आर्थिक संकट के बीच पाकिस्तान पर नई मार! गेहूं की सप्लाई रुकी, 45 आटा मिलें बंद होने की कगार पर पहुंची

पाकिस्तान में गेहूं की आपूर्ति रुकने से इस्लामाबाद और रावलपिंडी समेत कई शहरों में आटे का गंभीर संकट गहराने लगा है, जबकि करीब 45 आटा मिलें बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं.

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नई दिल्ली: पाकिस्तान पहले से ही आर्थिक संकट, महंगाई और बेरोजगारी जैसी समस्याओं से जूझ रहा है. अब देश में गेहूं की आपूर्ति बाधित होने से आटे का नया संकट खड़ा हो गया है. राजधानी इस्लामाबाद, रावलपिंडी और आसपास के इलाकों में कई आटा मिलों के बंद होने का खतरा मंडरा रहा है, जिससे आम लोगों की मुश्किलें और बढ़ सकती हैं.

गेहूं की सप्लाई रुकने से बढ़ी परेशानी

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, पंजाब प्रांत के खाद्य विभाग ने अचानक गेहूं की आपूर्ति और परिवहन परमिट रोक दिए हैं. बताया जा रहा है कि इस फैसले का कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया गया.

इसके चलते करीब 45 आटा मिलों में गेहूं का स्टॉक तेजी से खत्म हो रहा है और कई मिलें उत्पादन बंद करने की स्थिति में पहुंच गई हैं. यदि जल्द आपूर्ति बहाल नहीं हुई तो राजधानी समेत कई शहरों में आटे की भारी कमी देखने को मिल सकती है.

8,000 टन गेहूं की आपूर्ति प्रभावित

जानकारी के मुताबिक, कुछ समय पहले तक इस्लामाबाद और रावलपिंडी के लिए नियमित रूप से लगभग 8,000 टन गेहूं की आपूर्ति की जा रही थी. लेकिन परिवहन परमिट रुकने के बाद पूरी आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हो गई है. इन शहरों में स्थित आटा मिलें स्थानीय खाद्य जरूरतों को पूरा करने में अहम भूमिका निभाती हैं. ऐसे में उत्पादन रुकने का सीधा असर आम लोगों तक पहुंच सकता है.

कालाबाजारी और महंगाई का खतरा

पाकिस्तान फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति जल्द नहीं सुधरी तो बाजार में आटे की कमी हो सकती है. इससे जमाखोरी, कालाबाजारी और कीमतों में भारी बढ़ोतरी की आशंका भी जताई जा रही है. विशेषज्ञों का मानना है कि पहले से महंगाई झेल रही जनता के लिए यह संकट और बड़ी चुनौती बन सकता है.

सरकार से तत्काल कार्रवाई की मांग

फ्लोर मिल्स एसोसिएशन ने पंजाब की मुख्यमंत्री मरियम नवाज से हस्तक्षेप करने की अपील की है. संगठन ने मांग की है कि गेहूं आपूर्ति के परमिट तुरंत बहाल किए जाएं और ऑनलाइन परमिट प्रणाली फिर से शुरू की जाए, ताकि आपूर्ति सामान्य हो सके.

एसोसिएशन का कहना है कि यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो इस्लामाबाद, रावलपिंडी और आसपास के क्षेत्रों में खाद्य संकट गहरा सकता है. इससे आम लोगों को आटे की कमी के साथ-साथ बढ़ती महंगाई का भी सामना करना पड़ सकता है. First Updated : Thursday, 16 July 2026

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