लेबनान पर जारी रहेंगे हमले? इजरायल के रुख ने बढ़ाई अनिश्चितता, नेतन्याहू और शहबाज शरीफ के बीच मतभेद

अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बीच इजरायल के बयान ने नई उलझन पैदा कर दी है. लेबनान को लेकर अलग-अलग दावों से स्थिति और जटिल हो गई है, जिससे आगे के घटनाक्रम पर सस्पेंस बना हुआ है.

Shraddha Mishra

पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच एक और बड़ा मोड़ सामने आया है, जहां युद्धविराम को लेकर अलग-अलग दावे भ्रम की स्थिति पैदा कर रहे हैं. जहां एक तरफ अमेरिका और ईरान के बीच दो हफ्तों के युद्धविराम पर सहमति बनी है, वहीं इजरायल ने साफ कर दिया है कि यह समझौता हर क्षेत्र पर लागू नहीं होगा. इससे यह संकेत मिल रहा है कि हालात अभी पूरी तरह सामान्य नहीं हुए हैं.

इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने कहा कि उनका देश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के उस फैसले का समर्थन करता है, जिसमें ईरान के खिलाफ हमले दो हफ्तों के लिए रोके गए हैं. हालांकि, उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह युद्धविराम लेबनान पर लागू नहीं होगा. नेतन्याहू के कार्यालय की ओर से जारी बयान में कहा गया कि इजरायल अमेरिका के उन प्रयासों के साथ है, जिनका मकसद ईरान को परमाणु, मिसाइल और आतंक से जुड़ा खतरा बनने से रोकना है. साथ ही यह भी बताया गया कि अमेरिका आने वाली वार्ता में इन मुद्दों को प्राथमिकता देगा.

पाकिस्तान के दावे से अलग बयान

इजरायल का यह रुख पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ के बयान से अलग है. शरीफ ने दावा किया था कि यह युद्धविराम लेबनान समेत पूरे क्षेत्र में लागू होगा. ऐसे में दोनों देशों के बयानों के बीच अंतर ने स्थिति को और जटिल बना दिया है.

लेबनान कैसे बना युद्ध का हिस्सा?

लेबनान इस संघर्ष में तब शामिल हुआ, जब 2 मार्च को हिजबुल्लाह ने इज़रायली शहरों की ओर रॉकेट दागे. यह हमला ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के रूप में किया गया था. इसके जवाब में इज़रायल ने लेबनान पर बड़े पैमाने पर हमले किए. इन हमलों में 1500 से ज्यादा लोगों की मौत हो गई और करीब 10 लाख लोग बेघर हो गए. इससे वहां मानवीय संकट और गहरा गया.

अमेरिका-ईरान युद्धविराम समझौता

मंगलवार को, अमेरिकी समय सीमा खत्म होने से कुछ ही समय पहले, अमेरिका और ईरान ने दो सप्ताह के युद्धविराम पर सहमति जताई. यह समझौता अंतिम समय में हुआ, जिससे बड़े टकराव की आशंका टल गई. ट्रंप ने बताया कि उन्होंने इस मुद्दे पर पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और सेना प्रमुख आसिम मुनीर से बातचीत की थी, जिन्होंने इस युद्धविराम की अपील की थी. पाकिस्तान ने इस मामले में मध्यस्थ की भूमिका निभाई है.

इस्लामाबाद में होगी अहम बैठक

शहबाज शरीफ ने घोषणा की कि 10 अप्रैल को इस्लामाबाद में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों के बीच बातचीत होगी. इस बैठक का उद्देश्य एक स्थायी समाधान तक पहुंचना है. ईरान ने भी इस बातचीत के लिए सहमति जताई है और कहा है कि वह संघर्ष खत्म करने के लिए कूटनीतिक रास्ता अपनाने को तैयार है.

ईरान की 10 सूत्रीय शर्तें

ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए 10 प्रमुख शर्तें रखी हैं. इनमें उसके यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम को मान्यता देना, सभी आर्थिक प्रतिबंध हटाना और क्षेत्र से अमेरिकी सेना की वापसी शामिल है. इसके अलावा, तेहरान ने अपनी जमी हुई संपत्तियों को वापस करने और किसी भी समझौते को संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के जरिए बाध्यकारी बनाने की मांग भी रखी है.

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