अमेरिका की हवाई ताकत पर उठे सवाल! पिछले 24 घंटे में ईरान ने कई अमेरिकी विमानों को बनाया निशाना, पहुंचाया भारी नुकसान

ईरान के साथ जारी संघर्ष में एक ही दिन में दो अमेरिकी विमानों के गिरने से हालात गंभीर हो गए हैं. एक पायलट लापता है, जबकि बढ़ते हमलों ने अमेरिकी हवाई नियंत्रण और युद्ध की दिशा पर सवाल खड़े कर दिए हैं.

Shraddha Mishra

मध्य पूर्व में चल रहे संघर्ष ने अचानक एक नया और खतरनाक मोड़ ले लिया है. एक ही दिन में अमेरिका के दो युद्धक विमानों के गिरने की खबर ने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है. इस घटना ने न सिर्फ युद्ध की गंभीरता को बढ़ा दिया है, बल्कि अमेरिका की हवाई ताकत को लेकर किए जा रहे दावों पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं.

बीते 24 घंटों में जो घटनाएं सामने आई हैं, उन्हें इस संघर्ष का सबसे मुश्किल दौर माना जा रहा है. कई अमेरिकी विमानों को निशाना बनाया गया, कुछ को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी और कुछ को भारी नुकसान हुआ. ईरान के ऊपर एक अमेरिकी एफ-15ई लड़ाकू विमान मार गिराया गया. इस विमान में दो लोग सवार थे, जिनमें से एक को सुरक्षित निकाल लिया गया, जबकि दूसरा अभी भी लापता है. उसकी तलाश लगातार जारी है.

बचाव के लिए गए हेलीकॉप्टरों पर भी हमले

लापता पायलट को ढूंढने के लिए शुरू किया गया बचाव अभियान भी आसान नहीं रहा. इस मिशन में भेजे गए हेलीकॉप्टरों पर भी हमले हुए और उन्हें नुकसान पहुंचा. हालांकि चालक दल के सदस्य किसी तरह सुरक्षित लौटने में सफल रहे, लेकिन इस घटना ने यह दिखा दिया कि दुश्मन क्षेत्र में हर कदम कितना जोखिम भरा है.

अन्य विमानों को भी नुकसान

इसी दौरान एक ए-10 विमान कुवैत के ऊपर दुर्घटनाग्रस्त हो गया, हालांकि उसका पायलट समय रहते बाहर निकल गया और बचा लिया गया. इसके अलावा एक एफ-16 को आपातकालीन लैंडिंग करनी पड़ी और ईंधन भरने वाले टैंकर विमानों को भी आपात स्थिति का सामना करना पड़ा. इन घटनाओं से साफ है कि अमेरिकी हवाई अभियानों पर भारी दबाव बन गया है और स्थिति पहले से ज्यादा चुनौतीपूर्ण हो गई है.

ईरान की सख्त प्रतिक्रिया

ईरान ने इस मौके को अपने पक्ष में इस्तेमाल करते हुए लापता अमेरिकी पायलट की तलाश तेज कर दी है. वहां की सुरक्षा एजेंसियों ने आम लोगों से भी जानकारी देने की अपील की है और उसे पकड़ने या मारने पर इनाम की घोषणा तक कर दी है. ईरानी नेताओं ने इसे युद्ध का अहम मोड़ बताया है और इसे अपनी रणनीतिक सफलता के रूप में पेश किया है.

अमेरिका का रुख

इन घटनाओं के बावजूद अमेरिकी नेतृत्व ने स्थिति को सामान्य बताने की कोशिश की है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि यह युद्ध का हिस्सा है और इससे बातचीत या रणनीति पर कोई बड़ा असर नहीं पड़ेगा. हालांकि, इन घटनाओं ने उनके उन दावों को कमजोर किया है, जिनमें कहा गया था कि अमेरिका का ईरानी हवाई क्षेत्र पर पूरा नियंत्रण है.

लगातार दो विमानों के गिरने से यह साफ हो गया है कि युद्ध में हवाई ताकत भी पूरी तरह सुरक्षित नहीं है. विशेषज्ञों का मानना है कि कमजोर माने जाने वाले रक्षा सिस्टम भी सही समय पर बड़ा नुकसान पहुंचा सकते हैं. इस संघर्ष के जल्द खत्म होने के कोई संकेत नहीं दिख रहे हैं. बातचीत की कोशिशें भी फिलहाल सफल नहीं हो पाई हैं. वहीं, क्षेत्र में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है.

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