ढाका: बांग्लादेश में नई सरकार बनने से पहले सियासी माहौल एक बार फिर गरमा गया है. चुनाव परिणाम आने के बाद जहां एक ओर सत्ता पक्ष सरकार गठन की तैयारी में जुटा है, वहीं दूसरी ओर विपक्षी दल सड़कों पर उतरने की तैयारी कर रहे हैं. राजधानी ढाका में सोमवार को बड़े विरोध मार्च का ऐलान किया गया है, जिससे राजनीतिक तनाव और बढ़ सकता है.
जमात-ए-इस्लामी के नेतृत्व में 11 दलों के गठबंधन ने 13वें राष्ट्रीय संसद चुनाव में धांधली और अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए विरोध मार्च बुलाया है. यह मार्च ढाका में निकाला जाएगा, जिसमें गठबंधन के नेता और कार्यकर्ता शामिल होंगे. जमात और नेशनल सिटिजन पार्टी (एनसीपी) दोनों ने चुनाव प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि मतदान और मतगणना के दौरान गंभीर गड़बड़ियां हुईं, जिससे कई सीटों के नतीजे प्रभावित हुए.
मतगणना में गड़बड़ी का दावा
एनसीपी के नेता नाहिद इस्लाम ने आरोप लगाया कि कम से कम 10 प्रतिशत वोटों में हेरफेर की गई. उन्होंने कहा कि कुछ खास निर्वाचन क्षेत्रों को निशाना बनाकर परिणाम बदले गए. 11 दलों की बैठक के बाद उन्होंने यह बयान दिया और चुनाव आयोग से निष्पक्ष जांच की मांग की.
मुख्य विपक्षी दल जमात-ए-इस्लामी ने भी 32 निर्वाचन क्षेत्रों में मतों की दोबारा गिनती की मांग की है. पार्टी का कहना है कि उसके उम्मीदवारों को अनुचित तरीके से हराया गया. दिलचस्प बात यह है कि चुनाव के तुरंत बाद पार्टी ने बीएनपी की जीत को स्वीकार करने वाला संदेश जारी किया था, लेकिन बाद में उसे वापस ले लिया.
सरकार गठन से पहले राजनीतिक मुलाकातें
इन आरोपों और विरोध की घोषणाओं के बीच तारिक रहमान ने रविवार को जमात प्रमुख शफीकुर रहमान और एनसीपी नेता नाहिद इस्लाम से मुलाकात की. बीएनपी ने इन बैठकों को सकारात्मक राजनीतिक संवाद की शुरुआत बताया है. यह मुलाकात ऐसे समय हुई जब बीएनपी दो दिन बाद सरकार बनाने जा रही है. माना जा रहा है कि नई सरकार से पहले राजनीतिक संतुलन बनाने की कोशिशें जारी हैं.
BNP की शानदार जीत
हालिया संसदीय चुनाव में बीएनपी ने शानदार प्रदर्शन किया. पार्टी को लगभग 50 प्रतिशत वोट मिले और उसने 209 सीटें जीतकर दो-तिहाई बहुमत हासिल किया. दूसरी ओर, जमात-ए-इस्लामी ने भी अब तक का अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और 31 प्रतिशत से अधिक वोट के साथ 68 सीटें जीतीं. First Updated : Monday, 16 February 2026