ईरान ने युद्धविराम की समयसीमा को खारिज किया, युद्ध समाप्त करने के लिए कड़ी शर्तें रखीं

ईरान ने अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज करते हुए स्पष्ट किया है कि वह अपनी शर्तों पर ही संघर्ष खत्म करेगा. कूटनीतिक बातचीत जारी है, लेकिन क्षेत्र में सैन्य तनाव और तैनाती लगातार बढ़ रही है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष के बीच ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए अमेरिका के युद्धविराम प्रस्ताव को खारिज कर दिया है. मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, तेहरान ने स्पष्ट कर दिया है कि वह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा तय किसी भी समयसीमा को स्वीकार नहीं करेगा और इस प्रस्ताव को “अत्यधिक” करार दिया है. 

ईरानी अधिकारी ने क्या कहा?

बताया जा रहा है कि ईरानी नेतृत्व ने अमेरिका समर्थित योजना का गहन मूल्यांकन किया, लेकिन उसकी शर्तों को अपने हितों के अनुरूप नहीं पाया. रॉयटर्स के हवाले से एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने कहा कि देश की शुरुआती प्रतिक्रिया सकारात्मक नहीं है, हालांकि कूटनीतिक बातचीत अभी भी जारी है.

रिपोर्ट्स के अनुसार, ईरान ने युद्ध समाप्ति के लिए कुछ सख्त और स्पष्ट शर्तें रखी हैं. तेहरान का कहना है कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा की जा रही कथित सैन्य कार्रवाई और लक्षित हमलों पर पूरी तरह रोक लगाई जानी चाहिए. इसके अलावा, भविष्य में ईरान के खिलाफ किसी भी प्रकार की सैन्य कार्रवाई न करने की ठोस और बाध्यकारी गारंटी की मांग भी की गई है. ईरान ने युद्ध के दौरान हुए नुकसान की भरपाई के लिए मुआवजे की बात भी उठाई है. साथ ही, क्षेत्र में सक्रिय उसके सहयोगी समूहों सहित सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म करने की शर्त रखी गई है.

सबसे अहम मुद्दा होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर है. ईरान इसे अपने रणनीतिक और कानूनी अधिकार का हिस्सा मानता है और इस पर अपने नियंत्रण को औपचारिक मान्यता दिलाने की मांग कर रहा है. अधिकारियों का कहना है कि जब तक ये सभी शर्तें पूरी नहीं होतीं, तब तक सैन्य अभियान जारी रहेंगे. ईरानी नेतृत्व ने यह भी साफ किया है कि युद्धविराम का समय और शर्तें केवल तेहरान तय करेगा.

15 सूत्रीय प्रस्ताव ईरान तक पहुंचा

इस बीच, खबरें हैं कि पाकिस्तान ने अमेरिका की ओर से एक 15 सूत्रीय प्रस्ताव ईरान तक पहुंचाया है. इस प्रस्ताव में कुछ आर्थिक प्रतिबंधों में ढील, ईरान के मिसाइल कार्यक्रम पर नियंत्रण और अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी की निगरानी बढ़ाने जैसे सुझाव शामिल हैं. इसके साथ ही नागरिक परमाणु सहयोग और होर्मुज जलडमरूमध्य में सुरक्षित जहाजरानी सुनिश्चित करने की बात भी कही गई है. बदले में अमेरिका ने करीब एक महीने के अस्थायी युद्धविराम का प्रस्ताव रखा है, ताकि औपचारिक वार्ता शुरू हो सके.

हालांकि कूटनीतिक स्तर पर बातचीत जारी है, लेकिन जमीनी हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका क्षेत्र में अपनी सैन्य मौजूदगी बढ़ा रहा है और त्वरित कार्रवाई के लिए जानी जाने वाली 82वीं एयरबोर्न डिवीजन की तैनाती की तैयारी कर रहा है. इसके अलावा, मरीन और नौसेना बलों की अतिरिक्त तैनाती भी की जा रही है, जो यह संकेत देती है कि बातचीत के समानांतर सैन्य तैयारी भी तेज हो रही है.

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