ईरान हमलों से बचने के लिए UAE की ढाल बना इजराइल, अमीरात में लेजर हथियार और सैनिकों की तैनाती

ईरान के बढ़ते हमलों के बीच इज़राइल ने गुपचुप तरीके से UAE में अपनी उन्नत लेजर और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए. इस कदम से दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग और क्षेत्रीय रणनीतिक संतुलन में बड़ा बदलाव दिख रहा है.

Shraddha Mishra

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच एक चौंकाने वाला खुलासा सामने आया है. हालिया संघर्ष के दौरान इजराइल ने न केवल अपनी उन्नत रक्षा तकनीक का इस्तेमाल किया, बल्कि चुपचाप संयुक्त अरब अमीरात की सुरक्षा को भी मजबूत किया. रिपोर्ट के अनुसार, इजराइल ने अपने अत्याधुनिक “आयरन बीम” लेजर-आधारित एयर डिफेंस सिस्टम का एक संस्करण संयुक्त अरब अमीरात में तैनात किया. 

इस प्रणाली का उद्देश्य ईरान की ओर से आने वाले ड्रोन और मिसाइल हमलों को रोकना था. इसके साथ ही, इजराइल ने ‘स्पेक्ट्रो’ नाम का एक निगरानी प्लेटफॉर्म भी भेजा, जो करीब 20 किलोमीटर दूर से ड्रोन की पहचान करने में सक्षम है. इस कदम को क्षेत्रीय सुरक्षा सहयोग के एक बड़े संकेत के तौर पर देखा जा रहा है.

उपकरण के साथ सैनिक भी भेजे गए

रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि इजराइल ने केवल उपकरण ही नहीं भेजे, बल्कि यूएई में अपनी आयरन डोम प्रणाली भी तैनात की और उसे ऑपरेट करने के लिए सैन्यकर्मी भी भेजे. सूत्रों के मुताबिक, यूएई में “कई दर्जन” इजराइली सैनिक मौजूद थे, जो इन सिस्टम्स को संचालित करने में मदद कर रहे थे. इससे साफ होता है कि दोनों देशों के बीच रक्षा साझेदारी अब पहले से कहीं ज्यादा मजबूत हो चुकी है.

क्या है आयरन बीम सिस्टम?

आयरन बीम एक नई और आधुनिक तकनीक है, जिसे राफेल एडवांस्ड डिफेंस सिस्टम्स ने विकसित किया है. यह एक हाई-एनर्जी लेजर सिस्टम है, जो कम दूरी के रॉकेट और ड्रोन को कुछ ही सेकंड में नष्ट कर सकता है. इसकी खासियत यह है कि यह लक्ष्य पर केंद्रित लेजर बीम छोड़ता है और 4-5 सेकंड के भीतर उसे निष्क्रिय कर देता है. पहले इसका इस्तेमाल इजराइल ने लेबनान से आने वाले हमलों के खिलाफ किया था.

प्रोटोटाइप सिस्टम का भी इस्तेमाल

दिलचस्प बात यह है कि यूएई को भेजे गए कुछ सिस्टम अभी पूरी तरह विकसित नहीं थे और परीक्षण के चरण में थे. इसके बावजूद, बढ़ते खतरे को देखते हुए इजराइल ने इन सिस्टम्स को तुरंत उपलब्ध कराया. बताया गया है कि कुछ उपकरण अभी इजराइल की अपनी रक्षा प्रणाली में भी पूरी तरह शामिल नहीं हुए थे, लेकिन स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उन्हें यूएई में तैनात किया गया.

ईरान के हमलों का बड़ा जवाब

रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका और इजराइल द्वारा 28 फरवरी को शुरू किए गए हमलों के बाद ईरान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए यूएई पर 500 से अधिक बैलिस्टिक मिसाइलें और करीब 2,000 ड्रोन दागे थे. इसके जवाब में यूएई ने अपनी बहुस्तरीय रक्षा प्रणाली को सक्रिय किया, जिसमें इजराइल द्वारा दिए गए सिस्टम भी शामिल थे. इनकी मदद से अधिकांश हमलों को सफलतापूर्वक रोक लिया गया.

इजराइल ने साझा की खुफिया जानकारी 

इजराइल ने यूएई के साथ खुफिया जानकारी भी साझा की. इसमें ईरान के भीतर हो रही मिसाइल लॉन्च की तैयारियों से जुड़ी अहम जानकारियां शामिल थीं. इससे यूएई को संभावित हमलों के लिए पहले से तैयार रहने में मदद मिली. इजराइल और यूएई के बीच यह सहयोग अचानक नहीं हुआ है. इसकी नींव 2020 में हुए अब्राहम समझौते में पड़ी थी, जिसके जरिए दोनों देशों के संबंध सामान्य हुए थे.

तब से लेकर अब तक दोनों देशों के बीच आर्थिक और रक्षा सहयोग तेजी से बढ़ा है. इजराइल पहले भी यूएई को बराक और स्पाइडर जैसी रक्षा प्रणालियां उपलब्ध करा चुका है. एक पश्चिमी अधिकारी के अनुसार, अब्राहम समझौते के प्रति यूएई का खुला समर्थन ही उसे ईरान के निशाने पर ले आया. बढ़ते तनाव के बीच यूएई को एक अहम रणनीतिक साझेदार के रूप में देखा जा रहा है.

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