100 रुपये से ऊपर भारत से खरीद पर कस्टम ड्यूटी, बालेन शाह के फैसले पर क्या बोले नेपाली अर्थशास्त्री?
नेपाली अर्थशास्त्री डॉ. गोविंद राज पोखरेल ने हाल ही भारत की एक नामी मीडिया एजेंसी से बातचीत करते हुए बताया कि इस नियम से मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे।

नई दिल्ली: हाल ही में नेपाल की बालेन शाह सरकार ने नया नियम लागू किया है। अब भारत से 100 रुपये से ज्यादा का सामान लाने पर कस्टम ड्यूटी देनी होगी। इस फैसले का सबसे ज्यादा असर दिहाड़ी मजदूरों और गरीब तबके पर पड़ रहा है। देश के कई हिस्सों में लोग विरोध कर रहे हैं।
भारत-नेपाल के बीच खुली सीमा है और लोग बिना वीजा-पासपोर्ट आते-जाते हैं। इसलिए इस नियम का असर दोनों तरफ दिख रहा है। सरहदी इलाकों में भारतीय कारोबारियों को भी झटका लगा है। इस बीच एक नेपाली अर्थशास्त्री डॉ. गोविंद राज पोखरेल ने भी इस मामले में अपना पक्ष रखा है।
नेपाली अर्थशास्त्री ने दिया ये एक्सप्लेनेशन
नेपाल के राष्ट्रीय योजना आयोग के पूर्व उपाध्यक्ष और अर्थशास्त्री डॉ. गोविंद राज पोखरेल ने हाल ही भारत की एक नामी मीडिया एजेंसी से बातचीत करते हुए बताया कि इस नियम से मजदूर सबसे ज्यादा प्रभावित होंगे। उन्होंने कहा, "आज 100 रुपये में आता ही क्या है? जो मजदूर दिन के 500-600 रुपये कमाता है, उसके लिए यह बहुत मुश्किल है। इस सीमा को कम से कम 1000 रुपये करना चाहिए।"
उन्होंने यह भी बताया कि किसान भी खाद या जरूरी सामान भारत से लाते हैं, उन पर भी बोझ बढ़ेगा। डॉ. गोविंद ने कहा कि नेपाल अपने राजस्व का 40% से ज्यादा हिस्सा कस्टम ड्यूटी, वैट और एक्साइज ड्यूटी से जुटाता है। इसमें सबसे बड़ा योगदान बीरगंज, भैरहवा और बिराटनगर जैसे भारत-नेपाल बॉर्डर नाकों का है। नेपाल टूरिज्म से 5% से भी कम कमाई करता है, इसलिए सरकार का फोकस हमेशा कस्टम पर रहता है। राजस्व गिरते ही सरकार कस्टम बढ़ाने की तरफ देखती है।
नेपाली गरीबों को होगी दिक्कत
डॉ. गोविंद के मुताबिक बालेन शाह सरकार के इस सख्त फैसले से नेपाल के गरीब तबके को काफी दिक्कत हो रही है। इससे देश में गरीबी और बढ़ सकती है। उनका सुझाव है कि 100 रुपये की मौजूदा सीमा को बढ़ाकर 1000 रुपये किया जाए। इससे किसानों को भारत से खाद या जरूरी सामान लाने में राहत मिलेगी और सरकार को भी नुकसान नहीं होगा। यह नियम लागू होते ही मधेस प्रांत के उन आठ जिलों में इसका असर साफ दिखने लगा है, जिनकी सीमा भारत से पूरी तरह खुली हुई है।
बदल गए पुराने हालत
गौरतलब है कि पहले चीन का सामान नेपाल आता था और भारतीय लोग नेपाल से खरीदारी करते थे। लेकिन उदारीकरण के बाद भारत में सामान सस्ता हुआ और अब नेपाली लोग भारत से खरीदारी करने लगे। डॉ. गोविंद ने कहा कि सरकार ने राजस्व के दूसरे स्रोत विकसित नहीं किए, इसलिए सीमा शुल्क पर निर्भरता बढ़ गई।
वहीं इस नियम का तुरंत असर मधेस प्रांत के उन 08 जिलों में दिख रहा है जिनकी सीमा भारत से खुली हुई है। पहले लोग बेरोकटोक सामान लाते-ले जाते थे, अब सीमा पर सख्ती है। डॉ. गोविंद चेताते हैं कि इससे गरीबी और बढ़ेगी।


