सऊदी अरब से नजदीकी पाकिस्तान को पड़ी महंगी? UAE ने वापस मांगे अपने अरबों डॉलर
मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव के बीच UAE ने पाकिस्तान से 3.5 अरब डॉलर का कर्ज लौटाने को कहा है. पाकिस्तान इस महीने रकम चुकाएगा, लेकिन इससे उसकी आर्थिक स्थिति और कूटनीतिक संतुलन पर दबाव बढ़ सकता है.

मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव का असर अब पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था पर भी साफ दिखाई देने लगा है. हालात ऐसे बन गए हैं कि पाकिस्तान को अचानक एक बड़ा आर्थिक फैसला लेना पड़ा है. संयुक्त अरब अमीरात (UAE) द्वारा कर्ज वापसी की मांग के बाद पाकिस्तान ने 3.5 अरब अमेरिकी डॉलर लौटाने का निर्णय लिया है, जिसने नई आर्थिक और कूटनीतिक चर्चा को जन्म दे दिया है.
दरअसल, UAE ने पाकिस्तान को यह रकम उसकी आर्थिक स्थिति संभालने और भुगतान संतुलन को स्थिर रखने के लिए दी थी. अब मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष और अस्थिरता के कारण UAE अपने फंड्स वापस लेना चाहता है. पहले यह कर्ज हर साल “रोल ओवर” कर दिया जाता था, यानी भुगतान की अवधि बढ़ा दी जाती थी. लेकिन इस बार स्थिति अलग है और UAE ने तत्काल वापसी की मांग कर दी है.
कहां रखी गई थी यह रकम?
सूत्रों के अनुसार, यह 3.5 अरब डॉलर की राशि स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान में सुरक्षित जमा के रूप में रखी गई थी. पाकिस्तान इस महीने के अंत तक यह पूरी रकम अबू धाबी को लौटा देगा. इस जमा राशि पर पाकिस्तान लगभग 6 प्रतिशत की दर से ब्याज भी चुका रहा था.
अब तक UAE हर साल इस कर्ज की अवधि बढ़ाता रहा, जिससे पाकिस्तान को राहत मिलती थी. दिसंबर 2025 में भी इस रकम को पहले एक महीने और फिर दो महीने के लिए बढ़ाया गया था. लेकिन इस बार UAE ने इसे आगे बढ़ाने के बजाय पूरी राशि वापस मांग ली है.
पाकिस्तान की वित्तीय स्थिति पर असर
इस समय पाकिस्तान के पास विदेशी मुद्रा भंडार में करीब 21 अरब डॉलर से अधिक की राशि है, जिससे वह फिलहाल इस कर्ज को चुकाने की स्थिति में है. हालांकि, विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले समय में पाकिस्तान को फिर से बाहरी वित्तीय सहायता की जरूरत पड़ सकती है.
चालू वित्त वर्ष में पाकिस्तान को कुल मिलाकर करीब 12 अरब डॉलर के बाहरी जमा की आवश्यकता थी. इसमें सऊदी अरब, चीन और UAE जैसे देशों का योगदान शामिल था. ऐसे में UAE का यह कदम पाकिस्तान के लिए चुनौती खड़ी कर सकता है.
सऊदी अरब से नजदीकी बनी वजह?
रिपोर्ट्स के मुताबिक, पाकिस्तान और सऊदी अरब के बीच हुए एक रक्षा समझौते ने इस स्थिति को और जटिल बना दिया है. बताया जा रहा है कि इस समझौते के बाद UAE नाराज हो गया है. क्षेत्रीय राजनीति में सऊदी अरब और UAE के बीच प्रतिस्पर्धा को देखते हुए पाकिस्तान का झुकाव रियाद की ओर जाना अबू धाबी को पसंद नहीं आया.
इसी कारण पहले UAE ने कर्ज के रोलओवर की अवधि कम कर दी और अब पूरी रकम वापस मांग ली है. इससे पाकिस्तान एक मुश्किल स्थिति में फंस गया है, जहां उसे एक तरफ अपने रणनीतिक संबंधों को संभालना है और दूसरी तरफ आर्थिक दबाव का सामना करना पड़ रहा है.


