ईरान की साइलेंट डिप्लोमेसी: खामेनेई के जनाजे में कुरान की आयतों से दुनिया को दिया मैसेज

सबसे चौंकाने वाला पल तब आया जब सऊदी अरब का डेलीगेशन ताबूत के पास पहुंचा। उस वक्त सूरह अल इमरान की आयत 3:13 पढ़ी गई। ये आयत बद्र की जंग से जुड़ी है, जो 624 ईस्वी में सऊदी की धरती पर लड़ी गई थी।

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नई दिल्ली: 4 जुलाई 2026 को तेहरान में ईरान के पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई को आखिरी विदाई दी गई। उनके जनाजे में 30 से ज्यादा देशों और गैर-राज्य संस्थाओं के प्रतिनिधि पहुंचे। लेकिन सबसे ज्यादा चर्चा उस दौरान पढ़ी गई कुरान की आयतों को लेकर हो रही है। विशेषज्ञों का मानना है कि ये सिर्फ धार्मिक रस्म नहीं थी। हर देश के लिए अलग आयत चुनकर ईरान ने एक नपा-तुला कूटनीतिक संदेश देने की कोशिश की।  

सऊदी अरब को 'बद्र की जंग' की याद   

सबसे चौंकाने वाला पल तब आया जब सऊदी अरब का डेलीगेशन ताबूत के पास पहुंचा। उस वक्त सूरह अल इमरान की आयत 3:13 पढ़ी गई। ये आयत 'बद्र की जंग' से जुड़ी है, जो 624 ईस्वी में सऊदी की धरती पर लड़ी गई थी। उसमें छोटी मुस्लिम सेना ने बड़ी दुश्मन सेना को हराया था। अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा विश्लेषक शाहीन मोदारेस ने इसे 'आयतों के जरिए शीतयुद्ध कालीन क्रेमलिनोलॉजी' कहा।

मिडिल ईस्ट आई के मुताबिक, इसके दो मतलब निकाले जा सकते हैं। एक साझा इस्लामिक इतिहास की याद और दूसरा रियाद के लिए तीखा इशारा। ईरान खुद को अमेरिका-इजरायल से लड़कर टिकने वाली ताकत बता रहा था, जबकि सऊदी को वॉशिंगटन के साथ खड़े होने की याद दिलाई गई।  

'एक्सिस ऑफ रेजिस्टेंस' को मिला हौसला   

ईरान के सहयोगी गुटों के लिए शहादत और जीत वाली आयतें चुनी गईं। हमास के प्रतिनिधियों के लिए वो आयत पढ़ी गई जिसमें अल्लाह से किए वादे निभाने वाले लोगों का जिक्र है।

हिज्बुल्लाह के लिए कहा गया कि अल्लाह पर भरोसा रखने वाले कमजोर न हों और शोक न मनाएं, क्योंकि जीत उन्हीं की होगी। यमन के हुथियों को दृढ़ता और हिम्मत वाली आयतें सुनाई गईं। इससे तेहरान ने अपने करीबियों को ये भरोसा दिया कि वो उनके साथ खड़ा है।  

भारत, रूस, चीन के लिए नरम लहजा  

रूस, चीन और भारत जैसे दोस्त देशों के लिए युद्ध वाली नहीं, बल्कि सांत्वना और धार्मिकता की आयतें चुनी गईं। चीन के लिए कहा गया कि जीत सिर्फ अल्लाह से मिलती है। वहीं रूस के लिए कहा गया कि आखिर में फैसला नेक लोगों के हक में होता है। भारत के लिए 'कमजोर न पड़ें और शोक न मनाएं' वाले हिस्से का छोटा और सौम्य अंश पढ़ा गया।  

जनाजे के बाद ईरान ने भारत का शुक्रिया भी अदा किया। कहा कि भारत की मौजूदगी दोनों देशों के स्थायी संबंधों का 'अनमोल सबूत' है और ईरानी लोग इस एकजुटता को कभी नहीं भूलेंगे। विश्लेषकों का कहना है कि ईरान ने दोस्तों को अपने 'प्रतिरोध के अक्ष' से अलग रखा।

सहयोगियों की तारीफ की, लेकिन उन्हें अपनी वैचारिक लड़ाई में नहीं घसीटा। शाहीन मोदारेस ने लिखा, "हर डेलीगेशन को एक आयत मिली। सऊदी को डांटा गया, तुर्किये को शर्मिंदा किया गया, प्रॉक्सी को सांत्वना दी गई। कल ताबूत आयतों में बोल रहा था।" ये पहली बार नहीं है। अप्रैल में भी ईरान ने अमेरिकी धमकियों का जवाब कुरान की आयतों से दिया था।   First Updated : Monday, 06 July 2026