12 साल के बच्चों तक पहुंची जंग की आंच, ईरान ने घटाई उम्र सीमा, दुनिया में मचा हड़कंप

ईरान ने युद्ध से जुड़े सहयोगी कार्यों के लिए न्यूनतम उम्र सीमा घटाकर 12 साल कर दी है। इस फैसले से वैश्विक स्तर पर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों और मानवाधिकार संगठनों ने इसे बच्चों के अधिकारों के खिलाफ बताया है और इसके दूरगामी असर को लेकर गंभीर सवाल उठाए हैं।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

ईरान में अब 12 साल के बच्चे भी युद्ध से जुड़े कामों में हिस्सा ले सकेंगे। यह फैसला ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने लिया है। इसके तहत बच्चे गश्त, चेकपॉइंट और लॉजिस्टिक्स जैसे कामों में मदद कर सकते हैं। इस कदम ने पूरी दुनिया को चौंका दिया है। सवाल उठ रहा है कि क्या जंग अब बच्चों तक पहुंच गई है।

ईरान ने उम्र सीमा क्यों घटाई?

ईरान के अधिकारी रहीम नदाली ने बताया कि बड़ी संख्या में कम उम्र के बच्चे खुद आगे आ रहे थे। वे जंग में योगदान देना चाहते थे। इसी वजह से न्यूनतम उम्र 12 साल कर दी गई। सरकार ने इसे स्वैच्छिक भागीदारी बताया है। लेकिन इस फैसले को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है।

क्या यह अंतरराष्ट्रीय नियमों के खिलाफ है?

ईरान इस कदम से अंतरराष्ट्रीय नियमों के घेरे में आ गया है। बच्चों को युद्ध से दूर रखने के लिए वैश्विक समझौते बने हुए हैं। ऐसे में यह फैसला उन नियमों के खिलाफ माना जा रहा है। मानवाधिकार संगठनों ने इस पर चिंता जताई है। बच्चों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं।

जंग का असर कितना गहरा हो चुका है?

ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष अब कई देशों तक फैल चुका है। हालात ऐसे हो गए हैं कि हर स्तर पर संसाधनों की जरूरत बढ़ गई है। इसी दबाव में ऐसे फैसले लिए जा रहे हैं। इससे साफ है कि जंग अब लंबी खिंचती नजर आ रही है। हालात सामान्य नहीं हैं।

अमेरिकी ठिकानों पर क्या असर पड़ा?

रिपोर्ट्स के मुताबिक ईरान के हमलों से मध्य पूर्व में कई अमेरिकी सैन्य ठिकाने प्रभावित हुए हैं। करीब 13 बेस अब इस्तेमाल लायक नहीं बचे हैं। सैनिकों को वहां से हटाना पड़ा है। उन्हें होटल और अन्य जगहों पर शिफ्ट किया गया है। इससे युद्ध का स्वरूप भी बदलता दिख रहा है।

क्या यह ‘रिमोट वॉर’ बनती जा रही है?

अधिकारियों के मुताबिक यह संघर्ष अब ‘रिमोट वॉर’ का रूप ले रहा है। यानी सीधे मैदान की बजाय दूर से हमले हो रहे हैं। इससे रणनीति भी बदल रही है। दोनों पक्ष तकनीक और दूरी से जंग लड़ रहे हैं। इससे युद्ध और जटिल हो गया है।

सबसे बड़ा खतरा यही है कि अगर हालात ऐसे ही रहे तो जंग और फैल सकती है। बच्चों की भागीदारी जैसे फैसले हालात की गंभीरता दिखाते हैं। अंतरराष्ट्रीय दबाव भी बढ़ेगा। आने वाले दिनों में इस फैसले पर बड़ा विवाद खड़ा हो सकता है। दुनिया की नजर अब इस पूरे घटनाक्रम पर टिकी है।

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