ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर अराफी की मौत, एयरस्ट्राइक में मारे जाने का दावा
ईरान के धार्मिक-राजनीतिक गलियारों के पुराने और प्रभावशाली चेहरा, वरिष्ठ क्लेरिक अराफी ने अब खामेनेई के बाद यह अहम जिम्मेदारी संभाली है. लंबे समय से सिस्टम के अंदरूनी व्यक्ति रहे अराफी अब अंतरिम सुप्रीम लीडर के रूप में देश की कमान संभाल रहे हैं, जो एक ऐतिहासिक मोड़ है.

नई दिल्ली: सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स और कुछ इजराइली समाचार रिपोर्टों में यह दावा किया जा रहा है कि ईरान के अंतरिम सुप्रीम लीडर अलीरेजा अराफी की पदभार संभालने के कुछ ही घंटों बाद एक हवाई हमले में मौत हो गई. हालांकि इन दावों ने बड़े स्तर पर चर्चा को जन्म दिया है, लेकिन अभी तक ईरानी सरकारी मीडिया या प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समाचार एजेंसियों ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है.
यह स्थिति उस शुरुआती भ्रम की याद दिलाती है, जब ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या की खबरें सामने आई थीं. जिसके पहले इजराइली अधिकारियों ने पुष्टि की थी और बाद में ईरानी अधिकारियों ने इसे स्वीकार किया था. फिलहाल अराफी की कथित मौत को लेकर तस्वीर स्पष्ट नहीं है और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार किया जा रहा है.
कैसे बने अंतरिम सुप्रीम लीडर?
ईरान ने लंबे समय तक देश का नेतृत्व करने वाले अली खामेनेई की मौत के बाद अलीरेजा अराफी को अंतरिम सुप्रीम लीडर नियुक्त किया था. खामेनेई की मौत शनिवार को संयुक्त राज्य अमेरिका और इजराइल द्वारा तेहरान पर किए गए संयुक्त हवाई हमलों में हुई बताई गई थी.
अराफी, जो धार्मिक और राजनीतिक प्रतिष्ठान के वरिष्ठ एवं लंबे समय से प्रभावशाली सदस्य रहे हैं, खामेनेई के निधन के तुरंत बाद पदभार संभाला. खामेनेई ने 1989 से 28 फरवरी 2026 तक देश के सर्वोच्च नेता के रूप में कार्य किया था.
नियुक्ति के दिन ही हत्या की खबरें
आयतुल्ला अराफी को खामेनेई की हत्या वाले दिन ही सुप्रीम लीडर चुना गया था. हालांकि 2 मार्च 2026 तक ऐसी अपुष्ट रिपोर्टें सामने आ रही हैं कि हालिया हवाई हमलों में उनकी भी मौत हो गई है. इन रिपोर्टों की न तो सरकारी स्तर पर पुष्टि हुई है और न ही किसी विश्वसनीय अंतरराष्ट्रीय एजेंसी ने इसे सत्यापित किया है. इससे हालात और अधिक जटिल हो गए हैं.
पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव
पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष ने वैश्विक स्तर पर गहरा असर डाला है. लगातार हो रहे हमलों और जवाबी कार्रवाइयों के कारण भारी जान-माल का नुकसान हुआ है और व्यापक तबाही की खबरें सामने आ रही हैं. स्थिति अत्यंत संवेदनशील बनी हुई है और अंतरराष्ट्रीय समुदाय की निगाहें घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं.


