US-इजरायल के खिलाफ ईरान को मिला नया साथी! हूती की एंट्री से मिडिल ईस्ट में हालात और बिगड़े
मिडिल ईस्ट में संघर्ष अब तीन मोर्चों पर फैल गया है. हूती विद्रोहियों के इजरायल पर मिसाइल हमलों से तनाव बढ़ गया है, जिससे समुद्री व्यापार, तेल सप्लाई और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर गंभीर असर पड़ने की आशंका है.

मिडिल ईस्ट में चल रहा संघर्ष अब पहले से कहीं ज्यादा जटिल और खतरनाक होता जा रहा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि यह लड़ाई अब केवल दो देशों तक सीमित नहीं रही, बल्कि कई मोर्चों पर फैल चुकी है. ताजा घटनाक्रम में यमन के हूती विद्रोही ने सीधे इजरायल पर मिसाइल हमला कर इस जंग को एक नए स्तर पर पहुंचा दिया है.
अब यह टकराव तीन अलग-अलग क्षेत्रों में फैल गया है- ईरान, लेबनान-इजरायल सीमा और यमन. पहले हूती इस जंग से दूर थे, लेकिन करीब चार हफ्तों बाद उन्होंने अचानक हमला कर यह साफ कर दिया कि आने वाले समय में हालात और बिगड़ सकते हैं. इजरायली सेना के अनुसार, यमन से दागी गई मिसाइल से ज्यादा नुकसान नहीं हुआ, लेकिन इसका संदेश बेहद गंभीर है. इससे यह संकेत मिला है कि युद्ध का दायरा तेजी से बढ़ रहा है.
हूती की चेतावनी और बढ़ते हमले
हूती समूह के प्रवक्ता ने दावा किया है कि उनका निशाना इजरायल के महत्वपूर्ण सैन्य ठिकाने थे. उन्होंने यह भी कहा कि अगर हालात ऐसे ही रहे, तो आगे भी हमले जारी रहेंगे. एक ही दिन में दो बार बैलिस्टिक मिसाइलें दागे जाने की खबर ने इस तनाव को और बढ़ा दिया है. इससे यह साफ है कि यह संघर्ष अब लंबा और ज्यादा आक्रामक हो सकता है.
लेबनान में भी बढ़ा तनाव
इस जंग का असर लेबनान तक भी पहुंच चुका है. हिज्बुल्लाह और इजरायल के बीच झड़पें तेज हो गई हैं. उत्तरी इजरायल और गोलान हाइट्स में रॉकेट और ड्रोन हमलों की खबरें सामने आ रही हैं. इजरायल भी जवाबी कार्रवाई करते हुए हिज्बुल्लाह के ठिकानों को निशाना बना रहा है. इन हमलों में आम नागरिकों और राहतकर्मियों के प्रभावित होने की खबरों ने अंतरराष्ट्रीय चिंता बढ़ा दी है.
ईरान भी इस संघर्ष में सक्रिय रूप से शामिल है और लगातार जवाबी हमले कर रहा है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उसने क्षेत्र के कई सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया है. इससे यह साफ होता है कि ईरान अब सीधे तौर पर अपनी ताकत दिखाने में जुटा है.
समुद्री रास्तों पर मंडराता बड़ा खतरा
इस पूरे संकट का सबसे बड़ा असर वैश्विक व्यापार पर पड़ सकता है. पहले से ही होर्मुज स्ट्रेट तनाव में है, जहां से दुनिया का बड़ा हिस्सा तेल गुजरता है. अब बाब-अल-मंदेब पर भी खतरा बढ़ गया है. यह मार्ग लाल सागर को हिंद महासागर से जोड़ता है और वैश्विक व्यापार के लिए बेहद अहम है. अगर इन दोनों रास्तों में रुकावट आती है, तो दुनिया की सप्लाई चेन को बड़ा झटका लग सकता है.
अमेरिका की बढ़ती सैन्य तैयारी
अमेरिका भी इस स्थिति को लेकर सतर्क है और उसने अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा दी है. हजारों सैनिकों को मिडिल ईस्ट में तैनात किया जा रहा है. हालांकि, अमेरिकी नेतृत्व का कहना है कि वे बिना बड़े जमीनी युद्ध के भी अपने लक्ष्य हासिल कर सकते हैं, लेकिन हालात को देखते हुए सभी विकल्प खुले रखे गए हैं.
राजनीतिक स्तर पर भी बयानबाजी तेज हो गई है. डोनाल्ड ट्रंप ने चेतावनी दी है कि अगर समुद्री रास्तों को बाधित किया गया, तो कड़ी कार्रवाई की जाएगी. वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने साफ कहा है कि अगर उनके देश के ठिकानों पर हमला हुआ, तो जवाब और भी सख्त होगा.


