विदेशों से आया रिकॉर्ड पैसा, फिर भी क्यों नहीं सुधर रही पाकिस्तान की हालत

पाकिस्तान सरकार इस वक्त रिकॉर्ड रेमिटेंस के आंकड़े दिखाकर इतराने में लगी है। लेकिन असलियत कुछ और ही कहती है। विदेशों में बैठे पाकिस्तानियों से आए पैसे ने इस बार सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं।

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नई दिल्ली: पाकिस्तान सरकार इस वक्त रिकॉर्ड रेमिटेंस के आंकड़े दिखाकर इतराने में लगी है। लेकिन असलियत कुछ और ही कहती है। विदेशों में बैठे पाकिस्तानियों से आए पैसे ने इस बार सारे पुराने रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। मगर एक्सपर्ट्स का कहना है कि ये गर्व की बात नहीं, बल्कि देश की बिगड़ती आर्थिक हालत का सबूत है।  

41.6 बिलियन डॉलर का रिकॉर्ड, पर खुशी क्यों नहीं?    

स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान SBP के मुताबिक वित्त वर्ष 2025-26 में प्रवासी पाकिस्तानियों ने देश में 41.6 बिलियन डॉलर भेजे। ये पिछले साल FY25 के 38.3 बिलियन डॉलर से 8.6% ज्यादा है। सरकार इसे बड़ी कामयाबी बता रही है।  

लेकिन आंकड़े के पीछे की कहानी अलग है। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था आज बुनियादी जरूरतों के लिए भी IMF के कर्ज और प्रवासियों के भेजे पैसे पर टिकी हुई है। बेरोजगारी चरम पर है, फैक्ट्रियां बंद पड़ी हैं और लोग रोजी-रोटी के लिए बाहर जा रहे हैं। ऐसे में रेमिटेंस बढ़ना तरक्की नहीं, मजबूरी दिखाता है।  

एक्सपोर्ट से भी ज्यादा हो गई रेमिटेंस   

सबसे चौंकाने वाली बात ये है कि FY26 में पाकिस्तान को रेमिटेंस के तौर पर जो पैसा मिला, वो उसके कुल एक्सपोर्ट से भी ज्यादा था। इसी वित्त वर्ष में पाकिस्तान का एक्सपोर्ट 40.67 बिलियन डॉलर रहा। जबकि रेमिटेंस 41.6 बिलियन डॉलर। किसी भी मजबूत अर्थव्यवस्था की रीढ़ उसका मैन्युफैक्चरिंग और एक्सपोर्ट होता है।

पाकिस्तान में मामला उल्टा है। यहां उत्पादन के बजाय 'मनी ऑर्डर' पर देश चल रहा है। जब कोई देश अपनी आयात की जरूरतें भी प्रवासियों की कमाई से पूरी करे, तो समझिए कि अर्थव्यवस्था कितनी नाजुक है। पाकिस्तान का सबसे बड़ा सिरदर्द उसका व्यापार घाटा है। आयात निर्यात से कहीं ज्यादा है और डॉलर की किल्लत लगातार बनी हुई है।  

कहां से आया सबसे ज्यादा पैसा?  

SBP के डेटा के अनुसार FY26 में सबसे ज्यादा रेमिटेंस सऊदी अरब से 829.6 मिलियन डॉलर आई। इसके बाद UAE से 792.3 मिलियन डॉलर, UK से 514.9 मिलियन डॉलर और अमेरिका से 296.8 मिलियन डॉलर भेजे गए। हालांकि रेमिटेंस में बढ़ोतरी हुई है, पर रफ्तार धीमी पड़ी है।

FY25 में ग्रोथ 26.6% थी और FY24 में 10.7% थी। इस बार ये घटकर 8.6% रह गई है। कुल मिलाकर 41.6 बिलियन डॉलर का आंकड़ा पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था की असल तस्वीर दिखाता है। वो तस्वीर जिसमें देश उत्पादन से नहीं, बल्कि कर्ज और बाहर बैठे अपने लोगों की दया पर जिंदा है।   First Updated : Friday, 10 July 2026