भारत के लिए होर्मुज स्ट्रेट बंद नहीं!...US, इजरायल और यूरोप के लिए बंद, IRIB ने दी जानकारी

ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अमेरिका, इजराइल, यूरोप और उनके सहयोगी देशों के जहाजों के लिए पूरी तरह बंद कर दिया है. इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने गुरुवार को सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के जरिए यह घोषणा की. युद्ध शुरू होने के बाद से यह महत्वपूर्ण जलमार्ग व्यावहारिक रूप से ठप है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है.

Utsav Singh
Edited By: Utsav Singh

नई दिल्ली : तेहरान में तनाव चरम पर पहुंच गया है. अमेरिका और इज़राइल के संयुक्त हमलों के जवाब में ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य पर सख्त कदम उठाया है. आईआरजीसी ने स्पष्ट कहा कि केवल पश्चिमी देशों से जुड़े जहाजों पर हमला होगा. यह फैसला वैश्विक ऊर्जा बाजार को हिला रहा है, क्योंकि दुनिया का पांचवां हिस्सा तेल इसी रास्ते से गुजरता है. जहाजों के ठहराव से आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो गई है, और तेल की कीमतें आसमान छू रही हैं.

आईआरजीसी की सख्त चेतावनी

आपको बता दें कि ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर ने कहा कि युद्ध के समय में होर्मुज जलडमरूमध्य पर नियंत्रण का अधिकार उन्हें है. अंतरराष्ट्रीय कानून का हवाला देते हुए उन्होंने घोषणा की कि अमेरिका, इज़राइल, यूरोप या उनके सहयोगियों का कोई भी जहाज दिखते ही निशाना बनाया जाएगा. सरकारी मीडिया ने इस बयान को प्रमुखता से प्रसारित किया.

चीनी जहाजों को विशेष छूट

मंगलवार को ईरान ने संकेत दिया कि केवल चीनी ध्वज वाले जहाजों को ही गुजरने की इजाजत मिलेगी. अधिकारियों ने इसे बीजिंग के समर्थन के प्रति आभार बताया. यह कदम इसलिए अहम है क्योंकि फारस की खाड़ी के बंदरगाहों का यही एकमात्र निकास है. चीन के लिए तेल आयात जारी रखना अब आसान हो सकता है.


इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर (आईआरजीसी) ने गुरुवार को सरकारी प्रसारक आईआरआईबी के जरिए यह घोषणा की. युद्ध शुरू होने के बाद से यह महत्वपूर्ण जलमार्ग व्यावहारिक रूप से ठप है, जिससे वैश्विक तेल आपूर्ति पर गहरा असर पड़ रहा है. ईरान ने चीनी ध्वज वाले जहाजों को ही अनुमति देने का संकेत दिया है.

वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर

जलडमरूमध्य बंद होने से तेल और गैस की आवाजाही रुक गई है. अधिकांश जहाज कप्तान जोखिम से बचने के लिए रुक गए हैं. कंपनियां अब वैकल्पिक रास्तों की तलाश में हैं. विश्लेषकों का मानना है कि एशिया-यूरोप के मुख्य मार्ग पर ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगा, लेकिन खाड़ी क्षेत्र का व्यापार बुरी तरह प्रभावित होगा.

कुवैत, दुबई के पास सैकड़ों जहाज खड़े

पहले कभी इस जलडमरूमध्य को पूरी तरह बंद नहीं किया गया. 1980-88 के ईरान-इराक युद्ध में भी तेल टैंकर चलते रहे. अब लाइव ट्रैकिंग से दिखता है कि कुवैत, दुबई के पास सैकड़ों जहाज खड़े हैं. ईरान का अपना बेड़ा बंदर अब्बास के पास लंगर डाले है. स्थिति और बिगड़ने की आशंका बनी हुई है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag