मिडिल ईस्ट में युद्ध के बीच जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर की बात, सुप्रीम लीडर के निधन पर जताया शोक

विदेश मंत्री डॉ. एस जयशंकर ने गुरुवार को ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची से फोन पर बातचीत की.इसके साथ ही उन्होंने ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र बिन हमद बिन हमूद अलबुसैदी से भी चर्चा की. मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष के बीच भारत ने दोनों देशों से स्थिति पर विचार-विमर्श किया.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष के बीच भारत सक्रिय कूटनीति में जुटा हुआ है. विदेश मंत्री एस जयशंकर ने ईरान और ओमान के अपने समकक्षों से अलग-अलग टेलीफोनिक वार्ता की. दोनों बातचीत में खाड़ी क्षेत्र की मौजूदा स्थिति पर विस्तार से चर्चा हुई. जयशंकर ने एक्स पर इसकी जानकारी साझा करते हुए कहा कि उन्होंने ईरान के विदेश मंत्री से दोपहर में और ओमान के विदेश मंत्री से पश्चिम एशिया के चल रहे संघर्ष पर बात की. भारत क्षेत्र में शांति और स्थिरता बनाए रखने के लिए प्रयासरत है.

ईरान के साथ महत्वपूर्ण वार्ता

आपको बता दें कि डॉ. जयशंकर ने ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अरागची से फोन पर लंबी बातचीत की. इस दौरान दोनों ने मध्य पूर्व में जारी तनाव पर विचार साझा किए. भारत ने स्थिति को शांत करने की आवश्यकता पर जोर दिया. ईरान के साथ भारत के मजबूत संबंधों को देखते हुए यह बातचीत काफी अहम मानी जा रही है. इसके साथ ही सुप्रीम लीडर की मौत पर शोक जताया है. 

ओमान के साथ खाड़ी स्थिति पर चर्चा

इसके साथ ही ओमान के विदेश मंत्री सैयद बद्र अलबुसैदी से हुई बातचीत में खाड़ी क्षेत्र के हालात पर गहन चर्चा हुई. ओमान मध्यस्थता की भूमिका निभाने के लिए जाना जाता है. जयशंकर ने पश्चिम एशिया में बढ़ते संघर्ष के प्रभावों पर ध्यान केंद्रित किया. दोनों पक्षों ने क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखने के तरीकों पर विचार किया.

भारत की कूटनीतिक सक्रियता

बता दें कि भारत लगातार मध्य पूर्व के देशों से संपर्क में है. यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब खाड़ी में तनाव चरम पर है. भारत का उद्देश्य संघर्ष को और फैलने से रोकना और सभी पक्षों के बीच संवाद को बढ़ावा देना है. जयशंकर की ये बातचीत भारत की संतुलित विदेश नीति को दर्शाती है.

क्षेत्रीय शांति के लिए प्रयास

मौजूदा स्थिति में भारत ने दोनों देशों से खुली बातचीत की अपील की है. खाड़ी क्षेत्र में शांति बनाए रखना वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए जरूरी है. भारत इन वार्ताओं के जरिए तनाव कम करने में योगदान देना चाहता है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी कूटनीति आगे भी जारी रहेगी.

संघर्ष का वैश्विक प्रभाव

मध्य पूर्व का यह संघर्ष तेल की कीमतों और व्यापार पर असर डाल रहा है. भारत जैसे देशों को ऊर्जा आपूर्ति की चिंता है. जयशंकर की बातचीत से संकेत मिलता है कि भारत स्थिति पर नजर रखे हुए है और शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में काम कर रहा है.

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