इस्लामाबाद से खाली हाथ लौटे JD वांस, ईरान के साथ युद्धविराम वार्ता में कोई समझौता नहीं
वाशिंगटन और तेहरान इस्लामाबाद में मध्य पूर्व के चल रहे संकट पर अंतिम सहमति नहीं बना पाए. ईरान ने अमेरिका की पेशकश की शर्तों को ठुकरा दिया. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वांस ने यह जानकारी देते हुए कहा कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत बेनतीजा रही.

अमेरिका और ईरान के बीच चल रही शांति वार्ता विफल हो गई है. मध्य पूर्व में लगभग 40 दिनों तक चली जंग के बाद घोषित दो सप्ताह के अस्थायी संघर्षविराम के बावजूद दोनों पक्ष किसी स्थायी समझौते पर सहमत नहीं हो सके. पाकिस्तान की राजधानी इस्लामाबाद में हुई इन वार्ताओं का उद्देश्य अस्थायी truce को लंबे समय तक चलने वाली शांति में बदलना था, लेकिन हॉर्मुज जलडमरूमध्य के पुनः खुलने समेत कई मुद्दों पर गतिरोध के कारण कोई डील नहीं हो पाई. अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वैंस ने 21 घंटे तक चली इन वार्ताओं के बाद अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए वापसी की घोषणा की.
वार्ता विफल, कोई समझौता नहीं
जेडी वैंस ने प्रेस को संबोधित करते हुए कहा कि अमेरिका ने ईरान को सर्वश्रेष्ठ डील ऑफर की थी, लेकिन ईरान ने उसे स्वीकार नहीं किया. हमने अपनी सीमाएं स्पष्ट कर दी हैं, हम किन बातों पर समझौता करने को तैयार हैं और किन बातों पर समझौता करने को तैयार नहीं हैं, और हमने इसे यथासंभव स्पष्ट कर दिया है, और हो सकता है कि उन्होंने हमारी शर्तों को स्वीकार न करने का विकल्प चुना हो," वैंस ने इस्लामाबाद वार्ता के बारे में प्रेस को जानकारी देते हुए कहा.
उन्होंने तीन मिनट के संबोधन में बताया कि दोनों देशों के प्रतिनिधियों के बीच कई गंभीर चर्चाएं हुईं, फिर भी खाड़ी क्षेत्र में लंबी अवधि की शांति सुनिश्चित करने वाला कोई समझौता नहीं हो सका.
हमने ईरानियों के साथ कई महत्वपूर्ण बातचीत की है. यह अच्छी खबर है. बुरी खबर यह है कि हम किसी समझौते पर नहीं पहुंच पाए हैं - और मुझे लगता है कि यह अमेरिका के लिए बुरी खबर होने की तुलना में ईरान के लिए कहीं अधिक बुरी खबर है,” वैंस ने कहा.
अमेरिका ने परमाणु हथियारों पर प्रतिबद्धता मांगी
वैंस ने ईरान द्वारा अस्वीकार किए गए मुद्दों का पूरा विवरण नहीं बताया, लेकिन संकेत दिया कि अमेरिका को ईरान से परमाणु हथियार न विकसित करने की सकारात्मक प्रतिबद्धता नहीं मिली.
सीधी सी बात यह है कि हमें एक सकारात्मक प्रतिबद्धता देखनी होगी कि वे परमाणु हथियार हासिल करने की कोशिश नहीं करेंगे, और न ही ऐसे उपकरण हासिल करने की कोशिश करेंगे जो उन्हें जल्दी से परमाणु हथियार बनाने में सक्षम बना सकें. यही संयुक्त राज्य अमेरिका के राष्ट्रपति का मूल लक्ष्य है, और यही हमने इन वार्ताओं के माध्यम से हासिल करने का प्रयास किया है.
उनके परमाणु कार्यक्रम, जैसे भी थे, और जो संवर्धन सुविधाएं उनके पास पहले थीं, उन्हें नष्ट कर दिया गया है. लेकिन सीधा सवाल यह है कि क्या हम ईरानियों की ओर से परमाणु हथियार विकसित न करने की कोई ठोस प्रतिबद्धता देख पा रहे हैं, न सिर्फ अभी, न सिर्फ दो साल बाद, बल्कि लंबे समय के लिए? अभी तक तो ऐसा नहीं हुआ है. हमें उम्मीद है कि ऐसा होगा,” उन्होंने आगे कहा.
युद्ध के दौरान जो नहीं मिला, वही मांगा- ईरानी मीडिया
ईरान के स्थानीय मीडिया फार्स न्यूज ने रिपोर्ट किया कि वार्ता इसलिए विफल रही क्योंकि वाशिंगटन ने ऐसी मांगें रखीं जिन्हें तेहरान स्वीकार नहीं कर सकता था.प्रतिनिधिमंडल के एक सूत्र का हवाला देते हुए रिपोर्ट में कहा गया कि अमेरिका वार्ता के जरिए युद्ध के दौरान जो हासिल नहीं कर सका, वही हासिल करना चाहता था.
रिपोर्ट में आगे कहा गया है, "ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य, शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा और कई अन्य मुद्दों के संबंध में अमेरिका की महत्वाकांक्षी शर्तों को स्वीकार नहीं किया.


