Explainer: अमेरिका की वार्निंग, आतंकियों की धमकी! आखिर पाकिस्तान का असली मालिक कौन?

पाकिस्तान एक बार फिर ऐसे मोड़ पर खड़ा है जहां उसे दो तरफ से खतरे मिल रहे हैं. एक तरफ अमेरिका की सख्त चेतावनी है, तो दूसरी तरफ आतंकी संगठनों की खुली धमकियां. सवाल अब सिर्फ आतंकवाद का नहीं रहा, बल्कि इस बात का हो गया है कि आखिर पाकिस्तान को चला कौन रहा है-सरकार या बंदूकें?

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

Pakistan Crisis: जिस पाकिस्तान को कभी आतंकवाद को पालने वाला कहा जाता था, आज वही पाकिस्तान खुद अपने बनाए जाल में फंसता नजर आ रहा है. हालात ऐसे हो चुके हैं कि एक तरफ अमेरिका उसे लगातार चेतावनी दे रहा है, जबकि दूसरी तरफ आतंकी संगठन उसी पाकिस्तान को धमका रहे हैं. दुनिया अब यह सवाल पूछ रही है कि आखिर पाकिस्तान में सत्ता किसके हाथ में है? क्या वहां की चुनी हुई सरकार फैसले लेती है, या फिर बंदूक और बारूद का खेल चलाने वाले संगठन देश की दिशा तय करते हैं? पाकिस्तान के भीतर बढ़ती अस्थिरता ने पूरी दुनिया की चिंता बढ़ा दी है.

आर्थिक संकट, राजनीतिक उथल-पुथल और आतंकी गतिविधियों ने पाकिस्तान की छवि को बुरी तरह नुकसान पहुंचाया है. हालात यह हो चुके हैं कि आम पाकिस्तानी नागरिक भी खुद को असुरक्षित महसूस करने लगा है. अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान की साख लगातार कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है. दुनिया के कई देश अब पाकिस्तान को एक जोखिम भरे राष्ट्र के रूप में देखने लगे हैं.

आतंक की फैक्ट्री अब खुद डर में

पिछले कई दशकों से पाकिस्तान पर आरोप लगते रहे हैं कि उसने आतंकवाद को अपनी रणनीति का हिस्सा बनाया. कश्मीर से लेकर अफगानिस्तान तक, कई आतंकी संगठनों के तार पाकिस्तान की धरती से जुड़ते रहे.लेकिन अब वही आतंकी संगठन पाकिस्तान के लिए सिरदर्द बन चुके हैं. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान, बलूच विद्रोही गुट और कट्टरपंथी संगठन लगातार पाकिस्तानी सेना और सरकार को चुनौती दे रहे हैं. हालात यहां तक पहुंच चुके हैं कि सेना के कैंप, पुलिस स्टेशन और सरकारी दफ्तर तक निशाने पर आ चुके हैं.

पाकिस्तान अब उसी आग में जल रहा है, जिसे उसने कभी दूसरों के खिलाफ इस्तेमाल किया था. कई इलाकों में सेना को भारी सुरक्षा अभियान चलाने पड़ रहे हैं. आम लोगों के बीच भी डर और बेचैनी का माहौल लगातार बढ़ता जा रहा है. विशेषज्ञ मानते हैं कि पाकिस्तान अब अपने ही बनाए आतंक के जाल में घिर चुका है.

अमेरिका क्यों दे रहा चेतावनी?

अमेरिका लंबे समय से पाकिस्तान पर दोहरा खेल खेलने का आरोप लगाता रहा है. वॉशिंगटन का मानना रहा है कि पाकिस्तान एक तरफ आतंकवाद के खिलाफ सहयोग का दावा करता है, जबकि दूसरी तरफ आतंकी संगठनों को पनाह देता है. हाल के दिनों में अमेरिका ने पाकिस्तान को साफ संकेत दिया है कि अगर उसने आतंकी नेटवर्क पर लगाम नहीं लगाई तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने पड़ सकते हैं. अमेरिकी एजेंसियों को डर है कि पाकिस्तान की अस्थिरता पूरे दक्षिण एशिया को संकट में डाल सकती है. खासकर परमाणु हथियारों वाले देश में बढ़ती कट्टरपंथी ताकतें दुनिया के लिए बड़ा खतरा मानी जा रही हैं.

यही वजह है कि अमेरिका अब पाकिस्तान पर लगातार दबाव बढ़ा रहा है. अमेरिकी रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि पाकिस्तान की कमजोरी वैश्विक सुरक्षा के लिए भी बड़ा खतरा बन सकती है. यही कारण है कि वॉशिंगटन लगातार इस्लामाबाद की गतिविधियों पर नजर बनाए हुए है. कई अमेरिकी नेताओं ने खुले मंचों से भी पाकिस्तान को चेतावनी दी है.

पाकिस्तान की सरकार कितनी मजबूत?

पाकिस्तान में लोकतंत्र हमेशा कमजोर माना गया है. वहां की चुनी हुई सरकारें अक्सर सेना के दबाव में काम करती नजर आती हैं. कई बार ऐसा भी देखा गया कि प्रधानमंत्री बदले, लेकिन असली ताकत सेना के हाथों में ही रही. अब स्थिति और जटिल हो चुकी है क्योंकि सेना खुद आतंकी हमलों के निशाने पर है. पाकिस्तान के कई हिस्सों में सरकार की पकड़ कमजोर पड़ती दिखाई दे रही है. बलूचिस्तान और खैबर पख्तूनख्वा जैसे इलाकों में अलगाववाद और आतंकवाद तेजी से बढ़ रहा है.

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान की सत्ता सच में इस्लामाबाद में बैठी सरकार के हाथ में है, या फिर बंदूक उठाने वाले समूहों के पास असली ताकत पहुंच चुकी है? राजनीतिक अस्थिरता ने भी हालात को और ज्यादा खराब कर दिया है. विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच लगातार टकराव देखने को मिल रहा है. कई विश्लेषकों का मानना है कि पाकिस्तान इस समय नेतृत्व संकट से भी गुजर रहा है.

आर्थिक तबाही ने बढ़ाया संकट

पाकिस्तान इस वक्त गंभीर आर्थिक संकट से भी जूझ रहा है. महंगाई आसमान छू रही है, विदेशी मुद्रा भंडार लगातार घट रहा है और आम जनता की जिंदगी मुश्किल होती जा रही है. IMF और दूसरे अंतरराष्ट्रीय संस्थानों से मदद मांगने वाला पाकिस्तान अब आर्थिक रूप से बेहद कमजोर हो चुका है. बेरोजगारी और गरीबी ने युवाओं में गुस्सा बढ़ाया है, जिसका फायदा कट्टरपंथी संगठन उठा रहे हैं. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि जब किसी देश की अर्थव्यवस्था कमजोर होती है तो वहां चरमपंथ तेजी से बढ़ता है.

पाकिस्तान में भी वही होता नजर आ रहा है. आर्थिक बदहाली और आतंकवाद ने मिलकर देश को अंदर से कमजोर कर दिया है. पाकिस्तान की आम जनता अब रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी संघर्ष करती दिखाई दे रही है. बिजली, गैस और खाने-पीने की चीजों की बढ़ती कीमतों ने लोगों की कमर तोड़ दी है. हालात ऐसे हैं कि कई जगहों पर सरकार विरोधी प्रदर्शन भी तेज होते जा रहे हैं.

चीन भी क्यों परेशान है?

सिर्फ अमेरिका ही नहीं, चीन भी पाकिस्तान के हालात को लेकर चिंतित नजर आता है. चीन ने अरबों डॉलर लगाकर CPEC प्रोजेक्ट शुरू किया था, लेकिन बढ़ते आतंकी हमलों ने चीनी नागरिकों की सुरक्षा पर सवाल खड़े कर दिए. कई बार चीनी इंजीनियरों और परियोजनाओं को निशाना बनाया गया. इससे चीन को भी समझ आ रहा है कि पाकिस्तान में सुरक्षा हालात तेजी से बिगड़ रहे हैं.

चीन पाकिस्तान का करीबी दोस्त जरूर है, लेकिन वह भी अब स्थिरता चाहता है. अगर पाकिस्तान में अराजकता बढ़ती है तो उसका असर चीन के निवेश पर भी पड़ेगा. यही वजह है कि बीजिंग भी अब पाकिस्तान पर सुरक्षा मजबूत करने का दबाव बना रहा है. चीन को डर है कि अस्थिर पाकिस्तान उसके आर्थिक प्रोजेक्ट्स को भारी नुकसान पहुंचा सकता है. कई रिपोर्टों में दावा किया गया है कि चीन अब पाकिस्तान से सख्त सुरक्षा गारंटी मांग रहा है. बीजिंग के लिए यह सिर्फ दोस्ती नहीं बल्कि अरबों डॉलर का सवाल भी बन चुका है.

सेना बनाम आतंकियों की जंग

पाकिस्तान में इस समय सबसे बड़ा संघर्ष सेना और आतंकियों के बीच दिखाई दे रहा है. एक दौर था जब कई आतंकी संगठन पाकिस्तान की रणनीति का हिस्सा माने जाते थे, लेकिन अब वही संगठन सेना के लिए सबसे बड़ा खतरा बन गए हैं. तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान लगातार पाकिस्तानी सेना पर हमले कर रहा है. कई इलाकों में सेना को भारी नुकसान उठाना पड़ा है. इससे सेना की ताकत और उसकी पकड़ पर सवाल उठने लगे हैं.

अगर सेना कमजोर होती है तो पाकिस्तान में राजनीतिक और सामाजिक अस्थिरता और बढ़ सकती है. यही डर अब पूरी दुनिया को सता रहा है. पाकिस्तानी सेना लगातार बड़े सैन्य ऑपरेशन चला रही है, लेकिन हालात पूरी तरह काबू में नहीं आ पा रहे. सीमावर्ती इलाकों में सुरक्षा बलों और आतंकियों के बीच लगातार झड़पें हो रही हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि यह लड़ाई अब पाकिस्तान के अस्तित्व की लड़ाई बनती जा रही है.

क्या पाकिस्तान टूटने की तरफ बढ़ रहा?

कई अंतरराष्ट्रीय विश्लेषक मानते हैं कि अगर हालात नहीं सुधरे तो पाकिस्तान के लिए आने वाले साल बेहद मुश्किल हो सकते हैं. देश के भीतर अलगाववादी आंदोलन, आतंकवाद और आर्थिक संकट मिलकर एक बड़े विस्फोट की स्थिति पैदा कर सकते हैं. बलूचिस्तान में लंबे समय से असंतोष है, जबकि खैबर पख्तूनख्वा में आतंकवाद बढ़ता जा रहा है. पाकिस्तान की केंद्रीय सत्ता इन चुनौतियों से जूझती दिखाई दे रही है. यही कारण है कि दुनिया अब पाकिस्तान को एक अस्थिर राष्ट्र के तौर पर देखने लगी है.

सवाल यह नहीं कि पाकिस्तान का दुश्मन कौन है, बल्कि सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान खुद अपने सबसे बड़े संकट में बदल चुका है? कई विश्लेषकों का कहना है कि अगर राजनीतिक और आर्थिक हालात नहीं सुधरे तो देश के भीतर और बड़े विद्रोह भड़क सकते हैं. अलगाववादी संगठनों की गतिविधियां लगातार तेज होती दिखाई दे रही हैं. इससे पाकिस्तान की एकता और स्थिरता पर बड़े सवाल खड़े हो रहे हैं.

दुनिया की नजर पाकिस्तान पर

आज पूरी दुनिया पाकिस्तान को बेहद करीब से देख रही है. अमेरिका, चीन, रूस और मध्य-पूर्व के देश सभी पाकिस्तान की स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं. क्योंकि अगर पाकिस्तान में हालात और बिगड़ते हैं तो उसका असर सिर्फ दक्षिण एशिया तक सीमित नहीं रहेगा. आतंकवाद, परमाणु हथियार और राजनीतिक अस्थिरता का यह खतरनाक मिश्रण वैश्विक संकट बन सकता है. दुनिया यह जानना चाहती है कि क्या पाकिस्तान अपने भीतर पनप चुके कट्टरपंथ और हिंसा को रोक पाएगा, या फिर बंदूकें ही वहां की असली सरकार बन जाएंगी.

फिलहाल पाकिस्तान के हालात यही सवाल खड़े कर रहे हैं कि आखिर उस देश का असली मालिक कौन है-लोकतंत्र या डर? अंतरराष्ट्रीय एजेंसियां लगातार पाकिस्तान की सुरक्षा स्थिति पर रिपोर्ट जारी कर रही हैं. कई देशों ने अपने नागरिकों के लिए यात्रा चेतावनी भी जारी की हुई है. दुनिया को डर है कि अगर हालात और बिगड़े तो इसका असर वैश्विक शांति और सुरक्षा पर भी पड़ सकता है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो