क्या अमेरिका और ईरान के बीच शुरू होगी नई जंग समझौते को लेकर फिर सामने आया ट्रंप का बयान

अमेरिका और ईरान के बीच हालात एक बार फिर तनावपूर्ण मोड़ पर पहुंचते दिख रहे हैं. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर समझौते को लेकर बात करते हुए कहा है कि अमेरिका की शर्तें पूरी होना जरूरी हैं.

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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर तेज होता दिख रहा है. अमेरिका और ईरान के बीच हालात ऐसे मोड़ पर पहुंचते नजर आ रहे हैं, जहां बातचीत और सैन्य कार्रवाई दोनों की संभावनाएं साथ-साथ चल रही हैं. अमेरिका ने शनिवार को साफ संकेत दिए हैं कि जरूरत पड़ने पर वह फिर से सैन्य अभियान शुरू कर सकता है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा है कि ईरान के साथ किसी भी तरह के समझौते में अमेरिका की शर्तें पूरी होना जरूरी हैं. इनमें सबसे अहम शर्त ईरान की परमाणु हथियार बनाने की किसी भी कोशिश पर हमेशा के लिए रोक लगाना है.

इसी बीच अमेरिकी सेना ने एक ईरानी बंदरगाह की ओर बढ़ रहे एक मालवाहक जहाज को रोकने की कार्रवाई की. रिपोर्ट्स के मुताबिक, जहाज के इंजन सिस्टम को निशाना बनाकर उसे निष्क्रिय किया गया. अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कदम सुरक्षा और प्रतिबंधों को लागू करने के लिए उठाया गया.

होर्मुज जलडमरूमध्य पर बढ़ी हलचल

मौजूदा हालात में होर्मुज जलडमरूमध्य फिर चर्चा के केंद्र में आ गया है. यह रास्ता दुनिया के सबसे अहम समुद्री व्यापार और तेल आपूर्ति मार्गों में गिना जाता है. अमेरिका की ओर से ईरानी बंदरगाहों पर दबाव और नाकेबंदी जैसे कदमों के बाद इस इलाके में जहाजों की आवाजाही प्रभावित होने की बात सामने आई है.

दूसरी ओर ईरान का कहना है कि इस क्षेत्र से जुड़े फैसलों पर उसका और पड़ोसी देशों का अधिकार है और अभी तक अमेरिका के साथ कोई अंतिम समझौता नहीं हुआ है. तेहरान ने बातचीत जारी रहने की बात कही है, लेकिन किसी तय नतीजे से इनकार किया है.

नहीं लिया गया कोई अंतिम निर्णय

रिपोर्ट्स के मुताबिक, व्हाइट हाउस के सिचुएशन रूम में हुई अहम बैठक के बाद भी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया. अमेरिकी प्रशासन के भीतर समझौते और दबाव दोनों विकल्पों पर चर्चा जारी है. रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी स्पष्ट किया कि अगर हालात बिगड़ते हैं तो अमेरिका के पास सैन्य कार्रवाई के लिए पर्याप्त संसाधन और तैयारी मौजूद है. उनके बयान ने संकेत दिया कि अमेरिका बातचीत के रास्ते को खुला रखते हुए भी दबाव की रणनीति बनाए हुए है.

समझौते की उम्मीद या फिर नया टकराव?

हाल के दिनों में यह भी खबरें आईं कि युद्धविराम को आगे बढ़ाने और बातचीत को फिर शुरू करने को लेकर कुछ शुरुआती सहमति बन सकती है. लेकिन दोनों देशों की ओर से अब तक इसे अंतिम रूप देने की पुष्टि नहीं की गई है. ईरान के कुछ नेताओं ने संभावित समझौते पर नाराजगी भी जताई है. उनका मानना है कि अमेरिका की मांगें बहुत ज्यादा हैं और इससे देश को अपेक्षित फायदा नहीं होगा.

अंतरराष्ट्रीय बाजार पर असर

इन घटनाओं का असर सिर्फ राजनीति और सुरक्षा तक सीमित नहीं रहा. युद्धविराम और समुद्री रास्तों के खुलने की उम्मीदों के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भी गिरावट देखी गई. ब्रेंट क्रूड की कीमतें हाल के हफ्तों में नीचे आईं, जिससे संकेत मिला कि बाजार फिलहाल तनाव कम होने की संभावना को भी ध्यान में रख रहा है. 

इधर पश्चिम एशिया में तनाव केवल अमेरिका और ईरान तक सीमित नहीं है. लेबनान और इजरायल के बीच भी सैन्य गतिविधियां बढ़ने की खबरें सामने आई हैं. इजरायली सेना की कार्रवाई और हवाई हमलों के बाद क्षेत्र में अस्थिरता और बढ़ गई है. First Updated : Sunday, 31 May 2026

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