पाकिस्तान की दोहरी चाल बेनकाब, ईरान भड़का, ट्रंप को मिला फायदा, कूटनीति में बड़ा खेल उजागर
ईरान-अमेरिका तनाव के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर सवाल उठ गए हैं। तेहरान ने साफ कर दिया है कि उसे इस्लामाबाद पर अब भरोसा नहीं रहा।

ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे तनाव में पाकिस्तान खुद को मध्यस्थ बताता रहा। लेकिन अब यही भूमिका विवाद का कारण बन गई है। तेहरान ने खुलकर पाकिस्तान की पहल को खारिज कर दिया है। ईरान का मानना है कि यह मध्यस्थता निष्पक्ष नहीं थी। इससे पूरे घटनाक्रम ने नया मोड़ ले लिया है। अब सवाल उठ रहे हैं कि पाकिस्तान सच में किसके साथ खड़ा है।
इस बार क्यों भड़क गया ईरान?
मामला होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़ा है। ईरान ने अपने मित्र देशों को तेल और गैस के जहाज गुजरने की अनुमति दी थी। इसी भरोसे में पाकिस्तान को भी सुविधा दी गई। लेकिन आरोप है कि पाकिस्तान ने इस मौके का फायदा उठाया। उसने अमेरिकी जहाजों को अपने झंडे के साथ इस रास्ते से निकलने दिया। यही बात तेहरान को नागवार गुजरी।
क्या यह ‘डबल गेम’ का मामला है?
खुफिया सूत्रों के अनुसार ईरान अब पाकिस्तान की भूमिका को ‘डबल गेम’ मान रहा है। एक तरफ दोस्ती और दूसरी तरफ विरोधी को मदद। यही आरोप सबसे बड़ा विवाद बन गया है। ईरान को लग रहा है कि उसके भरोसे का गलत इस्तेमाल हुआ। इससे दोनों देशों के रिश्तों में दरार साफ दिखने लगी है।
अमेरिका को कैसे मिला फायदा?
इस पूरे घटनाक्रम से अमेरिका को रणनीतिक फायदा मिला। डोनाल्ड ट्रंप ने भी दावा किया कि अमेरिकी जहाज सुरक्षित गुजर गए। अमेरिका इसे अपनी कूटनीतिक जीत बता रहा है। यानी पाकिस्तान की भूमिका ने अप्रत्यक्ष रूप से अमेरिका को मजबूत किया। यही वजह है कि ईरान और ज्यादा नाराज हो गया है।
क्या ईरान में भरोसा पूरी तरह टूट गया?
तेहरान में अब यह मामला सिर्फ नाराजगी तक सीमित नहीं है। इसे विश्वासघात के रूप में देखा जा रहा है। ईरान के अंदर यह धारणा बन रही है कि पाकिस्तान ने सीमा पार कर दी है। जो सुविधा दोस्ती में दी गई थी, उसका इस्तेमाल विरोधी के लिए हुआ। इससे रिश्तों में खटास और गहरी हो गई है।
मध्यस्थता की साख पर क्यों लगा दाग?
पाकिस्तान ने हाल ही में 15-बिंदु शांति प्रस्ताव देने का दावा किया था। लेकिन ईरान ने इसे सिरे से खारिज कर दिया। अब यह साफ हो गया कि उसकी मध्यस्थता पर भरोसा नहीं किया जा रहा। विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान संतुलन बनाने की कोशिश में फंस गया है।
वह एक साथ कई पक्षों को खुश रखना चाहता है। लेकिन यह रणनीति उलटी पड़ती दिख रही है। इस पूरे घटनाक्रम का असर क्षेत्रीय राजनीति पर पड़ेगा। ईरान और पाकिस्तान के रिश्ते और खराब हो सकते हैं। साथ ही अमेरिका को भी इसमें रणनीतिक बढ़त मिल सकती है। मध्य पूर्व की राजनीति और जटिल होने वाली है। आने वाले दिनों में नए गठजोड़ और नए टकराव देखने को मिल सकते हैं।


