PoJK में जनसंहार के आंकड़े छिपाने की कोशिश कर रहा पाकिस्तान! अधिकारी नहीं सौंप रहे आंदोलनकारियों के शव
पीओजेके में जारी विरोध प्रदर्शन को लेकर एक नया खुलासा हुआ है. आंदोलन कर रहे लोगों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए लोगों के शव उनके परिवारों को नहीं दिए जा रहे हैं.

नई दिल्ली: पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू-कश्मीर (पीओजेके) में हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं. आंदोलन कर रहे लोगों और स्थानीय संगठनों का आरोप है कि हालिया विरोध प्रदर्शनों के दौरान सुरक्षा बलों की कार्रवाई में मारे गए लोगों के शव उनके परिवारों को नहीं दिए जा रहे हैं. प्रदर्शनकारी इसे मौतों की वास्तविक संख्या छिपाने की कोशिश बता रहे हैं, जबकि क्षेत्र में विरोध प्रदर्शन लगातार तेज होते जा रहे हैं.
जम्मू कश्मीर ज्वाइंट अवामी एक्शन कमेटी (जेएएसी) का कहना है कि हाल के दिनों में सुरक्षा बलों और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई झड़पों में बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है. संगठन के अनुसार, मृतकों की संख्या 53 से अधिक हो सकती है, जबकि सैकड़ों लोग घायल हुए हैं. आंदोलनकारियों का आरोप है कि प्रशासन स्थिति को नियंत्रित करने के लिए सख्त कदम उठा रहा है और संचार सेवाओं पर भी रोक लगाई गई है.
तीसरे दिन भी बंद रहा जनजीवन
पाकिस्तानी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पीओजेके में लगातार तीसरे दिन भी बंद का असर देखने को मिला. कई जिलों में बाजार पूरी तरह बंद रहे और सामान्य गतिविधियां प्रभावित हुईं. सड़कों पर लोगों की आवाजाही कम रही और कई इलाकों में विरोध प्रदर्शन जारी रहे.
रावलकोट बना आंदोलन का केंद्र
इस पूरे आंदोलन का मुख्य केंद्र रावलकोट क्षेत्र बना हुआ है. बताया जा रहा है कि पिछले सप्ताह एक व्यापारी की मौत के बाद लोगों में भारी नाराजगी फैल गई थी. इसके बाद विरोध प्रदर्शन तेज हो गए और कई स्थानों पर प्रदर्शनकारियों तथा सुरक्षा बलों के बीच टकराव की स्थिति बनी. जेएएसी के प्रतिनिधि इम्तियाज असलम ने कहा कि आंदोलन तब तक जारी रहेगा जब तक मृतकों के शव उनके परिजनों को नहीं सौंपे जाते और संगठन पर लगाए गए प्रतिबंध को वापस नहीं लिया जाता. उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग भी उठाई है.
जांच और फोर्स हटाने की मांग
प्रदर्शनकारी समूह का कहना है कि नागरिकों की मौत की स्वतंत्र जांच होनी चाहिए. साथ ही उन्होंने शहरी क्षेत्रों से अतिरिक्त सुरक्षा बलों को हटाने की मांग भी की है. इंटरनेट सेवाएं बाधित होने के बावजूद बड़ी संख्या में लोग विरोध प्रदर्शनों में शामिल हो रहे हैं. दूसरी ओर, प्रशासन का रुख सख्त दिखाई दे रहा है. अधिकारियों का कहना है कि पहले दी गई कुछ रियायतों को दोबारा लागू करने की फिलहाल कोई योजना नहीं है.
एमनेस्टी इंटरनेशनल ने जताई चिंता
मानवाधिकार संगठन एमनेस्टी इंटरनेशनल ने भी पीओजेके में हो रही घटनाओं पर चिंता व्यक्त की है. संगठन ने आरोप लगाया कि विरोध प्रदर्शनों को नियंत्रित करने के लिए जरूरत से ज्यादा बल का इस्तेमाल किया जा रहा है. साथ ही अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और अन्य बुनियादी अधिकारों के प्रभावित होने की बात भी कही गई है.
ब्रिटिश सांसद ने पाकिस्तान की कार्रवाई की आलोचना की
ब्रिटेन के वरिष्ठ कंजर्वेटिव सांसद बाब ब्लैकमैन ने भी पीओजेके की स्थिति पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने प्रदर्शनकारियों के खिलाफ की जा रही कार्रवाई की आलोचना करते हुए कहा कि पाकिस्तान को इस क्षेत्र को छोड़ देना चाहिए और इसका भारत के साथ पुनर्मिलन होना चाहिए. ब्लैकमैन ने कहा कि 1947 से यह क्षेत्र विवाद का विषय बना हुआ है और मौजूदा हालात अंतरराष्ट्रीय चिंता का कारण बन रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि हालिया हिंसा से कुछ ब्रिटिश नागरिक भी प्रभावित हुए हैं, जिससे यह मामला ब्रिटेन के लिए भी महत्वपूर्ण बन गया है.
ब्रिटिश संसद में उठाने की मांग
ब्रिटिश सांसद ने अपने विदेश मंत्री से इस मुद्दे को संसद में उठाने और पाकिस्तान के उच्चायुक्त से जवाब मांगने की अपील की है. उन्होंने बताया कि लगभग 30 सांसदों ने इस संबंध में एक पत्र भी लिखा है, जिसमें क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त की गई है. ब्लैकमैन ने संयुक्त राष्ट्र के पुराने प्रस्तावों का उल्लेख करते हुए कहा कि क्षेत्र में स्थायी समाधान के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने चाहिए. उन्होंने भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका की सराहना करते हुए कहा कि क्षेत्रीय सुरक्षा और स्थिरता के मामलों में भारत की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण होती जा रही है.


