नई दिल्ली: पूर्वी प्रशांत महासागर में मंगलवार को अमेरिकी सेना की एक कार्रवाई में संदिग्ध मादक पदार्थ तस्करी से जुड़ी नाव को निशाना बनाया गया. इस हमले में एक व्यक्ति की जान चली गई. अमेरिकी दक्षिणी कमान के अनुसार घटना के बाद तटरक्षक बल को तुरंत सूचना दे दी गई, ताकि समुद्र में मौजूद अन्य लोगों की तलाश और बचाव अभियान शुरू किया जा सके.
दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन के दौरान लैटिन अमेरिकी समुद्री क्षेत्रों में नशीले पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए बड़े स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है. इसी रणनीति के तहत अमेरिकी सैन्य बल उन नावों पर कार्रवाई कर रहे हैं, जिन पर ड्रग्स की तस्करी का संदेह होता है. हालांकि, कई मामलों में इन आरोपों के समर्थन में सार्वजनिक रूप से ठोस सबूत पेश नहीं किए गए हैं.
सितंबर से शुरू हुए इस अभियान के दौरान अब तक कुल 194 लोगों की मौत हो चुकी है. यह आंकड़ा लगातार बढ़ती सैन्य कार्रवाइयों को लेकर सवाल भी खड़े कर रहा है. मानवाधिकार संगठनों और कुछ विशेषज्ञों ने चिंता जताई है कि समुद्री अभियानों में बल प्रयोग की सीमा और उसके कानूनी आधार की पारदर्शिता स्पष्ट नहीं है.
इसी बीच, पेंटागन की निगरानी करने वाली एक स्वतंत्र संस्था ने पिछले सप्ताह कहा था कि वह इन सैन्य अभियानों की समीक्षा करेगी. जांच का मुख्य उद्देश्य यह पता लगाना है कि क्या अमेरिकी सेना ने कथित ड्रग तस्करी वाली नौकाओं को निशाना बनाते समय तय सैन्य प्रक्रियाओं और लक्ष्य निर्धारण नियमों का सही तरीके से पालन किया था.
अमेरिकी सेना की कार्रवाई में आमतौर पर एक निर्धारित “संयुक्त लक्ष्य निर्धारण चक्र” अपनाया जाता है. यह प्रक्रिया छह चरणों में पूरी होती है. इसमें सबसे पहले सैन्य कमांडर के उद्देश्य तय किए जाते हैं, फिर संभावित लक्ष्य की पहचान की जाती है. इसके बाद विस्तृत विश्लेषण, निर्णय प्रक्रिया, सैन्य कार्रवाई का क्रियान्वयन और अंत में पूरे ऑपरेशन का मूल्यांकन किया जाता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की जांच से यह स्पष्ट हो सकेगा कि समुद्री अभियानों में अंतरराष्ट्रीय नियमों और सैन्य मानकों का कितना पालन किया गया. वहीं, अमेरिका का कहना है कि उसका उद्देश्य क्षेत्र में बढ़ती मादक पदार्थ तस्करी पर रोक लगाना और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करना है. First Updated : Wednesday, 27 May 2026