ऑपरेशन सिंदूर, वेनेजुएला और अब ईरान... हर मोर्चे पर क्यों चूके चीनी हथियार? ड्रैगन की टेक्नोलॉजी पर उठे सवाल
हालिया अंतरराष्ट्रीय संघर्षों में चीनी रक्षा प्रणालियों की क्षमता पर सवाल उठे हैं. पाकिस्तान, वेनेजुएला और ईरान में हुए सैन्य अभियानों के दौरान रडार और मिसाइल सिस्टम अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाए, जिससे उनकी विश्वसनीयता पर बहस तेज हो गई है.

नई दिल्ली: दुनिया भर में सस्ते और ताकतवर बताकर बेचे जा रहे चीनी हथियारों की साख पर हाल के संघर्षों ने गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं. जिन रक्षा प्रणालियों को पश्चिमी तकनीक का विकल्प बताया गया था, वे कई मोर्चों पर उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकीं. अलग-अलग देशों में हुए सैन्य अभियानों ने यह दिखाया कि कागजों पर मजबूत दिखने वाली तकनीक असली परीक्षा में कमजोर पड़ सकती है.
ऑपरेशन सिंदूर: पाकिस्तान की सुरक्षा पर सवाल
7 मई 2025 को भारत ने पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में ‘ऑपरेशन सिंदूर’ चलाया. भारतीय वायुसेना ने नियंत्रण रेखा पार किए बिना पाकिस्तान के कई सैन्य ठिकानों और आतंकी ठिकानों पर सटीक हमला किया. इन हमलों में लंबी दूरी की मिसाइलों का इस्तेमाल हुआ.
पाकिस्तान की रक्षा व्यवस्था का बड़ा हिस्सा चीनी हथियारों और रडार सिस्टम पर आधारित है. दावा किया जाता था कि ये सिस्टम आधुनिक लड़ाकू विमानों को दूर से पहचान सकते हैं. लेकिन हमलों के दौरान न तो रडार प्रभावी ढंग से काम कर पाए और न ही मिसाइल रक्षा प्रणाली किसी बड़े हमले को रोक सकी. इससे इन प्रणालियों की क्षमता पर बहस तेज हो गई.
वेनेजुएला में ऑपरेशन और रडार की नाकामी
जनवरी 2026 में अमेरिका ने वेनेजुएला में एक गुप्त अभियान चलाकर राष्ट्रपति निकोलस मादुरो को हिरासत में लिया. बताया जाता है कि वेनेजुएला ने अपनी सुरक्षा के लिए चीन से भारी मात्रा में रक्षा उपकरण खरीदे थे. इसके बावजूद अमेरिकी विशेष बलों के हेलीकॉप्टर बिना किसी बड़ी रुकावट के अपने मिशन में सफल रहे. रिपोर्टों में कहा गया कि एंटी-स्टील्थ रडार और निगरानी प्रणाली अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर पाई. इलेक्ट्रॉनिक जैमिंग और आधुनिक तकनीक के सामने इन प्रणालियों की सीमाएं उजागर हुईं.
ईरान में वायु रक्षा की चुनौती
ईरान ने अपनी हवाई सुरक्षा मजबूत करने के लिए चीन से HQ-9B SAM सिस्टम खरीदे थे. दावा था कि यह 260 किमी तक दुश्मन के विमानों को निशाना बना सकती है. लेकिन अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के दौरान स्थिति अलग दिखी. आधुनिक F-35 स्टील्थ विमानों और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर तकनीक के सामने रक्षा प्रणाली धीमी प्रतिक्रिया देती नजर आई. तेज प्रतिक्रिया समय और बेहतर समन्वय किसी भी वायु रक्षा प्रणाली के लिए जरूरी होता है. जहां कुछ पश्चिमी सिस्टम सेकंडों में प्रतिक्रिया देते हैं, वहीं कुछ चीनी प्रणालियों के प्रतिक्रिया समय को लेकर सवाल उठे.


