली, नाइजीरिया, दक्षिण अफ्रीका, दक्षिण कोरिया और तुर्किये में अमेरिका पर भरोसा 10% से ज्यादा गिर गया है।
दुनिया के सिर्फ 35% लोग मानते हैं कि अमेरिका शांति और स्थिरता में योगदान दे रहा है। प्यू ने भारत में 13 भाषाओं में 3566 लोगों से आमने-सामने बात करके ये सर्वे किया। आंकड़े बताते हैं कि ट्रंप की ‘अमेरिका फर्स्ट’ नीति ने अमेरिका को वैश्विक मंच पर अलग-थलग कर दिया है। First Updated : Saturday, 27 June 2026