बरसी के दिन बलूचिस्तान से उठी बगावत की आवाज, मीर यार का बड़ा दावा-इस्लामाबाद में हैं आतंक की जड़ 

पुलवामा हमले की बरसी पर बलूच नेता मीर यार ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला है. उन्होंने कहा कि ऐसे हमले रोकने हैं तो बलूचिस्तान को आज़ादी देनी होगी।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

इंटरनेशनल न्यूज. 14 फरवरी। वही तारीख। देश फिर 2019 को याद कर रहा है। पुलवामा में 40 जवान शहीद हुए थे। आज सात साल हो गए। लेकिन जख्म अब भी ताजा हैं। बरसी के दिन देशभर में श्रद्धांजलि दी गई। सोशल मीडिया पर भी यादें उमड़ीं। इसी दिन बलूच नेता मीर यार का बयान सामने आया।

क्या बलूच नेता का संदेश?

मीर यार बलूच ने भारत के साथ एकजुटता जताई। उन्होंने कहा कि पुलवामा जैसे हमले अचानक नहीं होते। इनके पीछे संगठित तंत्र काम करता है। उनका सीधा आरोप पाकिस्तान की सेना पर था। उन्होंने कहा कि सेना और सरकार मिलकर आतंकी ढांचे को सहारा देती हैं। मीर यार ने हिंसा की कड़ी निंदा की। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना जताई।

क्या पाकिस्तान पर सीधा इल्जाम?

मीर यार ने अपने बयान में कहा कि जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा जैसे संगठन अकेले नहीं हैं। उनके पीछे ताकतवर हाथ हैं। उन्होंने ISI और पाकिस्तानी मिलिट्री का नाम लिया। कहा कि इन गुटों को अलग करके मत देखिए। यह सब एक ही ढांचे का हिस्सा हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि दुनिया अब भी सच्चाई से आंख चुरा रही है।

क्या बलूचिस्तान की आजादी हल?

मीर यार का सबसे बड़ा दावा यही रहा। उन्होंने कहा कि अगर बलूचिस्तान आज़ाद हो जाए तो हालात बदल सकते हैं। उनका तर्क है कि वहां के खनिज और संसाधन का इस्तेमाल गलत कामों में हो रहा है। यार ने कहा कि  अरबों डॉलर की दौलत हिंसा में झोंकी जा रही है। अगर यह बंद हो जाए तो आतंक की कमर टूटेगी। यही उनका साफ संदेश था।

क्या ऑपरेशन सिंदूर से खुलासा?

यार मीर ने भारतीय कार्रवाई का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि हमले के बाद दुनिया ने कई तस्वीरें देखीं। पाकिस्तानी अधिकारियों को आतंकी जनाजों में शामिल होते देखा गया। यह तस्वीरें सवाल खड़े करती हैं। क्या यह महज संयोग था। या रिश्ते इससे गहरे हैं। मीर यार ने कहा कि सच्चाई अब छिपी नहीं है।

क्या दुनिया अब सुनेगी?

बलूच नेता लंबे समय से पाकिस्तान के खिलाफ लिखते रहे हैं। उनका कहना है कि बलूचिस्तान में भी दमन होता है। वहां आवाज उठाने वालों को दबाया जाता है। अब उन्होंने भारत के मुद्दे पर भी खुलकर बोला। सवाल है कि क्या अंतरराष्ट्रीय समुदाय इस बयान पर ध्यान देगा। या फिर यह भी एक और बयान बनकर रह जाएगा।

क्या आगे की राह बदलेगी?

पुलवामा की बरसी पर आया यह बयान चर्चा में है। भारत और पाकिस्तान के रिश्ते पहले से तनाव में हैं। ऐसे में बलूचिस्तान का मुद्दा फिर उभरा है। मीर यार का कहना है कि समस्या की जड़ पर वार करना होगा। वरना हमले रुकेंगे नहीं। क्या आने वाले समय में इस पर नई बहस छिड़ेगी। यही बड़ा सवाल है।

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